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NSUI गौरेला पेण्ड्रा मरवाही ने कोरोना वारियर्स को छाता, रेनकोट वितरण कर मनाया राहुल गांधी का जन्मदिवस

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गौरेला पेण्ड्रा मरवाही – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जननेता राहुल गांधी का जन्मदिवस गौरेला पेण्ड्रा मरवाही के NSUI सदस्यों द्वारा पूरे जिले के कोरोना वारियरो को को छाता बाटकर मनाया गया । जिसमे मरवाही के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ,दानिकुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ,जिला अस्पताल गौरेला पेण्ड्रा मरवाही , के सभी पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी , वार्डबॉय , एवं सभी पत्रकार बन्धुवों को साथ ही सभी जरूरतमंद लोगों को छाता वितरण किया गया ।

जिसमे मुख्य रूप से NSUI जिला प्रवक्ता अनुज ताम्रकार , NSUI ब्लॉक अध्यक्ष मरवाही गजेंद्र पनिका , उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास ,सचिव शेषमन यादव , सहसचिव मनोहर रैदास , ब्लॉक पेण्ड्रा से सोहम गौतम , सार्थक गुप्ता , निखिल चतुर्वेदी , सक्षम गुप्ता ,विकाश सोनी ,सूरज मार्को ,अतुल लखरे ,भूपेंद्र चौधरी ,राहुल, ब्लॉक गौरेला से दीपक यादव,चंदन अग्रवाल, विक्की वासुदेव ,विकास भट्ट ,सजल जैन,सजल विश्वकर्मा, गौरव तिवारी, सौरभ केसरवानी ,अकिब खान आदि उपस्थित रहे।

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RSS ने OTT के ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ पर रोक के लिए बनाया पैनल, जानिए कौन-कौन पैनल में है शामिल…

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर “सांस्कृतिक प्रदूषण” से निपटने के तरीकों पर सुझाव देने के लिए एक अनौपचारिक समूह बनाया है। यह कदम सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा OTT (ओवर-द-टॉप) कंटेंट को “नैतिक पतन” का कारण बताए जाने के लगभग दो साल बाद उठाया गया है। इस पैनल में शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई सदस्य शामिल हैं, जिनमें पूर्व वाइस-चांसलर और प्रचारक भी हैं।

RSS के एक सूत्र ने बताया कि कुछ महीने पहले बनाए गए इस पैनल की पहली बैठक पिछले महीने हुई थी। “यह एक अनौपचारिक समूह है और एक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा जिसे अंततः केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और केंद्र सरकार के अन्य संबंधित पक्षों को सौंपा जाएगा, ताकि OTT प्लेटफॉर्म पर आ रही अश्लीलता से निपटा जा सके।”

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उन्होंने कहा, “हमें इस सांस्कृतिक प्रदूषण से निपटने के लिए सेंसर बोर्ड जैसी किसी चीज़ की ज़रूरत है, जो हमारे परिवारों और खासकर युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रहा है।”

एक अन्य सूत्र ने कहा: “समूह के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन प्रस्ताव तैयार करने से पहले हमें कानून के क्षेत्र के लोगों के साथ भी व्यापक विचार-विमर्श करने की ज़रूरत है।”

भागवत ने 12 अक्टूबर, 2024 को नागपुर में अपने सालाना विजयादशमी भाषण में OTT कंटेंट पर निशाना साधा था। RSS प्रमुख ने तब कहा था, “OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली चीज़ें इतनी घिनौनी होती हैं कि उनके बारे में बात करना भी अशोभनीय होगा… इसे कानून के ज़रिए रेगुलेट करने की ज़रूरत है क्योंकि यह नैतिक पतन के बड़े कारणों में से एक है।” उन्होंने समाज में कथित “विकृति” के लिए OTT प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार ठहराया था।

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EPF पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला: पीएफ पर बेसिक सैलरी लिमिट ₹15000 से बढ़ाकर 25 हजार की, 51 लाख कर्मचारियों को होगा फायदा

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Modi Government Big Decision on EPF: कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ (EPF) को पर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने PF के लिए बेसिक सेलरी लिमिट ₹15000 से बढ़ाकर ₹25 हजार कर दी है। अब कंपनियों को 25 हजार रुपए तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को PF के दायरे में शामिल करना ही होगा। मोदी कैबिनेट की बैठक में पीएफ पर बेसिक सैलरी लिमिट बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इससे 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पहले 15 हजार रुपए से ज्यादा बेसिक सेलरी वाले कर्मचारियों का PF कटना या न कटना उनकी मर्जी पर डिपेंड करता था। नए आदेश से 25 हजार रुपए की लिमिट होने के बाद PF कटने से कर्मचारी की सेविंग बढ़ेगी और रिटायरमेंट पर बड़ा फंड मिलेगा। इस पर भारत सरकार का अनुमानित खर्च हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये होगा।

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यहां एक बात यह भी समझना जरूरी है कि EPF में अनिवार्य योगदान की वेतन सीमा ₹15,000 ही रहेगी। यानी कंपनी और कर्मचारी का अनिवार्य EPF योगदान ₹15,000 तक की सैलरी के हिसाब से ही तय होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA मिलाकर ₹20,000 है, तो उसे EPF में शामिल करना अनिवार्य होगा, लेकिन अनिवार्य योगदान ₹15,000 की सीमा तक ही होगा।

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अमित शाह का UCC पर बड़ा ऐलान: 21 राज्यों में लागू होगा समान नागरिक संहिता, 2029 लोकसभा चुनाव से पहले होगा लागू

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Amit Shah Big Announcement On UCC: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) पर बड़ा ऐलान किया है। अमित शाह ने 2029 लोकसभा चुनाव (2029 Lok Sabha elections) से पहले देश के 21 राज्य़ों में UCC लागू करने का ऐलान किया है। अमित शाह ने कहा कि 21 BJP-NDA शासित राज्यों साल 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले समान नागरिक संहिता लागू कर दिया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि देश के कई राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है। उत्तराखंड, गुजरात और असम में यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में NDA शासित बाकी राज्यों में भी इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

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मुंबई में सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमिच शाह ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया कई राज्यों में आगे बढ़ चुकी है। सरकार की कोशिश है कि NDA के नेतृत्व वाली सभी राज्य सरकारों में भी इसे लागू किया जाए। UCC का मकसद अलग-अलग धर्मों के लिए अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समान नागरिक नियम लागू करना है। हालांकि, इसके प्रावधान और लागू करने की प्रक्रिया राज्यों के स्तर पर अलग हो सकती है। शाह ने कहा कि तीन तलाक को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया है और मुझे भरोसा है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में हम 2029 से पहले UCC लागू कर देंगे।

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उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC लागू
आपको बता दें कि बीजेपी नेतृत्व वाला NDA दिल्ली, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित 19 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है। उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC लागू हो चुका है। जबकि मध्य प्रदेश ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

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