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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार एक बार फिर OBC आरक्षण का झुनझुना थमाएंगे! जनता बनेगी फिर मूर्ख?

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रायपुर: चुनावी पॉलिटिक्स में आरक्षण हमेशा से एक बड़ा सियासी मुद्दा रहा है। छत्तीसगढ़ में ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने के नाम पर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश में ओबीसी वर्ग के लोगों की सही संख्या का पता लगाने के लिए एक सर्वे की तैयारी कर ली है, जिसे लेकर बीजेपी खेमे में हड़कंप है। विपक्ष इसे भी सरकार का एक झुनझुना बता रही है। आखिर सरकार के इस कदम से भाजपा खेमे में इतनी बौखलाहट क्यों है? इस मुद्दे को अभी उठाने के क्या मायने हैं?

छत्तीसगढ़ में ओबीसी की वास्तविक संख्या कितनी है इसका पक्का जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि राज्य सरकार ने अब वास्तविक संख्या का पता लगाने सर्वे भी शुरू कर दिया है। बताया गया है कि ओबीसी वर्ग के नाम पर 32 लाख से अधिक राशन कार्ड बने हैं। दावा ये भी है कि राज्य में करीब 45 फीसदी आबादी ओबीसी की है। जाहिर है राज्य की सत्ता की चाबी इतनी बड़ी आबादी के हाथों में ही होगी। सत्ता में बैठी कांग्रेस अब इस आबादी को अपने पक्ष में करने के लिए कवायद शुरू कर रही है। सरकार ने वर्गों की सही संख्या जानने के लिए एक कमेटी बना दी है जो जल्द इसपर सर्वे करेगी। इस कदस से बीजेपी की सासें अटकने लगी हैं, बीजेपी सरकार के इस सर्वे को लॉलीपॉप बताकर अपनी खीझ मिटा रही है।

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इधर, कांग्रेस की दलील है कि वो हाईकोर्ट के निर्देश पर ही सर्वे करवा रही है, जिसमें बीजेपी को दिक्कत नहीं होना चाहिए। दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 15 अगस्त 2019 को राज्य में जातिगत आरक्षण में बदलाव की घोषणा की, जिससे प्रदेश में आरक्षण का दायरा बढ़कर 82 फीसद तक पहुंच गया। जो कि कुल 50 फीसद आरक्षण के तय मापदंड से कहीं अधिक है। सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण में वृद्धि पर रोक लगाते हुए राज्य में ओबीसी और आर्थिक तौर पर कमजोरों की सही संख्या जानने के लिए कहा।

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जानकारी के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल करीब 68 लाख 15 हजार से ज्यादा राशनकार्ड हैं, जिसके तहत दो करोड़ 52 लाख से ज्यादा लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें 32 लाख ओबीसी वर्ग के राशनकार्ड हैं जो कि कुल संख्या का लगभग 47 फीसद है। अब OBC आरक्षण का बढ़ा प्रतिशत लागू हो पाएगा या नहीं ये तो भविष्य बताएगा, पर जो दल इसे लागू करेगा। अगली बार सत्ता उसी के हाथ जाएगी इसके तगड़े आसार हैं। ऐसे में भूपेश सरकार की इस कवायद से बीजेपी नेताओं की चिंता बढ़ना लाजमी है।

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‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ : सीएम साय ने कहा – गौ संरक्षण जनभागीदारी से ही बनेगा जनआंदोलन

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गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। ये बातें मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।

इस अवसर पर सीएम ने प्रदेशव्यापी ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।

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“सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सुनेगी…”, सर्वदलीय बैठक खत्म होते ही किरण रिजिजू का पहला बयान, कल पेश होगा वंदे मातरम् बिल

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संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक ख़त्म हो गई है। इस बैठक के ख़त्म होते ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, अच्छे माहौल में यह बैठक हुई। सभी ने इस बैठक में अपनी बात रखी। संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक के बाद मिडिया को दिए अपने पहले बयान में कहा कि, सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सत्र के दौरान सुनेगी। इसके अलावा बागी सांसदों को बैठक में बुलाये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि, नियमों के मुताबिक़ ही उन्हें बुलाया गया है।

बता दें कि, रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में व्यवधान पैदा करने से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि इससे जनता के पैसे और समय की बर्बादी होती है।

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सीएम साय ने अधिकारियों को किया अलर्ट, बारिश से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश…

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

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