छत्तीसगढ़
इंडिया रूरल कोलोक्वि: ग्रामीण गरीबी और असमानता की चुनौतियों पर हुआ संवाद

नई दिल्ली की सामाजिक संस्था ट्रान्सफॉर्मिंग रूरल इंडिया फाउंडेशन (ट्रिफ) और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आज राजधानी के एक निजी होटल में ’इंडिया रूरल कोलोक्वि’ का आयोजन किया गया। यहां देश में ग्रामीण गरीबी और असमानता की प्रमुख चुनौतियों पर संवाद किया गया। इस दौरान नये गांवों के निर्माण में समाज, सरकार और बाजार की भूमिका और चुनौतियों के समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस परिचर्चा में राज्य के वरिष्ठ अधिकारी, समाजसेवक, उद्यमी एवं विभिन्न सामाजिक विकास के क्षेत्र विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और ग्रामीण गरीबी, असमानता एवं अन्य विसंगतियों के समाधान पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर बिहान योजना के तहत लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं की सफलता पर आधारित बुकलेट का विमोचन भी किया गया।

शुभारंभ सत्र में छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि ’इंडिया रूरल कोलोक्वि‘ का आयोजन पहली बार रीजनल स्तर पर छत्तीसगढ़ में हो रहा है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर योजना निर्माण के लिए वास्तविक और सही जानकारी जा सकेगी। इससे स्थानीय सोच और चुनौतियों के आधार पर निकली जानकारी योजनाओं के निर्माण में उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि भारत अपनी 75 वर्ष की यात्रा में 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है।

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार भारत कीे आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक यह विकसित देशों की श्रेणी में आ जाएगा। ये अनुमान उत्साहजनक हैं, लेकिन विकास और उसकी गति के लिए समझना भी जरूरी है कि विकास का तब तक कोई अर्थ नहीं होगा जब तक इसका फायदा हर नागरिक तक न पहुंचे। हम विकसित देश तभी बनेंगे जब हर नागरिक की इसमें सहभागिता होगी।
उपाध्यक्ष सिंह ने कहा कि देश में गरीबी और असमानता बड़ी चुनौतियां हैं। अब गरीबी को मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के आधार पर मापने लगे हैं, इसमें आर्थिक के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य लिविग स्टैंडर्ड शामिल होते हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के 13 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से बाहर आए हैं। यह बड़ा आंकड़ा है लेकिन अधिक महत्वपूर्ण यह है कि गरीबी रेखा से कितने ऊपर तक ये लोग पहुंचे हैं।
श्री अजय सिंह ने कहा कि भारत आबादी के कारण एक बड़ा मार्केट है। देश में समाज, सरकार और बाजार सही रणनीति पर चलेंगे तो निश्चित ही 2047 तक विकसित राष्ट्र बन जाएंगे। इसके लिए हर राज्य की स्थानीय स्थिति, विकास और चुनौतियों के आधार पर पॉलिसी बनानी पड़ेगी। छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है इसलिए यहां राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। डीबीटी के माध्यम से धान खरीदी कर 25 लाख किसानों के हाथों में 29 हजार करोड़ रूपए दिए गए। गोधन न्याय योजना के माध्यम से पशुपालकों से गोबर खरीदी कर 251 करोड़ का भुगतान किया गया। इस गोबर से अब वर्मी कम्पोस्ट बनाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा के विकास के लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना शुरू की गई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए स्वामी आत्मानंद स्कूल शुरू किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के माध्यम से रोजगार दिया जा रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की संचालक श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने समाज में महिलाओं की भूमिका और उसमें बदलाव पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं र्को आिर्थक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए घरों से बाहर निकालना एक चुनौती है। यह काम सपोर्ट, मोटिवेशन और समूह चर्चा के माध्यम से किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ में गौठानों, रीपा, बिहान जैसी महिला केन्द्रित योजनाओं से जुड़कर बड़ी संख्या में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है और उनका जीवन स्तर ऊपर उठ रहा है।
पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी, रायपुर के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला ने वीडियो संदेश के माध्यम से बताया कि सरकार के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक बाजार के फायदे पहुंचना कार्यक्रम की थीम है। परिचर्चा के बाद निकले निष्कर्ष से पिछड़े वर्गों के मदद के लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में रीजनरेटिव डेव्लपमेंट – होल ऑफ सोसायटी एप्रोच विषय पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री आर. प्रसन्ना ने कहा कि हमें ग्लोबल चेंजेस को ध्यान में रखते हुए विकास की ओर बढ़ना होगा। इसमें सामुदायिक सहयोग भी जरूरी है। हमें योजनाएं बनाते समय सस्टेनेबल डेव्हलपमेंट से एक कदम आगे बढ़कर सकारात्मक बदलाव के लिए रीजनरेटिव एप्रोच से सोचना होगा। इसी सोच से डी-फारेस्ट्रेशन के युग में छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र बढ़ा है। बहुआयामी गरीबी में यहां तेजी से कमी आई है। इस सत्र में मनरेगा आयुक्त श्री रजत बंसल, हिन्दुस्तान यूनिलीवर फाउंडेशन की सुश्री अनंतिका और फिल्म अभिनेत्री व समाज सेवी सुश्री राजश्री देशपांडे ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सपनों का समुंदर (डीप ड्राइव इनटू ड्रीम्स) के सत्र में प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आए युवाओं, जनप्रतिनिधियों, बिहान दीदियों और परिवारों ने अपने जीवन, संघर्ष, चुनौतियों और सपनों पर बात की और बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर पेश की। इस पर समाजसेवी और सीनियर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. मंजीत कौर बल ने कहा कि अवसर और सहयोग से सपने पूरे होंगे। व्यवस्था और तकनीक को पूरा करने की जिम्मेदारी सबकी है। कार्यक्रम में वर्धा के मगन संग्रहालय की सुश्री विभा गुप्ता, ट्रिफ के एमडी श्री अनिश कुमार सहित विभिन्न क्षेत्रों से आई बिहान दीदियां और समाजसेवी शामिल थे।
news
CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है


















