देश
4 दिन शराब दुकानें रहेंगी बंद, सरकार ने घोषित किया ड्राई डे
नई दिल्ली| आने वाले समय में देश में कई प्रमुख त्योहारों का समय शुरू होने वाला है. इसी को लेकर दिल्ली सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश में प्रमुख त्यौहारों और राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर चार दिनों तक राजधानी में ड्राई डे घोषित करने का फैसला लिया गया है.
सरकार की तरफ से कहा गया है कि मुहर्रम, स्वतंत्रता दिवस, जन्माष्टमी और ईद-ए-मिलाद पर दिल्ली में शराब की दुकानें बंद रहेगी. बता दें कि 29 जुलाई को मुहर्रम है. 15 अगस्त को हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. इसके अलावा 7 सितंबर को जनमाष्टमी है और 28 सितंबर को ईद-ए-मिलाद है. इन सभी तारीखों पर दिल्ली में शराब की दुकानें बंद रहेंगी.
देश में जल्द ही त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है. जिसके देखते हुए दिल्ली सरकार ने यह फैसला लिया है. स्वतंत्रता दिवस पर पहले से ही यह नियम है कि इस दिन शराब की दुकानें बंद रहती हैं. यानी स्वतंत्रता दिवस पर पहले से ही ड्राई डे घोषित रहता है. इसके अलावा त्योहारों को देखते हुए शराब की दुकानों को लेकर राज्य सरकारें अपनी तरफ से फैसला ले सकती हैं.
जुलाई के अंतिम सप्ताह से ही त्यौहार का सीजन शुरू हो रहा है. इस दौरान भारी संख्या में लोग बाजारों में खरीदारी और प्रमुख स्थलों पर परिवार के साथ घूमने के लिए निकलेंगे. दिल्ली सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि दिल्ली में चार दिन ड्राई डे घोषित रहेगा, जिसमें 29 जुलाई को मोहर्रम, 15 अगस्त को राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस, 7 सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी और 28 सितंबर को ईद-ए-मिलाद की डेट शामिल है. इन सभी चार तारीख पर दिल्ली में शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी.
आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘आबकारी नियमों के मुताबिक, ड्राई डे के दिन लाइसेंस धारकों को शराब बेचने की अनुमति नहीं है. यह प्रतिबंध इस दिन होटल, बार, क्लब या अन्य कुछ जगहों पर लागू नहीं होता. हालांकि, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के दिन इन सभी जगहों पर भी शराब परोसना प्रतिबंधित है. इस वक्त दिल्ली में एक साल में करीब 21 ड्राई डे होते हैं. हालांकि, जब दिल्ली सरकार नई शराब नीति लेकर आई थी तब अचानक यह ड्राई डे 21 से घटकर 3 रह गये थे. हालांकि, आबकारी नीति 2021-22 को सरकार ने उस वक्त वापस ले लिया जब सीबीआई ने इस नीति में कथित घोटालों को लेकर केस दर्ज किया था.
अधिकारी ने कहा कि ड्राई डे का शिड्यूल आबकारी विभाग हर साल जारी करता है और चुनाव तथा कुछ अन्य खास मौकों पर ड्राई डे की संख्या बढ़ भी सकती हैं. एक साल में ड्राई डे कितने होंगे? इसकी संख्या तय नहीं है और सरकार इसमें बदलाव कर सकती है.
कब-कब बंद रहता है ड्राई डे
बता दें कि ड्राई डे नेशनल हॉलिडे इसमें 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले चुनाव और प्रमुख त्योहारों के मौकों पर किया जाता है. इसके अलावा राज्य सरकार अपनी एक्साइज पॉलिसी के अनुसार ड्राई डे की घोषणा करती हैं.
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
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परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
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भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
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खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।
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