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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: कोयला खनन का विरोध क्यों कर रहे हैं ये आदिवासी

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कड़ाके की ठंड है. सर्द तेज़ हवा सिहरन पैदा कर रही है. हवा में मौजूद बारूद की गंध की वजह से सांस लेने में तकलीफ़ होती है.

रह रह कर तेज़ हवा के झोंके, हरिहरपुर गाँव के पेड़ों पर धूल की परत छोड़कर जा रहे हैं. दोपहर के ठीक एक बजने वाले हैं. एक एक कर सिलसिलेवार धमाके इलाक़े को दहला रहे हैं.

ये धमाके हरिहरपुर से लगी एक बड़ी कोयले की खुली खदान में हो रहे हैं. कोयले की चट्टानों को तोड़ने के लिए डायनामाइट से विस्फोट किया जा रहा है. ये सिलसिला अब कई सालों से चल रहा है और हरिहरपुर के लोगों की ज़िन्दगी इसी के बीच चल रही है.

सरगुजा ज़िले की उदयपुर तहसील का ये गाँव हरिहरपुर, बस अपने दिन ही गिन रहा है. कुछ दिनों की ही बात है, ये गाँव भी कोयले की खुली खदान में तब्दील हो जाएगा. इसी बात की चिंता 65 साल की संपतिया बाई को भी सता रही है.

वो पिछले दो सालों से हर रोज़ हरिहरपुर में मौजूद धरना स्थल पर आतीं हैं और दिन भर धरने पर बैठी रहती हैं.

पीछे की खदान और उसके किनारे पर मौजूद मलबे के ढेर को दिखाते हुए वो कहती हैं, “खदान यहां तक आ गयी है. धीरे धीरे कर के आगे बढ़ रही है. ये खदान आपको दिख रही है ना ? ……ये गाँव हमारे रोकने से बचा हुआ है नहीं तो हमारा हरिहरपुर नहीं बचता… आंदोलन की वजह से ही अभी तक बचा हुआ है.”

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कुछ देर तक वो खामोश खदान की तरफ़ देखती रहीं और फिर अचानक ज़ोर से बोल पड़ीं, “हम अपनी ज़मीन नहीं देंगे. यही बोल कर हम यहाँ बैठे हुए हैं दो सालों से….”

हसदेव अरण्य को ‘मध्य भारत के फेफड़ों’ के रूप मे जाना जाता है. विशालकाय पेड़ों का ये जंगल एक लाख 70 हज़ार हेक्टेयर में फैला हुआ है. यहाँ कुल 23 कोयले के ब्लाक हैं. लेकिन जहां अनुमति दी गयी है वहाँ कोयले के खनन के लिए पेड़ काटने का सिलसिला जारी है.

कोयले की ‘ओपन कास्ट’ या खुली खदानें, धीरे-धीरे इस जंगल को निगलती जा रहीं हैं. जंगलों के साथ साथ यहाँ के 54 गांवों पर भी ख़तरा मंडराता जा रहा है.

पिछले एक दशक से भी ज़्यादा समय से स्थानीय लोग और यहाँ के आदिवासी, कोयले के खनन का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनका अस्तित्व इस जंगल के अस्तित्व से ही जुड़ा हुआ है.

उदयपुर के मंडल अधिकारी यानी एसडीएम बीआर खांडे से हमारी मुलाक़ात तहसील कार्यालय में हुई. रात का समय था लेकिन वो फिर भी अपने काम में लगे हुए थे.

उन्होंने बताया कि खनन के इलाक़े में आने वाले 54 गांवों में से कई गांवों की भूमि का अधिग्रहण हो चुका है और कई गांवों की ज़मीन लेने की प्रक्रिया चल रही है.

उनका कहना था कि जिन गांवों में जन सुनवाई संपन्न हो गयी और ग्रामीणों की सहमति मिल गयी उन गाँवों का अधिग्रहण किया गया और तय किये गए मुआवज़े के पैकेज के तहत ही सबका पुनर्वास हुआ है.

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2022 में तेज़ हुआ आंदोलन
यूं तो आंदोलन एक दशक से भी ज़्यादा समय से चल रहा है मगर इसने तूल तब पकड़ा जब पहली बार वर्ष 2022 में पेड़ों की कटाई का सिलसिला शुरू हुआ था.

फिर पिछले साल दिसंबर में एक बार फिर पेड़ काटे गए और आदिवासियों और ‘सिविल सोसाइटी’ का गुस्सा फूट पड़ा.

सरकार का कहना है कि पेड़ ‘परसा ईस्ट और कांता बसन (पीईकेबी) कोयला खदान परियोजना के लिए काटे गए हैं. ये कोयले के ब्लाक राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित किये गए हैं.

एसडीएम बीआर खांडे कहते हैं, “सरकार के जो आदेश आये हैं, उस के तहत ही ‘लीगल’ कार्रवाई की गयी है. दिसंबर में जो पेड़ काटे गए हैं, उस ज़मीन का अधिग्रहण वर्ष 2018 में ही किया जा चुका था और इलाक़े के लोगों का पुनर्वास भी हुआ था.”

वो कहते हैं, “हमारी तरफ़ से वैसे कोई ‘एक्स्ट्रा’ कार्रवाई नहीं की गयी है…. जो लॉ एंड आर्डर की स्थिति थी उसी को हमें देखना पड़ा है…. और बाक़ी जिस विभाग का जो काम था, उस विभाग ने अपना काम किया है. जैसे पेड़ों के काटने का काम हो या राजस्व विभाग का काम.”

छत्तीसगढ़

केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

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बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.

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इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.

जा सकती थी नवजात शिशु की जान

डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,

सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.

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परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.

पहली बार आया अनोखा केस

सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.

 

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छत्तीसगढ़

साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।

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महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार

इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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कैरियर

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

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Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

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बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।

लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार

इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट

पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।

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