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जस्टिस संजीव खन्ना बने देश के 51वें CJI: राष्ट्रपति द्राैपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, 6 महीने का होगा कार्यकाल

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CJI Oath: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार (11 नवंबर) को राष्ट्रपति भवन में जस्टिस संजीव खन्ना को भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) की शपथ दिलाई।

CJI Oath: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार (11 नवंबर) को राष्ट्रपति भवन में जस्टिस संजीव खन्ना को भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) की शपथ दिलाbZ। जस्टिस खन्ना छह महीने की अवधि के लिए CJI का कार्यभार संभालेंगे। जस्टिस संजीव खन्ना देश के दूसरे सबसे वरिष्ठ जस्टिस हैं। जस्टिस खन्ना का नाम सीजेआई के लिए जिन्हें निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने प्रस्तावित किया था। जस्टिस चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर को समाप्त हुआ है।

साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। अपने लंबे करियर में उन्होंने संवैधानिक कानून, कराधान, वाणिज्यिक कानून, मध्यस्थता और पर्यावरण कानून जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। दिल्ली उच्च न्यायालय में उन्हें 2005 में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और 2006 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। इसके बाद उनका न्यायिक सफर महत्वपूर्ण योगदानों से भरा रहा है, जिसने उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया।

जस्टिस खन्ना दे चुके है कई ऐतिहासिक फैसले
2019 में, जस्टिस खन्ना को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने कई अहम फैसले सुनाए। जस्टिस खन्ना ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिससे केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार करने का मौका मिला। इसके साथ ही, जस्टिस खन्ना ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के मामले में देरी के आधार पर जमानत को मान्यता दी।

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आर्टिकल 370 हटाने के फैसले पर मुहर लगाई
2023 में जस्टिस खन्ना की बेंच ने आर्टिकल 370 (Article 370) को हटाने के फैसले पर मुहर लगाई, जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त हुआ। इस फैसले में जस्टिस खन्ना ने कहा कि आर्टिकल 370 को हटाना भारत के संघीय ढांचे को प्रभावित नहीं करता। उनके इस फैसले ने भारत के फेडरल स्ट्रक्चवर को स्थायित्व प्रदान किया और कई विवादों का अंत किया।

असंवैधानिक करार दिया, यह कहते हुए कि यह मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है और राजनीतिक वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव लाता है।

वीवीपैट सत्यापन से जुड़ी याचिका कर दी थी खारिज
2024 में वीवीपैट (VVPAT) स्लिप्स के 100% सत्यापन की मांग वाली याचिका पर जस्टिस खन्ना ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रक्रिया (EVM) की विश्वसनीयता पर भरोसा जताया और कहा कि वर्तमान प्रक्रिया सुरक्षित और विश्वसनीय है। इस फैसले ने चुनावी प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखने में मदद की।

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नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में प्रमुख भूमिका
जस्टिस संजीव खन्ना मौजूदा समय में नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा, जस्टिस खन्ना भोपाल में राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य भी हैं। जस्टिस खन्ना न्यायिक सेवाओं और प्रशिक्षण में कई सुधार लाने के लिए सक्रिय रहे हैं। जस्टिख खन्ना कई बार कह चुके हैं कि न्यायिक प्रणाली को सरल और सुलभ बनाना आवश्यक है, ताकि न्याय हर व्यक्ति तक पहुंच सके।

उनसे न्यायपालिका में सुधार और महत्वपूर्ण फैसलों की उम्मीदें हैं। उनके पिछले अनुभवों और निर्णयों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वह न्यायपालिका में मजबूत दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के साथ कार्य करेंगे। राष्ट्रपति द्वारा शपथ ग्रहण के बाद, देश की न्यायपालिका के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू होगा, जिसमें जस्टिस खन्ना का योगदान बेहद महत्वपूर्ण होगा।

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‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

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रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना

छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।

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सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज

केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:

“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम

आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”

‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’

दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।

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कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।

  • महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
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साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।

  • पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल

पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

  • ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
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वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।

  • संगठन और रणनीति का मिला लाभ

बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।

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