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नेपाल त्रासदी: मुश्किल समय में भारत ने निभाया साथ, बालेन शाह ने संसद में कहा- ‘थैंक्यू इंडिया’

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नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत ने जिस तरह से नेपाल की मदद की वह बड़ा ही सराहनीय कदम रहा. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ के मुश्किल समय में मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया है. साथ ही चीन से मिल रही मदद को लेकर प्रधानमंत्री बालेन शाह ने आभार जताया है. संकट के मुश्किल समय में भारत ने नेपाल के आगे मदद का हाथ बढ़ाया है. उन्होंने भारत को धन्यवाद कहा.

आपदा की घड़ी में नेपाल के पीएम बालेन शाह ने आज संसद में भारत के प्रधानमंत्री पीएम मोदी तारीफ करते हुए कहा, ‘थैंक्यू इंडिया’. विदेशी मदद लेने में सरकार की कथित हिचकिचाहट को लेकर उठाए गए सवालों पर बालेन शाह ने कहा कि आपदा के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता. नएस्थान तलाशें

नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा, ‘हमारे मित्र देशों, चीन और भारत ने टेक्नीशियन भेजे थे। पहले ही दिन से उन्होंने इलाके में हुए नुकसान का अंदाजा लगाने और यह पता लगाने के लिए हमारी मदद की.

इसके बाद से लगातार भारत मदद भेज रहा है. इसमें खाने, दवाईयां, ब्रिज बनाने के सामान के साथ डीएनए एक्सपर्ट्स की टीम शामिल है. भारत की ओर से आज बुधवार 2 सितंबर 2026 को भी मदद के तौर पर पांचवीं खेप भेजी है और साथ ही भेजी गई राहत सहायता की पांचवीं खेप काठमांडू पहुंच चुकी है. इसके साथ ही  राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए भारत ने 11 सदस्यों की रेस्क्यू टीम भी साथ भेजी है.

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आपको बताते चले कि पाल में 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. अब तक 1,127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं.

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शिक्षक दिवस : CM साय ने गुरुजनों के नाम लिखा आत्मीय पत्र, अपने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों को किया याद

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के गुरुजनों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया है। मुख्यमंत्री साय ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, उस दौर में शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों और आज शिक्षा के क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे प्रत्येक बच्चे के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानें और विशेष रूप से उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने लिखा है कि आज मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब उन्हें प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के वे दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।

बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफर
मुख्यमंत्री ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया है कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गाँव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। जीवन ने बहुत छोटी उम्र में उनकी कठिन परीक्षा ली। जब वे लगभग दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार, खेती और छोटे भाइयों की चिंता कम उम्र में ही उनके जीवन का हिस्सा बन गई।

गांव में पाँचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहां लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे भी पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गांव के एक बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुंचना आज जितना सहज नहीं था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे, पढ़ाई के संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयाँ भी कई बच्चों के सपनों की राह में बाधा बन जाती थीं।

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मुख्यमंत्री का गुरुजनों से आग्रह, पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिए
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षक दिवस पर गुरुजनों से अत्यंत आत्मीय आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है। हो सकता है आपका थोड़ा-सा विश्वास उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दे। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का विश्वास किसी बच्चे के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और उसकी क्षमताओं को विकसित करना भी है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कभी गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने अपने शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूँजी माना है। साय ने कहा कि समय बदल गया है, स्कूल बदल रहे हैं और पढ़ाने तथा सीखने के साधन भी बदल रहे हैं। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक इन्हें और अधिक बदलेगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का जो संबंध भारतीय परंपरा की आत्मा है, उसका महत्व कभी कम नहीं होगा।

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हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के शिक्षकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ गढ़ें, जहाँ हर स्कूल सपनों का द्वार बने, हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने और हर शिक्षक अपने विद्यार्थी के जीवन में आशा का दीप जलाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए, यही उनकी कामना है। साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की तथा सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दी है।

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श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मिली जिम्मेदारी

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Retired Marshal Jitendra Mishra CEO Ram mandir, मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को हुई अहम बैठक में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (Retired Marshal Jitendra Mishra) को अयोध्या राम मंदिर का पहला CEO (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त किया है. बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया गया.

कौन हैं जितेंद्र मिश्रा?


देवरिया के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा (Jitendra Mishra) देश के एक सम्मानित सैन्य अधिकारी रहे हैं. उन्होंने हाल ही में चर्चा में रहे ऑपरेशन सिंदूर (ऑपरेशन सिंदूर) में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया था. उनके प्रशासनिक अनुभव और अनुशासन को देखते हुए ट्रस्ट ने मंदिर के प्रबंधन को और अधिक प्रोफेशनल बनाने के लिए यह फैसला लिया है. CEO के तौर पर उनकी जिम्मेदारी मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन, सुरक्षा, भक्तों की व्यवस्था और ट्रस्ट के सभी कार्यों के क्रियान्वयन की होगी.

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तीन नए ट्रस्टी की भी नियुक्ति
महेश भागचंदका – दिल्ली के जाने-माने समाजसेवी
मदन मोहन पांडेय – अयोध्या के वरिष्ठ एडवोकेट
निर्मला यादव – RSS से जुड़ीं शिकोहाबाद निवासी.
निर्मला यादव के ट्रस्टी बनने के साथ ही एक नया इतिहास बना है. वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महिला सदस्य बन गई हैं.

चढ़ावा चोरी मामले के बाद हुए बड़े बदलाव
बताया जा रहा है कि ये सभी नियुक्तियां 7 जून को सामने आए मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद की गई हैं. इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है. इस घटना ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे. इसी मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे के बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था.अब पूर्व एयर मार्शल को CEO बनाकर और नए ट्रस्टियों की नियुक्ति कर ट्रस्ट ने साफ संकेत दिया है कि वह राम मंदिर के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी और सख्त अनुशासन वाला बनाना चाहता है.

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ICC ने श्रीलंका को दिया बड़ा झटका: पहली बार आयोजित होने वाली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की छीनी मेजबानी, भारत को मिल सकती है जिम्मेदारी

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Women’s Champions Trophy 2027: श्रीलंका  क्रिकेट फैंस के लिए निराश करने वाली खबर सामने आई है। 2027 की शुरुआत में पहली बार आयोजित होने वाली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी अब श्रीलंका में नहीं होगी। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने श्रीलंका से इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट की मेजबानी वापस ले ली है। ICC और श्रीलंका सरकार के बीच क्रिकेट बोर्ड के कामकाज में दखल को लेकर चल रहा विवाद नहीं सुलझ पाने के बाद यह फैसला लिया गया है।

श्रीलंका को पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी मिली थी, लेकिन अब उसे दूसरे देश में शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि, टूर्नामेंट का नया मेजबान देश कौन होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। माना जा रहा है कि भारत को इसकी मेजबानी मिल सकती है। नए मेजबान के नाम का ऐलान अक्टूबर में होने वाली ICC की अगली बोर्ड बैठक में किया जा सकता है।

क्रिकेट बोर्ड में  सरकारी दखल बना बड़ी वजह

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड में लंबे समय से जारी सरकारी और राजनीतिक हस्तक्षेप ICC के लिए चिंता का विषय रहा है। ICC के नियमों के अनुसार, किसी भी देश का क्रिकेट बोर्ड सरकार के दबाव से स्वतंत्र होकर काम करने में सक्षम होना चाहिए। क्रिकेट

ICC की ओर से श्रीलंका को क्रिकेट प्रशासन में इस व्यवस्था को सुधारने के लिए कई बार कहा गया था। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। सरकार और क्रिकेट बोर्ड के बीच विवादों के समाधान नहीं होने के बाद ICC ने सख्त कदम उठाते हुए महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी श्रीलंका से वापस लेने का फैसला किया।

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श्रीलंका क्रिकेट अधिकारी ने की पुष्टि

श्रीलंका क्रिकेट के अधिकारी प्रकाश शैफ्टर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी अब श्रीलंका में आयोजित नहीं होगी। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट को किसी दूसरे देश में स्थानांतरित किया जाएगा, लेकिन नए आयोजन स्थल का फैसला अभी नहीं हुआ है।

हालांकि, मेजबान बदलने के बावजूद टूर्नामेंट अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित किया जाएगा। छह टीमों के बीच होने वाली यह प्रतियोगिता 14 से 18 फरवरी 2027 के बीच खेली जाएगी।

अक्टूबर में हो सकता है नए मेजबान का ऐलान
अब सभी की नजरें ICC की अक्टूबर में होने वाली बोर्ड बैठक पर हैं। इसी बैठक में महिला चैंपियंस ट्रॉफी के नए मेजबान देश के नाम पर मुहर लग सकती है। फिलहाल भारत को इस टूर्नामेंट की मेजबानी का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। क्रिकेट

मेजबानी जाने से श्रीलंका के क्वालीफिकेशन पर भी संकट
महिला चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबान देश के अलावा आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर रहने वाली टीमों को खेलने का मौका मिलेगा। श्रीलंका की महिला टीम फिलहाल ICC रैंकिंग में छठे स्थान पर है।

ऐसे में मेजबानी गंवाने के बाद श्रीलंका के लिए टूर्नामेंट में सीधे जगह बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि टीम शीर्ष रैंकिंग वाली निर्धारित टीमों में जगह नहीं बना पाती है, तो उसे इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ सकता है।

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