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अमेरिका की तरफ टैंकर चल पड़े’, PAK में ईरान से बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में एक ओर बातचीत चल रही है और दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सख्य बयान आ रहे हैं. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे ज्यादा और सबसे बेहतर तेल है, जबकि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिख रही है.

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Iran Israel war: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होने की खबर तो आई लेकिन असल में दोनों देशों के नेता अभी तक आमने-सामने नहीं बैठे हैं. बातचीत अटकी हुई है और ईरान ने कई शर्तें रख दी हैं. इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी तेल की तारीफ करते हुए दुनिया को संदेश दिया कि अगर होर्मुज बंद भी रहा तो अमेरिका के पास भरपूर तेल है.

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बातचीत शुरू हो गई है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंचे चार घंटे से ज्यादा हो गए लेकिन अभी तक उनकी ईरान के किसी नेता से सीधी मुलाकात नहीं हुई है. यानी दोनों देशों के नेता एक ही शहर में हैं लेकिन एक-दूसरे से बात नहीं कर रहे.

होर्मुज को लेकर ट्रंप का सख्त संदेश, ईरान पर बढ़ा दबाव!

पाकिस्तान बीच में काम कर रहा है. पाकिस्तान के अधिकारी अलग-अलग अमेरिकी और ईरानी टीमों से मिल रहे हैं और दोनों के बीच संदेश पहुंचा रहे हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जेडी वेंस से मुलाकात भी हो चुकी है. अब एक सुझाव यह आया है कि तीनों देश यानी अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान एक साथ बैठकर बात करें. लेकिन इसके लिए भी ईरान ने शर्तें लगाई हैं.

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ईरान की शर्तें क्या हैं?

ईरान ने कहा है कि वो तभी बातचीत में बैठेगा जब कुछ शर्तें पहले पूरी हों. पहली शर्त है कि इजरायल लेबनान पर हमले बंद करे और वहां भी सीजफायर हो. खास बात यह है कि ईरान की टीम हिजबुल्लाह यानी लेबनान के उस संगठन से भी बात कर रही है जिसे ईरान का समर्थन मिलता है. दूसरी शर्त है कि कतर और दूसरे देशों के बैंकों में ईरान का जो पैसा जमा है और अमेरिका ने जिसे रोक रखा है, वो पैसा पहले छोड़ा जाए. यह मांग प्रधानमंत्री शरीफ के जरिए अमेरिका को भेजी गई है. इसके अलावा होर्मुज की खाड़ी, जंग का हर्जाना और पूरे मध्य पूर्व में सीजफायर भी ईरान की मांगों में शामिल हैं.

अमेरिका का क्या रुख है?

व्हाइट हाउस ने साफ कह दिया है कि ट्रंप की शर्तें नहीं बदलेंगी. अमेरिका ईरान का जमा पैसा छोड़ने को तैयार नहीं है जो ईरान की सबसे बड़ी मांगों में से एक है। यानी दोनों की शर्तें एक-दूसरे से बिल्कुल उलट हैं.

राष्ट्रपति ने क्या कहा?

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राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे मामले पर कई बातें कहीं. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि आज की बातचीत कैसे जाएगी. जब उनसे पूछा गया कि क्या वो उम्मीद रखते हैं तो उन्होंने कहा ‘देखते हैं, अगर नहीं हुआ तो हम रीसेट करने के लिए तैयार हैं.’ यानी हमले फिर शुरू करने का विकल्प खुला है.

ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज की खाड़ी जल्द खुलेगी. उन्होंने ईरान को ‘डूबता हुआ देश’ कहा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब दूसरे रास्ते भी देख रही है यानी होर्मुज के बिना भी तेल आ सकता है.

तेल वाला ट्रंप का संदेश क्या था?

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि दुनिया के कई बड़े-बड़े खाली तेल के जहाज अभी अमेरिका की तरफ आ रहे हैं. वो अमेरिका से तेल भरकर ले जाएंगे. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की दो सबसे बड़ी तेल अर्थव्यवस्थाओं से भी ज्यादा तेल है और वो बेहतर क्वालिटी का है. यह संदेश असल में दुनिया को यह बताने के लिए था कि अगर ईरान होर्मुज बंद भी रखे तो अमेरिका के पास तेल देने का विकल्प है.

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इस्लामाबाद में वार्ता का इंतजार, उधर लेबनान पर इजरायल कर रहा वार पर वार… हिज्बुल्लाह ने भी खोला फायर

Iran Israel war: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान को लेकर शांति वार्ता के शुरू होने का इंतजार है, इधर इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है. दक्षिणी लेबनान के अल शहाबिया में इजरायली हमले के बाद व्यापक नकुसान की तस्वीरें सामने आई हैं, कई घर ढह गए हैं, सड़कों पर मलबा दिख रहा है. और पूरा इलाका सुनसान दिख रहा है. 

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Iran Israel war: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान को लेकर शांति वार्ता के शुरू होने का इंतजार है, इधर इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है. दक्षिणी लेबनान के अल शहाबिया में इजरायली हमले के बाद व्यापक नकुसान की तस्वीरें सामने आई हैं, कई घर ढह गए हैं, सड़कों पर मलबा दिख रहा है. और पूरा इलाका सुनसान दिख रहा है.

पिछले 48 घंटों में इजरायल ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा ठिकानों पर 160 से अधिक मिसाइलें दागी गईं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सिविल डिफेंस के अनुसार इन हमलों में कम से कम 250 से 300 लोग मारे गए और 1000 लोग जख्मी हुए हैं.

इजरायल का हमला मुख्य रूप से बेरूत, सेंट्रल और तटीय इलाके, कॉर्निश के पास हुए. इसके अलावा दक्षिणी लेबनान के टायर, सिडोन, नबातिएह और पूर्वी बेका घाटी में हुए.

इजरायल का दावा है कि हिजबुल्लाह के 100 कमांड सेंटर्स और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन कई नागरिक इलाकों और आवासीय भवनों में भी हमले हुए.

आज इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव तब बढ़ गया, जब लेबनान ने इज़रायल पर देश के दक्षिणी कस्बों पर हवाई हमले करके संघर्ष-विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में हिज़्बुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई की.

एक बयान में ईरान-समर्थित लेबनानी उग्रवादी समूह ने कहा कि उसने सुबह लगभग 8 बजे इजरायली बस्ती मिसगाव अम को निशाना बनाते हुए एक रॉकेट हमला किया. हिज़्बुल्लाह ने कुल मिलाकर 6 रॉकेट लेबनान पर दागे हैं.

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हिज्बुल्लाह ने इस हमले को “लेबनान और उसके लोगों की रक्षा में” किया गया बताया.

हिज्बुल्लाह  ने आगे दावा किया कि यह उसी टारगेट पर उसका दूसरा हमला था, और चेतावनी दी कि जब तक लेबनान के खिलाफ इज़रायल की कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक वह भी अपनी कार्रवाई जारी रखेगा.

इन दावों पर इज़रायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई. इस बीच लेबनान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि किसी भी आगे की बातचीत के लिए युद्धविराम एक पूर्व शर्त बनी हुई है, जो बढ़ते तनाव के बीच बेरूत के कड़े रुख का संकेत है.

रॉयटर्स से बात करते हुए अधिकारी ने आगे कहा कि लेबनान अगले सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली एक बैठक में हिस्सा लेने का इरादा रखता है, जहां चर्चा का मुख्य केंद्र युद्धविराम को अंतिम रूप देना और उसकी औपचारिक घोषणा करना होने की उम्मीद है.

तनाव में यह ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से होने वाली अहम बातचीत से पहले बयानबाजियों का दौर चल रहा है.

ठीक एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेबनान पर हमलों को कम करने का आग्रह किया था. इसके बाद इजरायल के हमले कुछ घंटे तक तो कम हुए लेकिन शुक्रवार को इन हमलों में तेज इजाफा हुआ.

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हालांकि इजरायल के पीएम अभी भी यह कह रहे हैं कि हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने पर ही लेबनान के साथ व्यापक शांति समझौते की दिशा में काम  हो पाएगा.

एक बड़ी अड़चन अभी भी यह बनी हुई है कि क्या लेबनान इस संघर्ष-विराम के दायरे में आता है. जहां एक ओर ट्रंप और नेतन्याहू का मानना है कि यह इसके दायरे में नहीं आता, वहीं दूसरी ओर ईरान का जोर देकर कहना है कि यह इसके दायरे में आता है.

इजरायल लेबनान की पुरानी अदावत

1948 में इज़राइल की स्थापना के बाद से ही इजरायल और लेबनान तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं.  लेबनान के साथ बातचीत की इजरायल की घोषणा ऐसे समय में आई है, जब इस बात पर असहमति बनी हुई है कि क्या युद्धविराम समझौते में इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई में विराम शामिल था या नहीं.

एक व्यक्ति के अनुसार वाशिंगटन में होने वाली इन वार्ताओं में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल इस्सा करेंगे, जबकि इज़रायली पक्ष का नेतृत्व अमेरिका में इज़रायली राजदूत येचिएल लाइटर करेंगे.

शुक्रवार सुबह तक लेबनान सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी और यह भी तत्काल स्पष्ट नहीं था कि लेबनान का प्रतिनिधित्व कौन करेगा.

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Middle East War Update: ‘गोलीबारी शुरू होगी..’, सीजफायर के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फिर कही बड़ी बात, ईरान को दे दी ये चेतावनी

Middle East War Update:ईरान के साथ सीजफायर के बाद अमेरिका की ओर से एक बार फिर सख्त रुख देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भले ही फिलहाल संघर्ष विराम लागू है,

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Middle East War Update:ईरान के साथ सीजफायर के बाद अमेरिका की ओर से एक बार फिर सख्त रुख देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भले ही फिलहाल संघर्ष विराम लागू है, लेकिन अमेरिका पूरी तरह सतर्क है। ट्रंप ने कहा कि सभी अमेरिकी जहाज और विमान ईरान और उसके आसपास के इलाकों में तैनात रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सैन्यकर्मी अतिरिक्त गोला-बारूद और अत्याधुनिक हथियारों के साथ अलर्ट मोड में रखे गए हैं, ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत जवाब दिया जा सके।

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ट्रंप ने अपने बयान में यह भी साफ कर दिया कि यह सीजफायर स्थायी शांति की गारंटी नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वास्तविक समझौते का पूरी तरह पालन नहीं हुआ, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। उनके शब्दों में, यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो “ऐसी गोलीबारी शुरू होगी, जो पहले कभी नहीं देखी गई।”

इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति दबाव बनाए रखने और ईरान को समझौते के पालन के लिए मजबूर करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन इससे क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

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बता दें कि, मिडिल ईस्ट में पिछले एक महीने से जारी तनाव और संघर्ष के बीच बीते दिन राहत की खबर सामने आई। जहां अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई है, जिससे क्षेत्र में फिलहाल तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस सीजफायर का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने किया, जिसके बाद दोनों देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि भी सामने आई। इस फैसले के साथ ही करीब दो हफ्तों के लिए युद्ध पर विराम लग गया है।

 

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Iran Israel war: ईरान के खार्ग पर ताबड़तोड़ हमले, ट्रंप की डेडलाइन पूरी होने से पहले ही US-इजरायल का अटैक

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खार्ग द्वीप पर हमले के बाद चेतावनी देते हुए कहा कि अब संयम खत्म हो चुका है. आईआरजीसी ने चेताते हुए कहा कि अगर हमले ऐसे ही जारी रहे तो अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया जा सकता है. 

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Iran Israel war: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. वह ईरान को लगातार अल्टीमेटम दे रहे हैं. उनके नए अल्टीमेटम की मियाद खत्म होती नजर आ रही है. इस बीच खबर है कि ईरान के खार्ग द्वीप पर ताबड़तोड़ हमले हुए हैं.

मेहर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के ऑयल हब खार्ग द्वीप पर मंगलवार को ताबड़तोड़ हवाई हमले हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, खार्ग पर एक के बाद एक हमले किए जा रहे हैं.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खार्ग द्वीप पर हमले के बाद चेतावनी देते हुए कहा कि अब संयम खत्म हो चुका है. आईआरजीसी ने चेताते हुए कहा कि अगर हमले ऐसे ही जारी रहे तो अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया जा सकता है. इससे वर्षों तक इस क्षेत्र में तेल और गैस संकट बाधित हो सकता है.

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होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप की डेडलाइन नजदीक, वेस्ट एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज

बता दें कि यह हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब एक दिन पहले ही ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन के रेस्क्यू ऑपरेशन की डिटेल जानकारी दी थी. ईरान जंग को छह हफ्ते का समय हो गया है.

इससे पहले पिछले महीने भी अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर हमला कर ईरान के सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था. इन हमलों में ईरान के नौसेना माइन स्टोरेज और मिसाइल बंकर नष्ट कर दिए गए जबकि तेल प्रतिष्ठानों का बाल भी बांका नहीं किया.

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इस द्वीप को इसके आइसोलेशन की वजह से फॉरबिडन आइलैंड भी कहा जाता है. ट्रंप ने पहले भी खार्ग द्वीप पर हमले की धमकी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर होर्मुज में जहाजों पर हमले नहीं रुके तो खार्ग में तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा.

बता दें कि खार्ग द्वीप ईरान का मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल है. यहां से ईरान के 90 फीसदी तेल का एक्सपोर्ट होता है. इसकी स्टोरेज क्षमता लगभग तीन करोड़ बैरल है.

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