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छत्तीसगढ़

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों ने तय की IIT-NIT की मंजिल- सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मंजिलें उनकों मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उडान होती है। कुछ ऐसा ही हौसला इन नक्सल प्रभावित जिले के बच्चों में था कि आज वे सफलता के शिखर पर पहुचने के साथ अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ रहे हैं। कभी ठीक से हाई स्कूल तक की पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाने वाले नक्सल प्रभावित जिले के बच्चों को जब उनके क्षेत्र में छत्तीसगढ़ सरकार के माध्यम से स्वर्गीय राजीव गांधी प्रयास आवासीय विद्यालय जैसी उच्च गुणवत्ता वाली संस्थाओं की सुविधाएं मिली तो वे इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित कई कठिन परीक्षाएं पास कर देश के आईआईटी सहित नामी शिक्षण संस्थानों में अपनी जगह बनाने लगे हैं। गरीबी और अभावों के बीच वनांचल क्षेत्र में पले-बढ़े इन आदिवासी बच्चों की सफलताओं से जहां अन्य विद्यार्थियों को प्रेरणा मिल रही है, वहीं इनकी सफलता से देश में छत्तीसगढ़ का गौरव भी बढ़ रहा है।

प्रयास विद्यालय में पढ़कर सफलता के शिखर पर पहुचने वाले विद्यार्थियों से जब प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल रूबरू हुए तो उनके अनुभव सुन काफी रोमांचित हुए। बघेल ने शहीद वीरनारायण सिंह के शहादत दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में स्वर्गीय राजीव गांधी स्मृति प्रयास आवासीय विद्यालयों के मेघावी विद्यार्थियों का सम्मान करते हुए लैपटॉप के लिए 50-50 हजार रूपए की अनुग्रह राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री और अतिथियों के समक्ष सम्मान समारोह में प्रतिभावान विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए।

देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक आईआईटी बीएचयू में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग शाखा में अध्ययनरत् तरूण कुमार पैकरा ने बताया कि वे कृषक परिवार से तालुक रखते है। सरगुजा जिले के गांव बमलाया में उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। कक्षा 9वीं से उन्होंने प्रयास विद्यालय में अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि कक्षा 9वीं और 10वीं में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा क्वॉलिफाई किया। इससे न केवल मेरे बेसिक्स स्ट्रॉन्ग हुए, बल्कि आत्मविश्विास भी बढ़ा। तरूण ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही इंजीनियरिंग क्षेत्र में करियर बनाने का सपना संजोकर रखा था, इसलिए गणित विषय लेकर आईआईटी-जेईई की तैयार शुरू की। शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन और सहपाठियों के साथ प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण से जेईई एडवांस परीक्षा में सफलता मिली। आईआईटी पटना में अध्ययनरत राजनांदगांव जिले की जागृति कंवर ने अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रयास विद्यालय में आईं तो मन में परिवार से दूर कैसे रहूंगी यही ख्याल था, पर प्रयास में एक नया और बहुत बड़ा परिवार मिला। जल्द ही यह महसूस हुआ कि पढ़ाई के लिए इससे अच्छा वातावरण हो ही नहीं सकता। यहां आकर अपना पूरा ध्यान आईटीआई में प्रवेश के लिए लगा दिया। शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम से उन्हें यह सफलता मिली। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम खपरी सिरदार में हुई है।

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सम्मानित होने वाले अन्य विद्यार्थियां में आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति वर्ग की छात्रा कुमारी लिशा नेताम ने बताया कि उनके माता-पिता दोनों शिक्षक हैं, इसलिए घर में शुरू से ही पढ़ाई का माहौल रहा है। कोण्डागांव में पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही थी, जिसके कारण उन्होंने रायपुर में पढ़ने के लिए प्रयास प्रवेश परीक्षा की तैयारी की और उनका चयन प्रयास कन्या आवासीय विद्यालय गुढ़ियारी के लिए हुआ। प्रयास विद्यालय में पढ़ाई के लिए बहुत अच्छा वातावरण है। यहां के शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें यह सफलता मिली है। आईआईटी भिलाई में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग शाखा में अध्ययनरत धमतरी जिले के धनंजय धु्रव ने प्रयास विद्यालय की प्रशंसा करते हुए बताया कि इस संस्था में अखिल भारतीय इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं के लिए बेहतर ढंग से तैयारी करायी जाती है। उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन ने भी इस संस्था में पढ़ाई की है। धनंजय ने यह भी बताया प्रयास विद्यालय में शिक्षकों सतत मार्ग से और सहपाठियों के बीच स्वस्थ स्पर्धा के माहौल ने उनकी सफलता में बड़ी योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि ग्राम डाही में उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई घर परिवार का माहौल खेती किसानी से जुड़ा ह

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आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में मेथेमेटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग शाखा में अध्ययनरत राजनांदगांव जिले के लुभास कुमार ने बताया कि शुरू से ही उनकी रूचि गणित और इंजीनियरिंग के पढ़ाई के प्रति थी। कक्षा 8वीं तक की पढ़ाई तहसील छुरिया के गांव पदगुड़ा में ही हुई। विज्ञान विषय में विशेष रूचि होने के कारण उनका चयन प्रयास विद्यालय में हुआ। उन्होंने बताया कि प्रयास विद्यालय में चयन होने से काफी उत्साहित हुआ क्योंकि गांव में हाईस्कूल नहीं था और उन्हें इंजीनियरिंग की पढ़ाई करनी थी। प्रयास विद्यालय में चयन होना उनकी जिंदगी का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट साबित हुआ। प्रयास विद्यालय के शिक्षकों और सहपाठियों से मिले सहयोग से उनका चयन आई आई टी में हुआ। दुरस्थ अंचलों में रहने वाले प्रतिभावान छात्रों के लिए उनके सपनों को साकार करने में प्रयास विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रयास विद्यालयों के बेहतर संचालन और प्रतिभावान छात्रों को दी जा रही सुविधाओं के लिए छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

कांकेर जिले के अंतागढ़ की छात्रा कुमारी देविका उइके ने बताया कि उन्हें 12वीं बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए और शिक्षकों के मार्गदर्शन से वह एनआईटी रायपुर में अध्ययनरत है। इसी तरह बालोद जिले के विकासखण्ड डौंडी के ग्राम पथराटोला निवासी मनीष कुमार रावटे ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 94.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। वर्तमान में वे आईआईटी बीएचयू में अध्ययनरत हैं। सरगुजा जिले के विकासखण्ड लखनपुर के ग्राम पोडी निवासी आदित्य यादव ने 12वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और वे वर्तमान में आईआईटी बीएचयू में अध्ययन कर रहे हैं। सरगुजा जिले के ही विकासखण्ड लखनपुर के ग्राम काटकोना निवासी प्रवीण कुमार चन्द्रवंशी ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 91.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। वर्तमान में वे आईआईटी बीएचयू में अध्ययन कर रहे हैं। बालोद जिले के विकासखण्ड गुण्डरदेही के ग्राम माहुद निवासी रूद्रप्रताप देवांगन ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 88.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और वे वर्तमान में आईआईटी आईएसएम धनबाद में अध्ययनरत हैं।

छत्तीसगढ़

केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

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बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.

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इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.

जा सकती थी नवजात शिशु की जान

डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,

सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.

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परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.

पहली बार आया अनोखा केस

सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.

 

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छत्तीसगढ़

साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।

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महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार

इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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कैरियर

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

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Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

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बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।

लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार

इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट

पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।

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