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बिजनेस: ऑनलाइन खरीददारी से ऑफलाइन कारोबार चौपट
रायपुर. नवरात्रि में ऑनलाइन कारोबार करने वाली कई बड़ी ई-कामर्स कंपनियों की ऑफर सेल के कारण ऑफलाइन कारोबार करने वाले इलेक्ट्राॅनिक्स, मोबाइल, कपड़ा सहित कई सेक्टरों का करोड़ों का काराेबार प्रभावित हुआ है। इनका 50 फीसदी से ज्यादा कारोबार प्रभावित हो गया है। अब दीपावली से 15 दिन पहले भी जिस तरह से ऑफर ही ऑफर आए हैं, उससे छोटे कारोबारी परेशानी में हैं। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ काॅमर्स के साथ कैट लगातार केंद्र सरकार से ई-कामर्स पाॅलिसी बनाने की मांग कर रहा है। अगर पाॅलिसी नहीं बनी तो छोटे कारोबारियों का पूरा कारोबार ही बंद हो जाएगा।
ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों ने लंबे समय से ऑफलाइन कारोबार करने वालों को परेशानी में डाल रखा है। खासकर जब भी किसी त्योहार का मौका आता है, ई-कामर्स कंपनियों में जिस तरह से ऑफर आते हैं, उसके कारण ऑफलाइन कारोबार करने वालाें का धंधा ही चौपट हो जाता है। आज स्थिति यह है कि शहर ही नहीं, बल्कि गांवों के लोग भी कई सामान ऑनलाइन मंगा रहे हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि ऑनलाइन सामान बहुत सस्ता मिल जाता है।
ऑनलाइन में भारी छूट
ऑनलाइन में भारी खरीदारी के पीछे का कारण यह है कि इसमें भारी छूट मिलने के कारण लोग इसकी तरफ आकर्षिंत होते हैं। अगर मोबाइल की बात करें तो इनमें 2 से 10 हजार तक के ऑफर मिल रहे हैं। इसी के साथ नामी कंपनियों के एलईडी टीवी में 5 से 15 हजार तक के ऑफर हैं। जो 50 इंच की एलईडी टीवी ऑफलाइन में 50 हजार में मिल रही है, वही ऑनलाइन में 40 हजार में मिल रही है। इसी तरह से हर सामान में भारी डिस्काउंट के कारण लोग ऑनलाइन खरीदारी ही पसंद कर रहे हैं।
इलेक्ट्राॅनिक्स को डेढ़ सौ करोड़ का फटका
नवरात्रि में इस बार करीब दस दिन पहले ही बड़ी ई-काॅमर्स कंपनियों ने ऑफर देने प्रारंभ कर दिए। इसका नतीजा यह हुआ है कि ऑफलाइन मोबाइल और इलेक्ट्राॅनिक्स का कारोबार करने वालों को डेढ़ सौ करोड़ का फटका लग गया है। रवि भवन व्यापारी संघ के अध्यक्ष जय नानवानी का कहना है कि पिछले साल नवरात्रि में मोबाइल का ही 60 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कोरोना के बाद हुआ था। इस बार 70 से 80 करोड़ के कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन मुश्किल से 30 करोड़ का कारोबार हो सका है। इसी तरह से इलेक्ट्राॅनिक्स में जिसमें एलईडी टीवी, लैपटॉप, ओवन, वाॅशिंग मशीन, होम थियेटर सहित अन्य इनेक्ट्राॅनिक्स सामान हैं, उनका भी सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। इसके अलावा कपड़ों से लेकर कास्मेटिक और अन्य कई तरह के सामानों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
पाॅलिसी जरूरी
ई-कामर्स के लिए पॉलिसी न होने के कारण इनके ऑफर्स के कारण छोटे कारोबारियों का बहुत नुकसान हो रहा है। हम लोग केंद्र सरकार से लगातार पाॅलिसी बनाने की मांग कर रहे हैं। पॉलिसी नहीं बनीं तो ऑफलाइन कारोबार आने वाले समय में पूरी तरह से चौपट हो जाएगा।
– अमर पारवानी, अध्यक्ष, छग चैंबर ऑफ काॅमर्स
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हरेली तिहार : माटी पूजन, कृषि औजारों की पूजा और गेड़ी की परंपरा का पर्व

छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं।
कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं के साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।
सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।
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राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आज राजधानी रायपुर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली. ‘मोर तिरंगा, मोर अभिमान-हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत आयोजित इस तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत प्रदेश के कई मंत्री, विधायक के साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए.
रायपुर के इंडोर स्टेडियम से भव्य तिरंगा यात्रा की कार्यक्रम का आगाज हुआ. देशभक्ति के रंग से सराबोर इस आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत तमाम कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे, डिप्टी सीएम अरुण साव, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक राजेश मूणत और विधायक सुनील सोनी समेत बीजेपी के अनेक नेता-कार्यकर्ता के साथ स्काउट एंड गाइड्स, NCC कैडेट्स, स्कूली छात्र-छात्राएं समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए.
इंडोर स्टेडियम में बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे. इस दौरान मौजूद युवाओं और स्कूली बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. तिरंगा यात्रा इंडोर स्टेडियम से निकलकर गणेश मंदिर तिराहा, बूढ़ापारा बिजली ऑफिस, नगर निगम भवन, महिला थाना चौक और फायर ब्रिगेड चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंची.
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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘जेन Z हमारे बच्चे’, गुमराह किए गए

धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद पर शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जेन जी को गुमराह करने की कोशिशें की गईं. लेकिन पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा. उन्होंने कहा कि खुद पीएम से अपने इस्तीफे की पेशकश की थी.
कॉकरोच पार्टी प्रोटेस्ट के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि जेन जी हमारे ही बच्चे हैं. कुछ लोगों के द्वारा वे लोग गुमराह हो रहे है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे को लेकर हुए भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के करीब दो हफ्ते बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. प्रधान ने शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर बात की.
आपको याद दिल दे कि NEET पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच उन्होंने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था.
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