छत्तीसगढ़
मैनपाट महोत्सव: अपने आवाज़ का जादू बिखरेंगे मेलोडी किंग सिंगर नितिन दुबे

रायपुर । सुप्रसिद्ध गायक संगीतकार और अभिनेता नितिन दुबे छत्तीसगढ़ के सबसे बेस्ट लाइव परफ़ॉर्मर में से एक हैं,उनकी प्रसिद्धि का आलम ये है कि उनके लाइव प्रस्तुति को देखने के लिए हजारों लाखों की संख्या में दर्शक और श्रोता आते हैं,इसलिए नितिन दुबे को हर बड़े महोत्सव में प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।ऐसे ही छत्तीसगढ़ में भी आगामी 2 बड़े महोत्सव “लोक मड़ई डोंगरगांव” और ‘मैनपाट महोस्तव” में नितिन दुबे को आमंत्रित किया गया हैं, जहां पर वो अपने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति देंगे। आगामी 11 फरवरी को “लोक मड़ई डोंगरगांव” जिला राजनांदगांव में और 14 फरवरी को “मैनपाट महोत्सव” जिला सरगुजा में नितिन दुबे अपनी आवाज़ का जादू बिखेरेंगे।
नितिन दुबे ने छत्तीसगढ़ी संगीत को राष्ट्रीय पर ख्याति दिलाई
नितिन दुबे आज संगीत की दुनिया मे वह नाम हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई है और उनके गीत यूट्यूब के माध्यम से देश विदेश में देखे और सुने जाते हैं।हाल ही में यूट्यूब द्वारा जारी नितिन दुबे ऑफीशियल यूट्यूब चैनल के जियोग्राफिकल एनालिटिक्स में 18 से ज़्यादा देशों का नाम सामने आया जहां नितिन के छत्तीसगढ़ी गीतों और भजनों को देखा और सुना जाता है, नितिन ने छत्तीसगढ़ी गीतों और भजनों को ग्लोबल लेबल पर पहुंचाने का काम किया है और छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी गीतों को आज के युवा वर्ग के बीच प्रचलित किया है। इतना ही नहीं नितिन दुबे छत्तीसगढ़ के उन चुनिंदा गायकों में से एक हैं जिन्होंने भजन के क्षेत्र में भी खूब नाम कमाया और छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अलग अलग राज्यों ओड़िसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में अपने भजनों और लोकगीतों की प्रस्तुतियां देते आ रहे हैं।
बेस्ट लाइव परफ़ॉर्मर के रूप में जाने जाते हैं सिंगर नितिन दुबे
आज बहुत कम ऐसे सिंगर हैं जो स्टूडियो के साथ साथ लाइव में भी एक जैसा गाते हैं, ऐसे ही सुरीले गायक और परफ़ॉर्मर हैं नितिन दुबे, जिनकी रिकॉर्डिंग और लाइव दोनों में गायकी एक जैसी होती है और अपने एनरजेटिक परफॉर्मेंस से वो दर्शकों के दिल मे जगह बना लेते हैं। स्टेज पे नितिन गायकी के साथ साथ अपने हाई एनर्जी परफॉर्मेंस के लिए भी काफी मशहूर हैं और स्टेज पर इतना मूवमेंट करने के बाद भी नितिन एकदम सुर में गाते हैं जो कि एक विलक्षण प्रतिभा है। उनके फैन्स उन्हें कभी छत्तीसगढ़ का किशोर कुमार तो कभी सोनू निगम कहते हैं लेकिन नितिन की अपनी एक अलग पहचान है और नितिन कहते हैं कि उन्होंने किशोर कुमार जी को अपना आदर्श माना है और गुरु हमेशा गुरु होता है उनसे हमेशा सीखा जाता है।नितिन कहते हैं कि उनकी प्रतियोगिता हमेशा खुद से होती है और मंच पर दर्शकों का मनोरंजन करना उनका परम कर्तव्य है जिसे वो बहुत मेहनत से पूरा करते हैं।
महज 7 साल की उम्र से मंच पर गा रहे हैं नितिन
महज 7 साल की उम्र से मंच पर गा रहे हैं नितिन, 2000 से ज़्यादा मंचीय प्रस्तुतियां दे चुके हैं नितिन ने अपनी पहली प्रस्तुति एक बाल कलाकार के रूप में महज 7 साल की उम्र में पहली बार स्कूली मंच पर 1988 में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में दी थी, ये एक गायन प्रतियोगिता थी, और नितिन ने उसमें प्रथम स्थान प्राप्त किया था, अविभाजित मध्यप्रदेश में उन्होंने कई संगीत प्रतियोगिताओं में भाग लिया और एक बाल कलाकार के रूप में ख्याति प्राप्त की और आज पिछले तीन दशक से लगातार संगीत की सेवा कर रहे हैं और पिछले 35 वर्षों में लगभग 2000 से ज़्यादा मंचीय प्रस्तुतियां देश के अलग अलग राज्यों में दे चुके हैं नितिन दुबे और ये सफर जारी है।
संगीत की प्रतिभा मिली विरासत में,पूरा परिवार है प्रतिभाशाली
नितिन दुबे को संगीत विरासत में मिला है,बचपन मे नन्हे नितिन अपनी माता कालिन्दी दुबे के भजन गायन को सुनकर बहुत प्रेरित होते थे,और अपने पिता परमहंस दुबे जो कि एक अच्छे लोकगायक और भजन गायक हैं उनसे नितिन ने संगीत की बारीकियां सीखीं और आगे चलकर उन्होंने अपने गुरु स्वर्गीय गुलाब राम चौहान से क्लासिकल संगीत सीखना शुरू किया लेकिन गुरु के असामयिक मृत्यु के बाद नितिन ने खुद से संगीत साधना शुरू किया,शास्त्रीय संगीत की किताबों को पढ़ कर और बड़े बड़े उस्तादों के टेप कैसेट्स सुनना शुरू कर दिया और बॉलीवुड संगीत के महान गायक किशोर कुमार के गीतों का अभ्यास करने लगे। इस तरह नितिन को गायन की प्रतिभा विरासत में मिली और इसे वो आगे ले जाते हुए अपने बच्चों को भी संगीत की जानकारी दे रहे हैं, नितिन दुबे कि एक पुत्री सिद्धि दुबे और पुत्र सिद्धार्थ दुबे हैं।खासकर उनकी बिटिया सिद्धि दुबे को संगीत में बहुत रुचि है और वो कथक सीख रही हैं साथ ही साथ छत्तीसगढ़ी लोक गीत और भजन भी गाती हैं,पिछले साल सावन में उनका पहला छत्तीसगढ़ी शिवभजन “कांवर वाला” रिलिज़ हुआ था और नितिन कहते हैं कि आने वाले टाइम पे सिद्धि भी उनके साथ मंचीय प्रस्तुतियां देगी। नितिन दुबे अपनी सफलता में अपनी पत्नी संजू दुबे का हाथ मानते हैं जो उन्हें नए नए गीत बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
संगीत के क्षेत्र में कई रिकॉर्ड बना चुके हैं नितिन
युवा वर्ग में हैं सबसे ज़्यादा प्रचलित,यूट्यूब पर सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले छत्तीसगढ़ी गायक हैं नितिन नितिन दुबे ने “रायगढ़ वाला राजा” “हाय मोर चाँदनी” “चँदा रे” “का तैं रूप निखारे चंदैनी” “हाय रे मोर कोचईपान” “हाय रे मोर मुनगाकाड़ी” “हाय रे मोर नीलपरी” “दिल दे दे दुरुगवाली” जैसे सैकड़ों सुपरहिट गीत दे चुके हैं। बहुमुखी प्रतिभा के गायक संगीतकार अभिनेता नितिन दुबे यूट्यूब में छत्तीसगढ़ी गायकों में सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले गायक हैं उनके यूट्यूब चैनल “नितिन दुबे ऑफीशियल” पर टोटल 300 मिलियन व्यूवरशिप पूरा हो चुका है मतलब 30 करोड़ से ज़्यादा बार उनके गीतों को सिर्फ उनके यूट्यूब चैनल पर देखा गया है,और 7 लाख 60 हज़ार से ज़्यादा उनके चैनल पर सब्सक्राइबर हैं, नितिन अब तक छत्तीसगढ़ी गायकों में सबसे ज़्यादा सब्सक्राइबर वाले गायक हैं और संगीत के क्षेत्र में कई रिकॉर्ड बना चुके हैं, हाल ही में उन्हें कला के क्षेत्र में “केलो धरोहर सम्मान” और “छत्तीसगढ़ मेलोडी किंग” अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
छत्तीसगढ़
केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…
बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.
ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.
इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.
जा सकती थी नवजात शिशु की जान
डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,
सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.
परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.
पहली बार आया अनोखा केस
सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.
छत्तीसगढ़
साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार
इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कैरियर
कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा
Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।
शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।
बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।
लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार
इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट
पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।




















