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छत्तीसगढ़

मौसम: छत्तीसगढ़ में रात के समय 13 डिग्री तक हुआ पारा

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रायपुर: मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात रायपुर के लाभांडी केंद्र पर न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस मापा गया। यह सामान्य से काफी कम था। वहीं रायपुर के लालपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र पर पारा 16.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। यह सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस कम था। रायपुर के माना हवाई अड्‌डा केंद्र पर न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस रहा। यह भी सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस कम ही है।

मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा का कहना है कि अभी उत्तर-पूर्व से सूखी और ठंडी हवाएं आ रही हैं। ऐसे में वातावरण से नमी कम हुई है। इसकी वजह से ठंड बढ़ी है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कमी महसूस हो रही है। अगले एक-दो दिनों में हवा का रुख बदल रहा है। हवा अब पूर्व से आएगी, जिसमें बंगाल की खाड़ी से आई नमी होगी। इसकी वजह से स्थानीय बादल भी बनेंगे। ऐसे में 10 नवंबर से दक्षिण छत्तीसगढ़ में तापमान में वृद्धि होने संभावना है। वहीं उत्तर के क्षेत्रों में तापमान 11 नवंबर के बाद से बढ़ेगा। 11 नवंबर से प्रदेश के दक्षिणी भाग के कुछ जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की भी संभावना है।

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ऐसे हालात रायपुर में ही नहीं दूसरे जिलों में भी दिखे। राजनांदगांव में रात का न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 3 डिग्री तक कम है। दुर्ग में न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस मापा गया। यहां भी तापमान सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस कम ही रहा। यह तब है जब सबसे ठंड माने जाने वाले अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 12.4 ही रहा है। सबसे ठंडी रात पेण्ड्रा में दर्ज हुई। वहां न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम है।

बताया जा रहा है कि पिछले 10 सालों में 13 डिग्री सेल्सियस का तापमान कभी नहीं रहा। रायपुर में 2012, 2013 और 2014 के नवंबर में 13.3, 13.5 और 13.6 डिग्री सेल्सियस का न्यूनतम तापमान पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड है। ये ठंढी रातें भी 15 नवंबर के बाद की हैं। पिछले साल 9 नवंबर को उस महीने का सबसे कम न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। रायपुर के इतिहास में नवंबर की सबसे ठंढी रात 1883 में आई थी। उस साल 22 नवम्बर को न्यूनतम तापमान 8.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

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छत्तीसगढ़

‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ : सीएम साय ने कहा – गौ संरक्षण जनभागीदारी से ही बनेगा जनआंदोलन

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गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। ये बातें मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।

इस अवसर पर सीएम ने प्रदेशव्यापी ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।

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छत्तीसगढ़

“सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सुनेगी…”, सर्वदलीय बैठक खत्म होते ही किरण रिजिजू का पहला बयान, कल पेश होगा वंदे मातरम् बिल

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संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक ख़त्म हो गई है। इस बैठक के ख़त्म होते ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, अच्छे माहौल में यह बैठक हुई। सभी ने इस बैठक में अपनी बात रखी। संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक के बाद मिडिया को दिए अपने पहले बयान में कहा कि, सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सत्र के दौरान सुनेगी। इसके अलावा बागी सांसदों को बैठक में बुलाये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि, नियमों के मुताबिक़ ही उन्हें बुलाया गया है।

बता दें कि, रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में व्यवधान पैदा करने से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि इससे जनता के पैसे और समय की बर्बादी होती है।

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छत्तीसगढ़

सीएम साय ने अधिकारियों को किया अलर्ट, बारिश से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश…

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

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