छत्तीसगढ़
21 फरवरी तक सभी शहरों में शुरू होगी मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस गणतंत्र दिवस पर राज्य के सभी शहरों की स्लम बस्तियों में रहने वालों को एक बड़ी सौगात दी है। अब यहां के रहवासियों को इलाज के लिए अस्पताल जाने या खून की जांच और अन्य स्वास्थ्य परीक्षण के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। अब उनके इलाके में मोबाइल मेडिकल यूनिट चिकित्सक के सहित खड़ी रहेगी, जहां 42 प्रकार के टेस्ट की निःशुल्क सुविधा भी होगी और निःशुल्क दवाईयां भी मिलेंगी। इसके लिए ‘‘मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना’’ सभी 169 शहरों में शुरू करने की घोषणा की गई है। पूर्व में यह योजना राज्य के सभी 14 नगर पालिक निगम में 1 नवम्बर 2020 से सफलता पूर्वक संचालित हो रही थी। इस योजना के लाभ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी शहरों में इसे लागू करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय कोरोना महामारी के मद्देनजर और भी कारगर साबित होगा, क्योंकि चिकित्सक से मिलने लोगों को अब अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के शुरू होने से समाज के सभी वर्गों को इसका लाभ मिलेगा। हर गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति चाहता है कि जब वह बीमार पड़े तो उसे अपने इलाज के लिए भटकना न पड़े। छोटी-छोटी बीमारी के लिए अपने काम धंधे बंद कर डाक्टरों से अपॉइंटमेंट लेना और कतार में लग कर इलाज कराने से हर कोई बचना चाहता है। लोगों की जरूरतों को ध्यान रख छत्तीसगढ़ में शुरू की गई मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना अब इन्हीं उद्देश्यों और लक्ष्यों को पूरा कर रही है।
वर्तमान में राज्य के 14 नगरीय निकायों में 60 मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन संबंधित जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद वर्तमान में सेवारत 60 एमएमयू में अतिरिक्त 60 एमएमयू शामिल किए जाएंगे। इस तरह से प्रदेश के 169 शहरों में 120 एमएमयू के माध्यम से योजना का संचालन किया जाएगा। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद योजना के महत्व को देखते हुए इसे 21 फरवरी 2022 तक प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के प्रति नागरिकों के लगाव को देखें तो योजना के अंतर्गत अभी तक 20 हजार 928 कैंपों का आयोजन मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से किया जा चुका है। इन कैंपों में 14 लाख 64 हजार 195 मरीज अपना इलाज कराकर स्वस्थ हो चुके हैं। एमएमयू में इलाज के लिए एम.बी.बी.एस. डाक्टर की पदस्थापना होती है। एमएमयू की प्रयोगशाला में कुल 42 प्रकार के टेस्ट निःशुल्क होते हैं। अभी तक 2 लाख 75 हजार 388 मरीज मुफ्त प्रयोगशाला से लाभांवित हो चुके हैं। एमएमयू में कुल 285 प्रकार की दवाइयां मुफ्त वितरण के लिए मौजूद होती हैं। इससे अभी तक 12 लाख 19 हजार 523 मरीजों ने मुफ्त दवा वितरण का लाभ लिया है। मरीजों को दवाइयों का वितरण डॉक्टर की पर्ची के आधार पर फार्मासिस्ट द्वारा किया जाता है।
मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत एमएमयू में मरीजों की जांच की पूरी प्रक्रिया कंप्यूटराइज्ड की गई है। मरीजों का पंजीयन, डॉक्टर की पर्ची और फार्मासिस्ट द्वारा दवा वितरण का कार्य पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड है। प्रक्रिया में कहीं चूक ना हो और मरीजों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके इसके लिए सीनियर विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा इसका आडिट भी किया जाता है।
इस सेवा विस्तार से राज्य के 169 शहरों में 120 एमएमयू के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 2 हजार 880 कैंप आयोजित होंगे और लगभग 1 लाख 80 हजार मरीजों का गुणवत्तापूर्ण इलाज संभव हो सकेगा। सुविधा विस्तार के लिए शासन द्वारा सेवा प्रदाता चयन की कार्यवाही सभी जिलों में पूर्ण कर ली गयी है और बसों में एमएमयू के लिए अस्पताल की सुविधाएं विकसित करने हेतु निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। इसके साथ ही कैंप प्लानिंग, डाक्टर एवं स्टाफ की ड्यूटी रोस्टर, दवा वितरण आदि व्यवस्थाओं की तैयारियां सभी शहरों में प्रगति पर हैं।
छत्तीसगढ़
केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…
बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.
ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.
इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.
जा सकती थी नवजात शिशु की जान
डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,
सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.
परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.
पहली बार आया अनोखा केस
सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.
छत्तीसगढ़
साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार
इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कैरियर
कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा
Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।
शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।
बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।
लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार
इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट
पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।
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