देश
7 फीसदी आबादी-12% लोकसभा टिकट, फिर बीजेपी से क्यों नाराज हैं ठाकुर?

लोकसभा चुनाव के बीच क्षत्रिय समुदाय के लोगों का अचानक मोर्चा खोल देना भाजपा के लिए अच्छा संकेत नहीं है. खास तौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर लोकसभा सीट के तहत आने वाले ठाकुर बहुल गांवों में खासतौर से इस बात का ऐलान किया जा रहा है कि क्षत्रिय समाज उसे ही वोट करेगा जो भाजपा को हराएगा.
उत्तर प्रदेश में ठाकुरों की आबादी तकरीबन 7 प्रतिशत है, भाजपा अब तक 12 प्रतिशत को टिकट दे चुकी है. इसके बावजूद क्षत्रिय समाज के इस फैसले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या क्या क्षत्रिय समाज के वोटर भाजपा से नाराज हो गए हैं? दरअसल क्षत्रिय समाज के कई संगठनों ने यूपी से लेकर गुजरात तक यही माहौल बना रखा है. पश्चिमी यूपी में चार क्षत्रिय पंचायत करने का ऐलान हुआ है. दावा है कि बीजेपी को हराने वाले उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे.
सहारनपुर की पंचायत में लगाया ये आरोप
सहारनपुर में रविवार को क्षत्रिय समाज की पंचायत हुई, इसमें मंच पर लगे बैनर पर लिखा है कि क्षत्रिय स्वाभिमान महाकुंभ. रविवार को सहारनपुर के नानौत में ठाकुर समाज के हज़ारों लोग जुटे. मंच से बीजेपी को हराने की कसमें खाई गईं. इनका आरोप है कि बीजेपी राजनैतिक रूप से ठाकुर समाज को खत्म करना चाहती है. क्षत्रिय समाज के नेता पूरन सिंह का भी तकरीबन यही कहना है. क्षत्रिय समाज ने 11 अप्रैल को हापुड़ के धौलाना में 13 तारीख़ को मुज़फ़्फ़रनगर के सिसौली में और 16 को मेरठ के सरधना में पंचायत करने का मन बनाया है. ऐसी ही एक पंचायत नोएडा में भी होगी.
आखिर क्या हुआ जो विरोध में आया क्षत्रिय समाज?
आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि क्षत्रिय समाज बीजेपी के विरोध में सड़क पर है. दरअसल माना ये जा रहा है कि यूपी में क्षत्रिय समाज के नाराज होने की कहानी गाजियाबाद से शुरू हुई. जब मोदी सरकार में मंत्री जनरल वी के सिंह का टिकट कट गया. अब वहां से अतुल गर्ग चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि पीएम नरेन्द्र मोदी ने गाजियाबाद के रोड शो में अपनी गाड़ी में गर्ग के साथ जनरल सिंह को भी साथ रखा था. इसके अलावा इसका कनेक्शन गुजरात से भी जोड़ा जा रहा है.
दरअसल केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला राजकोट ये चुनाव लड़ रहे हैं. उनके एक बयान के खिलाफ क्षत्रिय संगठनों ने आंदोलन शुरू कर दिया. कुछ महिलाओं ने तो जौहर करने की घोषण कर दी. विवाद बढ़ा तो रूपाला ने माफी मांग ली. इसके बाद भी क्षत्रिय समाज के लोगों की तैयारी कल गांधीनगर में बीजेपी ऑफिस का घेराव करने की है.
यूपी में बीजेपी के 8 ठाकुर उम्मीदवार
यूपी में हंगामा मचा है. वैसे तो अब तक ठाकुर जाति के एक ही नेता वी के सिंह का टिकट कटा है. लेकिन क्षत्रिय संगठन ऐसा माहौल बना रहे हैं कि बीजेपी उनकी दुश्मन है. बीजेपी ने अब तक यूपी में 63 सीटों पर टिकट फाइनल किए हैं. इनमें आठ इसी जाति के हैं. इनमें मुरादाबाद से सर्वेश सिंह, लखनऊ से राजनाथ सिंह, अकबरपुर से देवेन्द्र सिंह भोले, हमीरपुर से पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल, फैजाबाद से लल्लू सिंह, गोंडा से कीर्ति वर्धन सिंह, डुमरियागंज से जगदंबिका पाल, जौनपुर से कृपा शंकर सिंह.
7 प्रतिशत ठाकुर जाति के वोटर
यूपी में क़रीब सात प्रतिशत ठाकुर जाति के वोटर हैं. एक दौर में बिरादरी के लोग पहले कांग्रेस, फिर समाजवादी पार्टी और बीएसपी के साथ रहे. लेकिन अब वे बीजेपी के कट्टर समर्थक माने जाते हैं. ये भी कहा जा रहा है कि क्षत्रिय पंचायतों को बीजेपी के कुछ नेता पीछे से समर्थन दे रहे हैं. करणी सेना भी साथ है. जबकि अखिलेश यादव तो योगी सरकार पर ठाकुर समाज को बढ़ावा देने के आरोप लगाते रहे हैं .
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।





















