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8 नवम्बर से शुरू हो सकता है रायपुर का बहुप्रतिच्छित अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल

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रायपुर: राजधानी के रावणभाठा में अंतर्राज्यीय नए बस टर्मिनल से अब 8 नवंबर से बसों का संचालन किया जा सकेगा। रायपुर सिटी बस सर्विस के एमडी एवं रॉयल बस सर्विस के संचालक सैयद अनवर अली का कहना है, 8 नवंबर के बाद पंडरी बस स्टैंड से नए बस टर्मिनल में बसों की शिफ्टिंग के लिए हम तैयार हैं। सारी सुविधाएं यहां हो चुकी हैं। कुछ बस संचालकों की आफिस को लेकर दिक्कत है, जिसे आने वाले दिनों में दूर करने के लिए आश्वस्त किया गया है। साथ ही निगम प्रशासन ने ऐसे बस ऑपरेटर, जिन्हें नए टर्मिनल में अभी आफिस के लिए दुकानें नहीं दी हैं, वे कुर्सी-टेबल लगाकर वहां काम कर सकते हैं। श्री अली ने ये भी कहा कि जिला प्रशासन द्वारा नए बस टर्मिनल को शुरू कराने के साथ ही पंडरी बस स्टैंड से बसों का परिचालन प्रतिबंधित कर देना चाहिए।

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पार्किंग से मिलेगा 3 करोड़ राजस्व

आईएसबीटी से बसों की पार्किंग के एवज में अधिकृत एजेंसी से नगर निगम को सालभर में 3 करोड़ की कमाई तय है। सूत्रों के मुताबिक इस राशि से नगर निगम को नए बस टर्मिनल के रखरखाव के खर्च से निपटने में आसानी होगी। पार्किंग चलाने वाली बड़ी एजेंसी के रूप में बस ऑपरेटर को मौका दिया गया है। एजेंसी दो किस्तों में नगर निगम को तय राशि का भुगतान करेगी। राज्य के बाहर एवं राज्य के भीतर चलने वाली बसों का पार्किंग शुल्क पहले ही तय कर दिया गया है। इसके अलावा मिनी बस का प्रथम बार प्रवेश पर 50 रुपए और दूसरे बार प्रवेश पर 30 रुपए का शुल्क तय है।

महापौर एजाज ढेबर का कहना है, पंडरी बस स्टैंड से बसों की शिफ्टिंग 8 नवंबर के बाद से शुरू हो जाएगी। इसके लिए आवश्यक तैयारियां की गई हैं। बस संचालक इसमें सहयोग देने तैयार हैं। इससे आने वाले दिनों में पंडरी क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिलेगी। वहीं राजधानीवासियों को सर्वसुविधा युक्त बस टर्मिनल की सहूलियत मिलनी शुरू हो जाएगी। श्री ढेबर ने बताया, परिवहन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। उनका कहना है कि 8 तारीख के बाद वे पंडरी बस स्टैंड से भाठागांव के नए बस टर्मिनल में बसों की शिफ्टिंग के लिए तैयार हैं। वहीं 4 मंजिला बस टर्मिनल परिसर में बसों की पार्किंग से नगर निगम को एक साल में 3 करोड़ रुपए तय है। इससे बस टर्मिनल के मेंटनेंस का झंझट नहीं रहेगा।

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हरेली तिहार : माटी पूजन, कृषि औजारों की पूजा और गेड़ी की परंपरा का पर्व

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छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं।

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कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं के साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।

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राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आज राजधानी रायपुर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली. ‘मोर तिरंगा, मोर अभिमान-हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत आयोजित इस तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत प्रदेश के कई मंत्री, विधायक के साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए.

रायपुर के इंडोर स्टेडियम से भव्य तिरंगा यात्रा की कार्यक्रम का आगाज हुआ. देशभक्ति के रंग से सराबोर इस आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत तमाम कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे, डिप्टी सीएम अरुण साव, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक राजेश मूणत और विधायक सुनील सोनी समेत बीजेपी के अनेक नेता-कार्यकर्ता के साथ स्काउट एंड गाइड्स, NCC कैडेट्स, स्कूली छात्र-छात्राएं समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए.

इंडोर स्टेडियम में बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे. इस दौरान मौजूद युवाओं और स्कूली बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. तिरंगा यात्रा इंडोर स्टेडियम से निकलकर गणेश मंदिर तिराहा, बूढ़ापारा बिजली ऑफिस, नगर निगम भवन, महिला थाना चौक और फायर ब्रिगेड चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंची.

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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘जेन Z हमारे बच्चे’, गुमराह किए गए

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धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद पर शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जेन जी को गुमराह करने की कोशिशें की गईं. लेकिन पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा. उन्होंने कहा कि खुद पीएम से अपने इस्तीफे की पेशकश की थी.

कॉकरोच पार्टी प्रोटेस्ट के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि जेन जी हमारे ही बच्चे हैं. कुछ लोगों के द्वारा वे लोग गुमराह हो रहे है.

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे को लेकर हुए भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के करीब दो हफ्ते बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. प्रधान ने शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर बात की.

आपको याद दिल दे कि NEET पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच उन्होंने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था.

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