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प्रथम हॉस्पिटल बिलासपुर में वार्षिक उत्सव कार्यक्रम का हुआ आयोजन
बिलासपुर। प्रथम हॉस्पिटल बिलासपुर द्वारा 7वीं बर्षगाँठ पर भव्य वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि स्वामी सेवाव्रता नंद जी (अध्यक्ष रामकृष्ण मिशन कोनी बिलासपुर ) व विशिष्ट अतिथि आदरणीय श्री नवीन सिंह जी (रेल्वे के वरिष्ठ अधिकारी), व शहर के सम्मानित व्यक्ति आदरणीय श्री काशीनाथ घोरे जी (राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ) एवं श्री एस. के. पाढ़ी जी तथा प्रथम हॉस्पिटल के संचालक डॉ रजनीश पाण्डेय जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा दीपप्रज्जवलित करके किया गया। तत्पश्चात अथितियों के स्वागत के उपरांत डॉ रजनीश पांडेय जी द्वारा प्रथम हॉस्पिटल के 7 वर्षों की यात्रा को साझा किया गया। इस क्रम में डॉ. रजनीश पण्डेय जी ने बताया कि, 7 वर्ष पूर्व सिर्फ 10 बिस्तरों के साथ प्रथम हॉस्पिटल की स्थापना किया गया था। जो आज 150 बिस्तरों के साथ उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है, यह केवल उनकी अ केले की मेहनत और तपस्या का फल नहीं बल्कि समस्त अनुभवी स्टाफ के मेहनत तथा निरंतर कुछ नया करने का जूनून का परिणाम है की आज हम 150 बिस्तर तक बिलासपुर के चंद चुनिन्दा NABH सर्टिफाइड हॉस्पिटलो की सूचि में लाकर खड़ा कर दिया है.

I प्रथम हॉस्पिटल का कभी भी पैसा कमाना उद्देश्य नही रहा है, यह संस्थान सदैव गरीब व वंचित वर्गों के लिए आगे रहा I उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी के बारे में बताते हुए कहा कि मानव तन से भले ही बीमार हो जाये, किन्तु मन से कभी भी हिम्मत नही हारनी चाहिए, लोगो की सेवा हेतु सतत परिश्रम करते रहना चाहिए। साथ ही डॉ रजनीश में अपने व्हिजन को स्पस्ट रूप से सबके सामने रखा जिसमे उन्होंने भविष्य में जल्द ही नर्सिंग कॉलेज तथा DNB की पाठ्यक्रम की सुरुवात जल्द ही करने की बात कही ।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में NABH सर्टिफिकेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कमर्चारियों को प्रमाण पत्र देकर उनका सम्मान किया गया । उसके पश्चात अतिथि उद्बोधन में स्वामी सेवाव्रता नंद जी बोले कि मानव को अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु दृढ़ निश्चयी होना व कठोर परिश्रमी होना चाहिए ।
अतिथि उद्बोधन के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रथम हॉस्पिटल के स्टॉफ नर्स व कर्मचारियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। इस क्रम में सरस्वती वंदना, नगाड़े संग ढोल बाजे, गुजराती फॉल्क नृत्य, आज नचले, होठों पे ऐसी बात… जैसे गानों पर नृत्यों की प्रस्तुति ने दर्शकों को खूब आनंदित किया।

इस कार्यक्रम में मुख्यरूप से आदरणीय रजनीश सिंह जी ( विधायक, बेलतरा ), नकुल जी, विश्वास जलताड़े जी, ब्रजेंद्र शुक्ला जी, प्रणव शर्मा जी, विक्रम सिंह परिहार जी, डॉ निलय तिवारी जी व शहर के अनेक प्रबुद्ध जन व प्रथम हॉस्पिटल व आराध्या हॉस्पिटल के सभी चिकित्सक ,कर्मचारी व बिलासपुर नगर के गणमान्य जनों की उपस्थिति रही ।। इसके पश्चात खेल-कूद के विजेता व उपविजेताओं को प्रमाण पत्र दिया गया ।
कार्यक्रम का समापन में प्रथम हॉस्पिटल के संचालक डॉ रजनीश पण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापन से किया ।।
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हरेली तिहार : माटी पूजन, कृषि औजारों की पूजा और गेड़ी की परंपरा का पर्व

छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं।
कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं के साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।
सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।
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राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आज राजधानी रायपुर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली. ‘मोर तिरंगा, मोर अभिमान-हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत आयोजित इस तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत प्रदेश के कई मंत्री, विधायक के साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए.
रायपुर के इंडोर स्टेडियम से भव्य तिरंगा यात्रा की कार्यक्रम का आगाज हुआ. देशभक्ति के रंग से सराबोर इस आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत तमाम कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे, डिप्टी सीएम अरुण साव, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक राजेश मूणत और विधायक सुनील सोनी समेत बीजेपी के अनेक नेता-कार्यकर्ता के साथ स्काउट एंड गाइड्स, NCC कैडेट्स, स्कूली छात्र-छात्राएं समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए.
इंडोर स्टेडियम में बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे. इस दौरान मौजूद युवाओं और स्कूली बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. तिरंगा यात्रा इंडोर स्टेडियम से निकलकर गणेश मंदिर तिराहा, बूढ़ापारा बिजली ऑफिस, नगर निगम भवन, महिला थाना चौक और फायर ब्रिगेड चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंची.
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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘जेन Z हमारे बच्चे’, गुमराह किए गए

धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद पर शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जेन जी को गुमराह करने की कोशिशें की गईं. लेकिन पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा. उन्होंने कहा कि खुद पीएम से अपने इस्तीफे की पेशकश की थी.
कॉकरोच पार्टी प्रोटेस्ट के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि जेन जी हमारे ही बच्चे हैं. कुछ लोगों के द्वारा वे लोग गुमराह हो रहे है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे को लेकर हुए भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के करीब दो हफ्ते बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. प्रधान ने शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर बात की.
आपको याद दिल दे कि NEET पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच उन्होंने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था.
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