छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग के अधिकारियों से की वर्चुअल बैठक, कहा- ‘ग्रामीण क्षेत्रों में मैदानी अमलों के माध्यम से लायें जागरूकता’

बिलासपुर| मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, एसडीओपी, थाना प्रभारियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कोरोना के रोकथाम एवं बचाव के उपायों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री बघेल ने कोविड टीकाकरण की प्रगति, मरीजों के ईलाज की व्यवस्थाओं, आईसोलेशन की व्यवस्था एवं कोविड संक्रमण टेस्ट आदि विषयों पर समीक्षा की। बैठक में लोक निर्माण एवं गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी शामिल हुए।
बिलासपुर जिले के अधिकारियों से भी मुख्यमंत्री ने चर्चा की। बिल्हा के एसडीएम अखिलेश साहू ने बताया कि बिल्हा में कुल 5 हजार 950 केस है। जिनमें से 1800 एक्टिव केस है एवं 1600 मरीज होेम आईसोलेशन में है। बिल्हा आईटीआई भवन में 42 बिस्तरों का प्राथमिक कोविड केयर संेटर तैयार किया गया हैं। जिसमें 20 आॅक्सीजन बेड है। वर्तमान में यहां 14 मरीजों का ईलाज चल रहा है। बिलासपुर तहसीलदार गवेल ने बिलासपुर अनुविभाग में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। सीएसपी निमेश बरैय्या ने बताया कि लाॅकडाउन की अवधि में पेट्रोलिंग लगातार करायी जा रही है। लाॅकडाउन का उल्लंघन न हो इसकी सतत निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत स्तर पर मितानिन, पटवारी, रोजगार सहायक एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से जागरूकता लायें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोरोना शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रांे में भी फैला है। गांव में अभी भी कोविड प्रोटोकाल, हैंडवाश, मास्क, सैनेटाईजर, वैक्सीन तथा आईसोलेशन आदि को लेकर जागरूकता की बहुत कमी है। ऐसे में आप सभी की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि अपने-अपने कार्यक्षेत्र की जनता खासकर महिलाओं को कोरोना के बारे में समझायें और ग्रामीणों को सर्तकता बरतने के लिए मैदानी अमलों के माध्यम से प्रेरित करें। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गांव में लोग कोविड के लक्षणों को जानते समझते नहीं है इसलिए उनका संक्रमण अंदर ही अंदर काफाी बढ़ जाता है और स्थिति काफी गंभीर होने के बाद वे दवाई लेने जाते है। जिससे इनका इलाज करने में बहुत मुश्किलें आती है। इसे ध्यान में रखते हुए मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों को कोविड के लक्षणों के बारे में समझाएं।
मुख्यमंत्री बघेल ने सोशल मीडिया में प्रसारित भ्रांतियों का भी खंडन करने के निर्देश दिए। मितानिन किट में दवाईयां की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।लोक निर्माण एवं गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने सुझाव दिया कि ग्राम पंचायतों में थर्मल स्केनर की व्यवस्था हों। इसके अतिरिक्त उन्होंने वाहन की व्यवस्था करने भी कहा। जिससे मरीज को आसानी से अस्पताल में भर्ती किया जा सके। राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोविड नियंत्रण के लिये किये गये उपायों की जानकारी दी और इसके लिये विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों की प्रशंसा करते हुए उन्हें अपने परिवार का भी ध्यान रखने कहा। बैठक में जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, एसडीओपी, थाना प्रभारी, बीएमओ सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।
news
CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है















