छत्तीसगढ़
विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए 4 हजार 144 करोड़ रूपए का तृतीय अनुपूरक बजट पारित

रायपुर| मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रस्तुत 4 हजार 143 करोड़ 60 लाख, 71 हजार 652 रूपए का तृतीय अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया। तृतीय अनुपूरक बजट में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई, आवास, भूजल संरक्षण, आजीविका, औद्योगिक प्रशिक्षण, कस्टम मिलिंग सहित विभिन्न मदों में अतिरिक्त राशि के प्रावधान रखे गए हैं। इस राशि को मिलाकर अब वित्तीय वर्ष 2022-23 के मुख्य बजट का आकार 1 लाख 15 हजार 385 करोड़ रूपए हो गया है। तृतीय अनुपूरक बजट में राजस्व व्यय हेतु 02 हजार 575 करोड़ रूपए और पूंजीगत व्यय हेतु 01 हजार 569 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022-23 के मुख्य बजट में 1 लाख 4 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया था। प्रथम अनुपूरक में 2 हजार 904 करोड़ रूपए, द्वितीय अनुपूरक में 4 हजार 338 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया था। तृतीय अनुपूरक की राशि 4 हजार 144 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में तृतीय अनुपूरक बजट में किए प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 24 लाख ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। इन लक्ष्य की पूर्ति हेतु निर्माणाधीन कार्यों के लिये 900 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
इसी प्रकार कृषक जीवन ज्योति योजना में राज्य में 05 हॉर्सपॉवर तक के कृषि पंपों के लिये निःशुल्क विद्युत प्रदाय की सुविधा दी जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मछली पालन हेतु भी कृषि के समान विद्युत दर की सुविधा देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मछली पालकों को भी कृषि पंपों के समान निःशुल्क विद्युत सुविधा का लाभ देने के लिये कृषक जीवन ज्योति योजना हेतु तृतीय अनुपूरक में 341 करोड़ की राशि का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान मिलिंग का कार्य समय सीमा में पूरा करने हेतु कस्टम मिलिंग की दरों में वृद्धि की गई है। उक्त राशि राज्य सहकारी विपणन संघ को प्रतिपूर्ति करने हेतु 700 करोड़ रूपए, इसी प्रकार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत निर्माणाधीन सड़कों के लिये 321 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के लिये 250 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिला चिकित्सालयों में दवाईयां तथा अन्य सामग्री की आपूर्ति के लिये 210 करोड़ रूपए और चंदूलाल चंद्राकर चिकित्सा महाविद्यालय, दुर्ग के अधिग्रहण के लिए 150 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि से महाविद्यालय के भवन एवं चिकित्सा उपकरणों की राशि की प्रतिपूर्ति की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तृतीय अनुपूरक बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिये 116 करोड़ का प्रावधान किया गया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान 42 लाख 10 हजार घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल हाफ योजना के तहत विद्युत देयकों पर 01 हजार 115 करोड़ रूपये की राहत प्रदाय किया जाना है। इसके लिए 19 करोड़ 14 लाख का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक एवं स्वचालित उद्योगों की मांग को देखते हुए प्रदेश में संचालित औद्योगिक प्रशिक्षण संथाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु टाटा टेक्नोलॉजी पुणे के साथ एम.ओ.यू. किया गया है। इसके तहत 36 शासकीय आई.टी.आई. को टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित किया जायेगा। प्रत्येक आई.टी.आई. में नये उपकरण एवं तकनीक की स्थापना पर 33 करोड़ के मान से लगभग 12 सौ करोड़ रूपए की कार्य योजना तैयार की गई है। इस योजना में राज्य बजट से सहायता हेतु 94 करोड़ का प्रावधान में किया गया है। योजना पूर्ण होने पर प्रति वर्ष राज्य के 09 हजार युवाओं को उच्च कोटि के प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैम्पा मद के तहत क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण, वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण तथा भू-जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न कार्य वन क्षेत्रों में कराये जा रहे हैं। इस मद में स्वीकृत कार्यों के लिये 200 करोड़ रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण के लिये 150 करोड़ रूपए तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के लिये 60 करोड़ 59 लाख का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी एवं मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों में शौचालय निर्माण के लिये 03 करोड़ 73 लाख रूपए और छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के विजेताओं को पुरस्कार वितरण के लिए 21 करोड़ 90 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरमजयगढ़ विकासखण्ड के ग्राम छाल में पोस्ट मैट्रिक जनजाति कन्या छात्रावास एवं पतराटोली, विकासखण्ड दुलदुला जिला-जशपुर में प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास की स्थापना के साथ ही नरहरपुर जिला-कांकेर में आदिवासी बालक क्रीडा परिसर की स्थापना की जायेगी। इसके अलावा राजनांदगांव में पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, गोलापल्ली जिला-सुकमा में प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास तथा सलियाटोली जिला-जशपुर में बालक एवं बालिका छात्रावास के भवन निर्माण हेतु प्रावधान किया गया है।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है


















