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2024 में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस, अपनों ने ही दिखाया ‘बाहर’ का रास्ता, वहज-‘पप्पू’?

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Congress will contest elections on least number of seats after independence
बिलासपुर:

लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है. बीजेपी तबड़तोड़ बैठकें करके सत्ता की हैट्रिक लगाने की जुगत में है तो कांग्रेस के सामने अपने सियासी वजूद को बचाए रखने चुनौती है. यही वजह है कि कांग्रेस ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर INDIA का गठन कर रखा है और सीट शेयरिंग को लेकर हर समझौता करने के लिए तैयार है. ऐसे में कांग्रेस को अपने सियासी इतिहास से सबसे कम सीटों पर 2024 के चुनाव में उतरना पड़ सकता है.INDIA गठबंधन में शामिल छत्रप अपने-अपने राज्य में कांग्रेस के लिए बहुत ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं दिख रहे है. यही वजह है कि कांग्रेस को बिहार से लेकर यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक ‘जहर का घूंट पीकर’ सीटों पर समझौते करने पड़ रहे हैं. देखना है कि कांग्रेस सारे समझौता करने के बाद 2024 में क्या हासिल कर पाती है?

आजादी के बाद पहली बार 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 499 में से 489 सीटों पर चुनाव लड़कर 364 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. साल 1957 में कांग्रेस ने 494 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 371 सीटें जीतीं. 1962 में कांग्रेस 494 और 1967 में 523 सीट पर चुनाव लड़ी. 1971 में कांग्रेस 518 सीटों में से 352 सीटें जीती. आपातकाल के बाद 1977 में कांग्रेस सभी 542 सीटें में से 154 सीटें ही जीत सकी. पांच साल के बाद 1980 में कांग्रेस 353 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी. साल 1984 में कांग्रेस 542 सीटों में से 404 सीटें जीतकर कांग्रेस को ने इतिहास रच दिया और पंजाब में कांग्रेस की जीत से यह आंकड़ा 413 सीटों पर पहुंच गया, जहां चुनाव कुछ महीने बाद हुए थे.

‘पप्पू’ के बाद गिर रहा ग्राफ

1989 के लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिरना शुरू हुआ तो फिर लगातार जारी रहा. 1991 लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी की दुखद हत्या के बाद कांग्रेस ने 244 सीटें जीतीं और छोटी पार्टियों के बाहरी समर्थन से पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में सरकार बनाई. इसके बाद 1996 के चुनाव में कांग्रेस 140 सीटों पर सिमट गई. 1998 में कांग्रेस का सियासी ग्राफ और भी कम हो गया, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने एनडीए की सरकार बनाई. 1998 में कांग्रेस 141 सीटें और बीजेपी को 182 सीटें मिली थीं.

साल 1999 चुनाव में कांग्रेस 114 सीट पर रुक गई. कांग्रेस 1999 के लोकसभा चुनाव में 453 सीटों पर अपने कैंडिडेट्स उतारे थे, जिनमें से 114 सीटें ही जीत सकी. इसके बाद 2004 चुनाव में कांग्रेस 417 सीटों पर लड़ी थी जिसमें से 145 जीतने में कामयाह रही थी. उसी तरह 2009 में कांग्रेस ने 440 सीटों पर चुनाव लड़ा और 206 सीटों पर जीत. 2014 से लेकर 2014 तक कांग्रेस सत्ता में रही. 2014 में कांग्रेस 464 सीटों पर लड़ी और सिर्फ 44 ही जीत पाई थी. 2019 के चुनाव में कांग्रेस 421 सीटों पर लड़ी और 52 पर जीती. इसके विपरीत बीजेपी पिछले पांच चुनाव में क्रमश: 339, 364, 433, 428 और 436 सीटों पर चुनाव लड़ी है.

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2004 में 417 सीटों पर लड़ी थी

कांग्रेस अपने सियासी इतिहास में अभी तक सबसे कम सीटों पर 2004 के लोकसभा चुनाव में लड़ी है. 2004 में कांग्रेस ने 417 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, क्योंकि बाकी सीटें गठबंधन के सहयोगियों के लिए छोड़ी थी. कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एनसीपी, बिहार में आरजेडी, झारखंड में जेएमएम, तमिलनाडु में डीएमके जैसे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ी थी. कांग्रेस देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से 417 पर खुद लड़ी थी और बाकी 126 सीटें पर उसके सहयोगी दल लड़े थे. 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के लिए 2024 का चुनाव कोर या मरो वाली स्थिति का है. इसीलिए कांग्रेस हर समझौता करने के लिए तैयार है. यही वजह है कि आजादी के बाद कांग्रेस को अपने सियासी इतिहास में सबसे कम सीटों पर इस बारह चुनाव लड़ने की संभावना दिख रही है.

दरअसल, नरेंद्र मोदी के केंद्रीय राजनीति में दस्तक देने के साथ ही कांग्रेस पूरी तरफ से कमजोर हो गई है. कांग्रेस के हाथों से देश की ही सत्ता नहीं बल्कि राज्यों से भी बाहर होती जा रही है. ऐसे में कांग्रेस देश के तीन राज्यों में अपने दम पर सरकार में है और तीन राज्यों में सहयोगी दल के साथ सत्ता में भागेदारी बनी हुई है. कांग्रेस पार्टी की कमान गांधी परिवार से बाहर मल्लिकार्जुन खरगे को सौंपी गई और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए 27 विपक्षी दलों के साथ मिलकर गठबंधन किया ताकि बीजेपी को मात दी सके. इसके लिए कांग्रेस ने ममता बनर्जी से लेकर अखिलेश यादव, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, उद्धव ठाकरे, एमके स्टालिन, जयंत चौधरी, शरद पवार की पार्टियों के साथ-साथ लेफ्ट पार्टी के साथ हाथ मिलाया है.

कांग्रेस ने INDIA गठबंधन के छत्रपों के साथ सीट शेयरिंग के लिए कांग्रेस ने मुकुल वासनिक के अगुवाई में अपने नेताओं पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है. मुकुल वासनिक के आवास पर बैठक कर समिति के सदस्यों ने 543 लोकसभा सीटों में से कम से कम साढ़े तीन सौ सीटों पर चुनाव लड़ने की रूप रेखा बनाई है, जिसे गठबंधन के सहयोगी दलों के सामने रखेगी. सूत्रों की माने तो इस पैनल ने 292 लोकसभा सीटों को शॉर्टलिस्ट किया है, जहां पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है. इसके अलावा सहयोगी दलों के प्रभाव वाले राज्यों में 80 से 85 सीटें चाहती है. हालांकि, कांग्रेस जिस तरह से सीटों का चयन किया है, उस लिहाज से 370 से ज्यादा सीटें उसके रॉडार पर है, लेकिन सहयोगी दल उसे इतनी सीटें देने के मूड में नहीं है. ऐसे में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा 270 सीटों पर ही चुनाव लड़ने आजादी मिल सकती है. ऐसे होता है कि कांग्रेस बहुमत से भी कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है?

कांग्रेस के रणनीतिकारों के अनुसार गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे नौ बड़े राज्य, जिनमें 152 लोकसभा सीटें हैं, उन पर भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर है. इन प्रदेशों की सीटों पर कोई दूसरी पार्टी कांग्रेस को मदद नहीं कर सकती है. वहीं, विपक्षी पार्टियों के साथ आने के कारण जिन राज्यों में बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है, वे राज्य हैं- असम, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड और पश्चिम बंगाल हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में यहां भाजपा विरोधी मतों का विभाजन नहीं होगा.

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दिल्ली में जहां भाजपा का सातों सीटों पर कब्जा है, इस बात पर सहमति बन सकती है कि आम आदमी पार्टी पांच सीटों पर लड़े और बाकी दो सीटें कांग्रेस मिल सकती है. इसी तरह पंजाब में कांग्रेस कुल 13 सीटों में से 6 सीटों पर ही अपने कैंडिडेट्स उतार सकती है और बाकी सात सीटें आम आदमी पार्टी को मिल सकती है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 21 सीटों की मांग सपा के सामने रख सकती है, लेकिन अखिलेश यादव सिर्फ 10 से 12 सीटें ही देने के मूड में है. इसी तरह से बिहार में कांग्रेस 9 से 10 सीटें मांग रही है, लेकिन उसे ज्यादा से ज्यादा पांच सीटें ही मिल सकती हैं. झारखंड में कांग्रेस को 3 सीटें ही जेएमम देने के मूड में है जबकि उसकी डिमांड पांच सीटों की है. महाराष्ट्र में कांग्रेस 22 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन उसे 12 से 15 सीटें ही मिल सकती है. बंगाल में ममता बनर्जी बहुत ज्यादा कांग्रेस को सियासी स्पेश नहीं देना चाहती है, जिसके चलते उसे चार से पांच सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है.

क्या 272 से कम सीटों पर लड़ेगी कांग्रेस?

इस तरह कांग्रेस 272 से कम लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है. ऐसे में 2024 में कांग्रेस जिन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, उन सभी पर अगर उसे जीत हासिल हो, तब भी वह अपने दम पर केंद्र में सरकार नहीं बना सकती, क्योंकि बहुमत से कम सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है. राहुल गांधी 14 जनवरी को जिस भारत न्याय यात्रा पर निकल रहे हैं, उन राज्यों की 355 संसदीय सीटें ही आती है और कांग्रेस के सिर्फ 14 सीटें है. ये ऐसे राज्य हैं, जहां पर छत्रपों का ही पूरी तरह दबदबा है. ऐसे में कांग्रेस को जहर का घूंट पीकर ही सीटों के लिए समझौता करना पड़ेगा और उसे अपने इतिहास में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ना होगा?

मैं आपको इस ताज़ा जानकारी के बारे में बताना चाहता हूँ कि लोकसभा चुनावों के संदर्भ में कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के बीच जो माहौल बन रहा है, वह काफी रोमांचक है। बीजेपी सत्ता में एक बार फिर से हावी होने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने स्थान को बचाने की चुनौती में है। इसी कारण, कांग्रेस ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर ‘INDIA’ नामक गठबंधन का गठन किया है और सीटों का बंटवारा करने के लिए तैयारी की है।इस दौरान, कांग्रेस को 2024 के चुनाव में अपने राजनीतिक इतिहास में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है। ‘INDIA’ गठबंधन में शामिल दलों के सामर्थ्य के कारण, कांग्रेस को बिहार से लेकर यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक समझौते करने पड़ सकते हैं।क्या कांग्रेस को इस समय अपने रूट्स से भी कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ेगा? इसका अंत देखने के लिए हम सब को धीरज रखना होगा।
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बीजेपी 198, टीएमसी 89 और कांग्रेस 2ः बंगाल चुनाव रिजल्ट का फाइनल आंकड़ा आया, 15 साल बाद ढहा ममता बनर्जी का किला

Bengal Assembly Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP) ने इतिहास रच दिया है। बंगाल में भगवा सुनामी के सामने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee ) की पार्टी टीएमसी (TMC) ताश की पत्तों की तरह धराशयी हो गई। 15 साल बाद बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढह गया और बीजेपी सत्ता पर काबिज हो रही है।

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Bengal Assembly Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP) ने इतिहास रच दिया है। बंगाल में भगवा सुनामी के सामने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee ) की पार्टी टीएमसी (TMC) ताश की पत्तों की तरह धराशयी हो गई। 15 साल बाद बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढह गया और बीजेपी सत्ता पर काबिज हो रही है। बंगाल चुनाव रिजल्ट का फाइनल आंकड़ा भी आ गया है। चुनाव आयोग के मुताबिक बीजेपी 9 सीटों पर जीत हासिल कर ली है। वहीं 189 सीटों पर आगे चल रही है। इस तरह भाजपा कुल 198 सीटों पर जीत हासिल करने की तरफ बढ़ रही है। मतगणना अभी जारी है तो अंतिम परिणाम में सीटों में 2-3 का फर्क हो सकता है।

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इलेक्शन कमीशन के मुताबिक टीएमसी कुल 89 सीट पर जीत हालिक करने की तरफ बढ़ रही है। तृणमूल कांग्रेस 1 सीटों पर जीत हासिल कर ली है। वहीं 88 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस 2, सीपीआई (एम) 1 और एजेयूपी 2 सीटों पर आगे चल रही है।

भवानीपुर के काउंटिंग सेंटर पहुंचे ममता और सुवेंदु; बाहर भारी फोर्स तैनात

इधर पश्चिम बंगाल के वीवीआईपी सीट भवानीपुर में हंगामा हो रहा है। यहां 12 राउंड की काउंटिंग की एनाउंसमेंट रोक दी गई है। मतदान केंद्र के अंदर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी मौजूद हैं। दूसरी पार्टियों के एजेंट का आरोप है कि बीजेपी के एजेंट ने उन्हें बाहर निकाल दिया है। ममता ने भी कहा है कि उनके बहुत सारे एजेंट को काउंटिंग सेंटर से बाहर निकाल दिया गया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक भवानीपुर सीट पर 13 राउंड की काउंटिंग हो चुकी है और इस सीट से बीजेपी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी अभी पीछे चल रहे हैं। इस सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी टक्कर दे रहे हैं।

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ममता बनर्जी के घर के बाहर जय श्रीराम के नारे लगे

जबरदस्त जीत होता देख बीजेपी कार्यकर्ता सड़कों पर उतकर जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है। ममता बनर्जी के घर के बाहर बीजीपी कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए। वहीं काउंटिंग के बीच सीएम ममता बनर्जी का बयान सामने आया है। दीदी ने टीएमसी कैंडिडेट और कार्यकर्ताओं से बूथ नहीं छोड़ने की अपील की है।

 

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पश्चिम बंगाल में BJP की प्रचंड जीत पर बोले PM मोदी- गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल, घुसपैठियों पर होगा सख्त एक्शन

PM Modi Speech: पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत के बाद देश की सियासत में बड़ा संदेश गया है। खासकर बंगाल में जीत को पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में गिना जा रहा है। इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे माहौल में पीएम मोदी ने देश को संबोधित किया।

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PM Modi Speech: पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत के बाद देश की सियासत में बड़ा संदेश गया है। खासकर बंगाल में जीत को पार्टी की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में गिना जा रहा है। इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे माहौल में पीएम मोदी ने देश को संबोधित किया।

ऐतिहासिक दिन, कार्यकर्ताओं की साधना का परिणाम

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत ‘भारत माता की जय’ के साथ की और कार्यकर्ताओं से अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह दिन सिर्फ चुनावी जीत का नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “जब साधना सिद्धि में बदलती है, तो जो खुशी होती है, वही आज हर कार्यकर्ता के चेहरे पर दिखाई दे रही है।”

नितिन नवीन के नेतृत्व की तारीफ

पीएम मोदी ने पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद संभालने के बाद यह उनका पहला बड़ा चुनाव था और उन्होंने कार्यकर्ताओं को जिस तरह मार्गदर्शन दिया, वह इस जीत में बेहद अहम साबित हुआ।

“भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी” — जनता का आभार

प्रधानमंत्री ने देशभर में हुए उपचुनावों का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा में मिली जीत के लिए जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखाया है कि वह “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” है, जहां लोकतंत्र सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि संस्कार है।

93% मतदान बना रिकॉर्ड, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

मोदी ने पश्चिम बंगाल में 93% मतदान को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी रिकॉर्ड मतदान का उल्लेख किया। खास तौर पर महिलाओं की बड़ी भागीदारी को उन्होंने लोकतंत्र की सबसे उजली तस्वीर बताया।

“गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल”

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण का सबसे चर्चित बयान देते हुए कहा कि “आज गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक कमल ही कमल खिला है।” उन्होंने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और अब पश्चिम बंगाल में एनडीए सरकार बनने को मां गंगा का आशीर्वाद बताया।

मां गंगा और असम की जनता का आशीर्वाद

मोदी ने 2013 में काशी से अपना नामांकन भरने का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने कहा था कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। उन्होंने कहा कि आज भी वही आशीर्वाद बना हुआ है। साथ ही असम की जनता का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि वहां तीसरी बार एनडीए पर भरोसा जताया गया है और अब राज्य विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

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“नागरिक देवो भव” और गुड गवर्नेंस पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीजेपी का मूल मंत्र “नागरिक देवो भव” है और पार्टी जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार और गुजरात के चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि जनता लगातार बीजेपी के सुशासन पर भरोसा जता रही है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद किया

मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज उनकी आत्मा को शांति मिली होगी। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने बंगाल को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने के लिए संघर्ष किया था और आज की जीत उसी विचारधारा की जीत है।

वंदे मातरम् के 150वें वर्ष में जीत का महत्व

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् के 150वें वर्ष में मिली यह जीत ऐतिहासिक है और यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि बंगाल में अब एक नया अध्याय शुरू हो रहा है, जहां भयमुक्त और विकासयुक्त शासन होगा।

“नया सूर्योदय”—बंगाल के लिए बड़ा वादा

मोदी ने कहा, “4 मई की शाम भले ढल रही हो, लेकिन बंगाल की पावन धरती पर एक नया सूर्योदय हुआ है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में विकास, विश्वास और नई उम्मीदों के साथ नई यात्रा शुरू होगी।

पहली कैबिनेट में आयुष्मान योजना, घुसपैठियों पर एक्शन

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं को रोजगार और पलायन रोकना सरकार की प्राथमिकता होगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भयमुक्त बंगाल का संकल्प, टैगोर का जिक्र

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को याद करते हुए मोदी ने कहा कि उनका सपना “जहां मन भयमुक्त हो” अब साकार किया जाएगा। उन्होंने वादा किया कि बीजेपी बंगाल में भयमुक्त वातावरण बनाकर दिखाएगी।

“बदला नहीं, बदलाव” की राजनीति का दिया संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के अंत में बंगाल की राजनीति को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब डर नहीं, बल्कि लोकतंत्र जीता है।

 

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि अब “बदला नहीं, बदलाव” की राजनीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते दशक में राजनीतिक हिंसा ने कई जिंदगियां बर्बाद की हैं, इसलिए अब समय आ गया है कि इस चक्र को खत्म किया जाए।

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मोदी ने कहा, “भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे यह न देखें कि किसने किसे वोट दिया, बल्कि सभी मिलकर बंगाल के विकास के लिए काम करें।

 

वैश्विक संकट के बीच भारत ने चुनी स्थिरता

 

मोदी ने चुनाव के समय की वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि जब देश में मतदान हो रहा था, तब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और आर्थिक संकट के हालात थे।

 

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है, लेकिन भारत ने इन चुनौतियों के बीच भी स्थिरता को चुना। उन्होंने कहा कि यह चुनाव परिणाम दिखाते हैं कि भारत के लोग विकसित भारत के लक्ष्य के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहते हैं।

 

अंग, बंग और कलिंग—भारत के ऐतिहासिक स्तंभ

 

प्रधानमंत्री ने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जब देश समृद्ध था, तब “अंग, बंग और कलिंग” उसके मजबूत स्तंभ थे।

 

उन्होंने बताया कि अंग यानी आज का बिहार शिक्षा और ज्ञान का केंद्र था, जहां नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे। बंगाल को उन्होंने भारत की सांस्कृतिक आत्मा की आवाज बताया, जबकि कलिंग (आज का ओडिशा) समुद्री व्यापार का वैश्विक केंद्र हुआ करता था।

 

नारी शक्ति पर जोर, विपक्ष पर निशाना

 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में नारी शक्ति को भारत के विकास का अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने नारी शक्ति की प्रगति को रोकने की कोशिश की।

 

मोदी ने कहा कि “मैंने पहले ही कहा था कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को महिलाओं का आक्रोश झेलना पड़ेगा।” उन्होंने Tतृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) पर निशाना साधते हुए कहा कि बहनों-बेटियों ने उन्हें सजा दी है।

 

उन्होंने केरल में लेफ्ट और कांग्रेस पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां की महिलाएं अगली बार उन्हें भी सबक सिखाएंगी। वहीं समाजवाजी पार्टी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की महिलाओं का आक्रोश उन्हें झेलना पड़ेगा और महिला विरोधी सोच को जनता माफ नहीं करेगी।

शांतिपूर्ण मतदान लोकतंत्र की जीत

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हुआ और हिंसा में किसी निर्दोष की जान नहीं गई। इसे उन्होंने लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया और चुनाव आयोग समेत सभी संस्थाओं की सराहना की।

 

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नोएडा हिंसा का पाकिस्तानी कनेक्शन आया सामने! पुलिस का दावा- PAK हैंडलर्स ने भड़काया

नोएडा हिंसा मामले में पुलिस ने दावा किया कि जांच में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के दो हैंडल से भ्रामक पोस्ट कर हिंसा भड़काने की कोशिश की गई. तकनीकी जांच में ये दोनों हैंडल पाकिस्तान से ऑपरेट करते पाए गए. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है और आगे की कार्रवाई जारी है.

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