छत्तीसगढ़
Chhattisgarh: मुख्य तकनीकी परीक्षक कार्यालय के माध्यम से आम लोग भी करा सकेंगे अपने नवीन भवनों के गुणवत्ता की जांच

रायपुर| राज्य के आम नागरिक, शासकीय, अर्धशासकीय एवं अशासकीय संस्थाएं राज्य शासन के मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) कार्यालय के माध्यम से अपने नवीन भवनों के कांक्रीट की गुणवत्ता की जांच करा सकेंगे। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति एवं संस्था को विधिवत आवेदन एवं निर्धारित शुल्क अदा करना होगा। राज्य शासन द्वारा मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) कार्यालय को इसके लिए अनुमति प्रदान की है। नवीन भवनों के कांक्रीट की गुणवत्ता की जांच नॉन डिस्ट्रेक्टिव टेस्टिंग (एनडीटी) उपकरणों के माध्यम से निर्धारित शुल्क देने पर की जाएगी। इससे आम नागरिकों को लागत के अनुरूप गुणवत्तायुक्त भवन की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ ही भवन संधारण में आने वाले अनावश्यक अतिरिक्त व्यय से मुक्ति मिलेगी। राज्य शासन द्वारा स्वीकृत निर्माण कार्यों के गुणवत्ता पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के प्रति आम लोगों में जागरूकता आयेगी एवं राज्य सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी। शासन के द्वारा कार्यालय में उपलब्ध डिजीटल रिबाउंड हैमर हेतु परीक्षण शुल्क 2500 रूपए प्रति रिडिंग एवं अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी उपकरण हेतु शुल्क 3 हजार रूपए प्रति रिडिंग जी.एस.टी. सहित निर्धारित है।
परीक्षण शुल्क राशि के लिए ऑनलाईन/कार्यालय में सीधे जमा की जा सकती है। शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी निर्माण कार्यों के कांकीट की गुणवत्ता परीक्षण हेतु कार्यालय मुख्य तकनीकी परीक्षक (सर्तकता) के वेबसाईट ctev.cg.gov.in में ई-परीक्षक मेनु में जाकर निर्धारित शुल्क ई-चालान के माध्यम से राजस्व मद 0070-60-800 अन्य प्राप्तियां में भुगतान कर सकेगे अथवा कार्यालय में आवेदक नियम एवं शर्ते स्वीकार करने के उपरांत मनी रीसिप्ट के माध्यम से राशि जमा कर गुणवत्ता परीक्षण कराया जा सकता है। ई-परीक्षक मेनू को उपयोग करने की विधि का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है – मेनू में जाकर ई-परीक्षक लिंक को क्लिक करें। वेब पेज में डिजीटल रिबांऊण्ड हैमर एवं अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी उपकरण का परीक्षण मूल्य प्रदर्शित होगा। आवेदक स्वयं की आवश्यकतानुसार विवरण में क्लिक करेंगे। परीक्षणों की संख्या दर्ज कर, कार्ट में डाले, को क्लिक करेंगे। निरीक्षण स्थल का विवरण भर कर, घोषणा के लिए बनाये गये चेक बॉक्स को क्लिक करने के पश्चात् कुल देय राशि की गणना में क्लिक करें। ओ.टी.पी. सत्यापित कर राशि का भुगतान करें, पर क्लिक करें। आवेदक के मोबाईल फोन पर आये ओ.टी.पी. नंबर को सत्यापित करना होगा।
आवेदक ई-चालान सेवाओं के माध्यम से परीक्षण शुल्क की राशि सीधे शासन के राजस्व मद में जमा करेंगे। परीक्षण शुल्क राशि प्राप्त करने के पश्चात् कार्यालय मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) की टीम कार्य स्थल पर पहुंचकर कांक्रीट की गुणवत्ता का परीक्षण एनडीटी उपकरण के माध्यम से करेगी। आवेदक को निश्चित समय में परीक्षण परिणाम उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है। तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) श्री आर. पुराम ने बताया कि ई-परीक्षक मॉड्यूल में प्रत्येक जिले के आवेदकों के लिए न्यूनतम परीक्षण निर्धारित किया गया है जिसमें बलरामपुर एवं जशपुर में न्यूनतम 4 परीक्षण कराना अनिवार्य है। इसी प्रकार बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कोरिया, सुकमा, सूरजपुर एवं सरगुजा में 3 परीक्षण, जांजगीर-चांपा, कवर्धा, कांकेर, कोण्डागांव, कोरबा, नारायणपुर, रायगढ़ एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 2 परीक्षण एवं बालोद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, बिलासपुर, धमतरी, दुर्ग, गरियाबंद, महासमुन्द, मुंगेली, रायपुर एवं राजनांदगांव में 1 परीक्षण किए जाएंगे। न्यूनतम परीक्षण संख्या के अतिरिक्त प्रत्येक परीक्षण में चयनित उपकरण के आधार पर परीक्षण शुल्क में वृद्धि होगी। संगठन के द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता नियंत्रण हेतु 100 बिन्दु चेक लिस्ट पुस्तिका अंग्रेजी एवं हिन्दी संस्करण में तैयार किया गया है, जो कि ई-परीक्षक पोर्टल में उपलब्ध है। प्रत्येक पुस्तिका की कीमत 80 रूपए है, इसको ऑनलाईन भुगतान करने के पश्चात् प्राप्त किया जा सकता है। ई-परीक्षक पोर्टल के संबंध में तकनीकी सहायता हेतु सहायक कम्प्यूटर प्रोग्रामर के मोबाईल नं. 98932-28899 पर संपर्क किया जा सकता है।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है



















