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छत्तीसगढ़

सरकारी स्कूलों के 50 हजार छात्रों ने लिख दीं 1000 किताबें, खुद डिजाइन किया बुक कवर

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उत्तरी केरल की कन्नूर पंचायत ने जिले के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के 50,000 से अधिक छात्रों की ओर से लिखी गईं एक हजार से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं. देश में पहली बार देखा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्र इतनी सारी पुस्तकों के कवर डिज़ाइन को लिखने, संपादित करने और स्कैच करने में लगे रहे.

यूनिवर्सल रिकॉर्ड्स फोरम के अधिकारियों ने इसे “एक स्थान पर प्रकाशित सबसे अधिक पुस्तकें” बताते हुए एक प्रमाण पत्र प्रदान किया.

इन पुस्तकों को पंचायत की ओर से एन्टे पुस्तकम, एन्टे विद्यालयम (माई बुक, माई स्कूल) नामक प्रोजेक्ट के तहत प्रकाशित किया गया. पुस्तकों में छोटी कथाएं, कविता, नाटक, यात्रा वृतांत और विज्ञान पर लेख शामिल हैं. सभी पुस्तकें कक्षा 1 से 12 वीं के छात्रों द्वारा लिखी गई हैं. जबकि 1,000 छात्रों ने प्रविष्टियां संपादित की गई हैं. इतनी ही संख्या में छात्रों ने प्रत्येक पुस्तक के कवर को स्कैच करने के लिए अपने कलात्मक कौशल का प्रयोग किया.

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सीपीएम नेता पी.पी. दिव्या ने दिया था सुझाव

सीपीएम नेता पी.पी. दिव्या के अनुसार, हम चाहते थे कि स्कूली छात्र कोविड लॉकडाउन के नकारात्मक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए खुद को शब्दों के माध्यम से व्यक्त करें, जिसने उन्हें सोशल मीडिया से जोड़ दिया. कोविड शटडाउन ने छात्रों के बीच पढ़ने पर नकारात्मक प्रभाव डाला है. इसके परिणामस्वरूप, उनके लेखन कौशल पर असर पड़ा और उनमें से कई के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिला.

दिव्या ने बताया कि लिखना और पढ़ना एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और साथ मिलकर वे व्यक्तियों में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, इसलिए हमने स्कूली बच्चों को लिखकर खुद को अभिव्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के बारे में सोचा. लेकिन जवाब ने सभी को चौंका दिया. किसी को उम्मीद नहीं थी कि इतने सारे छात्र लेखन और ड्राइंग के रूप में अपनी रचनात्मकता व्यक्त करेंगे. प्रत्येक बच्चा जीवन भर अपने नाम पर छपी चीज़ों को संजो कर रखेगा. दिव्या ने कहा, जो कुछ स्कूल इस पहल में शामिल नहीं हुए, उन्होंने भविष्य में अवसर तलाशने के लिए पंचायत से संपर्क किया है.

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यह हमारे लिए एक अनूठा अनुभव है- कैराली बुक्स के प्रबंध निदेशक

मुद्रकों के लिए भी यह एक अनोखा अनुभव रहा है. कैराली बुक्स के प्रबंध निदेशक ओ. अशोक कुमार ने बताया, स्कूली छात्रों द्वारा लिखी गईं यह पुस्तकें हमारे लिए एक अनूठा अनुभव है, क्योंकि हमने एक ही बार में 756 शीर्षक प्रकाशित किए हैं.

प्राथमिक शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने कन्नूर में लॉन्च समारोह में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम जनता की बड़ी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ये किताबें राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आपूर्ति की जाएं. शुक्रवार को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मलयालम में 1,056 पुस्तकों का अनावरण किया, जो पूरी तरह से कन्नूर के कुल 1100 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में से 1,020 स्कूल के 50,000 से अधिक छात्रों के द्वारा लिखी गईं थीं.

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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।

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इस वजह से हुई मानसून में देरी

सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:

  • सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।

  • न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।

इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

  • जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।

  • मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।

  • केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।

  • वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।

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मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।

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छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं

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सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है

नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है

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