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इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन से ही BJP छू पाएगी 370, 400+ सीटों की बुलंदी, बनानी होगी प्रचंड भगवा लहर

Lok Sabha Election 2024 : मोदी लहर पर सवार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी जीत की हैट्रिक लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। 2014, 2019 के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भगवा पार्टी ने सीट जीतने का अपना लक्ष्य बढ़ाया है।
भाजपा अपने लिए 370 सीटें और एनडीए के लिए 400 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। भाजपा के पिछले दो लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को देखते हुए उसका यह मिशन असंभव नहीं है लेकिन मुश्किल जरूर लगता है। अपने इस लक्ष्य को पाने के लिए उसे हिंदी बेल्ट के उन राज्यों में सीटें बढ़ानी होंगी जहां उसे कम सीटें मिलीं। साथ ही दक्षिण भारत में उसे उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन करना होगा। 400 प्लस का आंकड़ा अगर उसे छूना है तो दक्षिण भारत के राज्यों खासकर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में उसे बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
इन राज्यों में अधिकतर सीट हासिल कर चुकी है BJP
हिंदी बेल्ट के राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में वह अधिकतम सीटें हासिल कर चुकी है। सबसे बड़े राज्य यूपी में इस बार वह ज्यादा सीटें हासिल कर सकती है। यहां उसके पास 16 सीटों की गुंजाइश है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना और असम में वह अपनी सीटें बढ़ा सकती है। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा ने इस बार एनडीए का कुनबा बढ़ाया है और जिताऊ उम्मीदवार पर दांव लगाया गया है।
राजीव गांधी को मिला था प्रचंड 400 प्लस का बहुमत
पीएम मोदी सहित भाजपा के बड़े नेता लगातार ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। इससे पहले 400 सीटों का आंकड़ा कांग्रेस ने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में छूआ था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति की लहर दौड़ी थी जिसके बाद कांग्रेस को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ। जानकार मानते हैं कि इस समय मोदी लहर तो है लेकिन भाजपा को अपना यह लक्ष्य हासिल करने के लिए मतदाताओं के बीच भारी माहौल एवं प्रचंड मोदी लहर बनाना होगा।
क्या कहते हैं 2014 और 2019 के चुनाव नतीजे
2014 के मुकाबले 2019 में भाजपा की 21 सीटें और एनडीए की 16 सीटें बढ़ीं। वोट प्रतिशत में भी छह प्रतिशत का इजाफा हुआ। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 303 सीटें, कांग्रेस को 52 और अन्य को 188 सीटें मिलीं। इस चुनाव में एनडीए को 37 प्रतिशत, यूपीए को 19 और अन्य को 44 फीसदी वोट मिला जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 282 सीटें, कांग्रेस को 44 और अन्य को 217 सीटें मिलीं। इस चुनाव में भाजपा को 31 फीसद, कांग्रेस को 19 और अन्य को 50 प्रतिशत वोट मिला। गठबंधन की लिहाज से देखें तो 2019 में एनडीए 352 सीटें, यूपीए को 91 और अन्य को 100 सीटें मिलीं। एनडीए का वोट प्रतिशत 45 फीसद, यूपीए का 27 और अन्य का 28 प्रतिशत रहा। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 336 सीटें, यूपीए को 59 और अन्य को 148 सीटें मिलीं। इस चुनाव में एनडीए का वोट प्रतिशत 39 फीसद, यूपीए का 23 और अन्य का 38 फीसद रहा।
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।





















