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Ambikapur News : झोले में चंद पुराने कपड़े लेकर कोर्ट में पहुंचा करोड़ों की जमीन बेचने वाला बंसू लोहार

अंबिकापुर । भू माफियाओं ने बंसू लोहार को मोहरा बनाकर शहर की करोडों की बेशकीमती जमीन का फर्जीवाड़ा किया है। बंसू लोहार की तलाश लंबे समय से की जा रही थी। बुधवार को बंसू लोहार ने अंबिकापुर न्यायालय में समर्पण कर दिया।
हाथ में एक झोला और उसमें कुछ कपड़े लिए न्यायालय परिसर में नाती के साथ पहुंचे बुजुर्ग बंसू लोहार को देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि भू माफियाओं ने आपराधिक षड्यंत्र में उसे सिर्फ उपयोग किया। परसा के महादेवपारा निवासी बंसू लोहार की उम्र 78 वर्ष की है। उसके नाम से जमीन का नामांतरण कर करोड़ो रूपये में लोगों को बेच दिया गया था।
इसमें से यदि थोड़ी सी भी रकम बंसू लोहार को मिली होती तो वह उसके व्यवहार,पहनावा और जीवन शैली में निश्चित रूप से झलकता लेकिन ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया। वह लुंगी और एक शर्ट पहना था। कंधे पर एक गमछा लटकाया था। न्यायालय में आत्मसमपर्ण की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस की ओर से बंसू लोहार को आठ दिनों की रिमांड पर देने आवेदन प्रस्तुत किया था। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने बंसू लोहार को चार दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है। इस चार दिनों में पुलिस उससे घटना से जुड़े साक्ष्य और भूमाफियाओं के संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास करेगी। इसी मामले में तत्कालीन नजूल अधिकारी नीलम टोप्पो, राजस्व निरीक्षक नारायण सिंह, राहुल सिंह तथा लिपिक अजय तिवारी के विरुद्ध गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध पंजीकृत है। नीलम टोप्पो को छोड़कर शेष तीनों शासकीय सेवकों को कलेक्टर भोसकर विलास ने निलंबित कर दिया है।
बंसू ने उगला भूमाफिया का नाम,किया दावा – एक रुपये भी नहीं मिले
न्यायालय परिसर में मीडिया से चर्चा के दौरान बंसू लोहार ने करोड़ों की जमीन फर्जीवाड़ा के मामले में एक भूमाफिया का नाम भी सार्वजनिक रूप से लिया। उसने दावा किया कि वही व्यक्ति उसके पास आया था ।जमीन किसकी थी। किसके नाम पर किया गया उसे कुछ भी नहीं पता। उसे एक रुपये भी नहीं दिया गया है जबकि जो दस्तावेज इस पूरे प्रकरण में सामने आए थे उसमें स्पष्ट है कि बंसू लोहार ने करोड़ों की जमीन बेची है। यदि बंसू लोहार को एक रुपये भी नहीं मिले तो उसके नाम से जारी राशि अथवा चेक कहां गए इसकी भी जांच अब पुलिस आगे करेगी। चार दिनों की पुलिस रिमांड में इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह था मामला
अंबिकापुर के नमनाकला मोहल्ले में 4.22 एकड़ शासकीय जमीन बंसू लोहार के नाम पर नामांतरण कराया गया था। जिस बंसू लोहार के नाम पर यह जमीन थी, उसकी 15 वर्ष पहले मौत हो गई थी। फिर यह जमीन शासकीय घोषित हुई थी।इस बात की जानकारी लगने पर भू माफियाओं ने दूसरे बंसू को खड़ा कर यह फर्जीवाड़ा किया था। बंसू के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से अंतरित जमीन को दूसरों को बेच दिया गया था। कलेक्टर न्यायलय ने सभी नामांतरण को शून्य घोषित कर जमीन फिर से शासकीय मद में दर्ज करा दी है।
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Bilaspur के नामी LCIT Group of Institutions का छात्रों के साथ भयानक फर्जीवाड़ा : वादे बड़े-बड़े, हकीकत पानी-पानी!

बिलासपुर: LCIT Group of Institutions – Bilaspur, जो हर साल एडमिशन के दौरान बड़े-बड़े वादे और लुभावने दावे करता है, उसकी सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। दावा किया जाता है कि यहां आधुनिक लैब्स, अनुभवी फैकल्टी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा — लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
बारिश आई, लैब्स ने छलनी बनकर स्वागत किया!
हमें मिले वीडियो में कॉलेज की लैब्स से टपकती छतें साफ़ दिखाई दे रही हैं। जहां स्टूडेंट्स को मशीनों के साथ प्रैक्टिकल करना चाहिए था, वहां अब पानी से बचने के लिए प्लास्टिक की बाल्टियाँ रखी जा रही हैं। सवाल ये उठता है कि जब प्रयोगशालाएं ही सुरक्षित नहीं, तो शिक्षा कितनी सुरक्षित होगी?

फैकल्टी? बस कागज़ों पर!
सूत्रों के अनुसार, यहां कई फैकल्टी सदस्य केवल ऑन पेपर मौजूद हैं। यानी नाम तो है, पर काम में कहीं नजर नहीं आते। छात्रों का कहना है कि कई विषयों की क्लास ही नियमित नहीं होती।
इंजीनियरिंग प्रिंसिपल भी सिर्फ नाम के!
कहा जा रहा है कि इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रिंसिपल भी फुल टाइम नहीं है, बल्कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए कागजों पर मौजूद हैं। यह छात्रों के भविष्य के साथ खुला मज़ाक है।

स्टाफ की नियुक्ति पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि अधिकांश स्टाफ या तो यहीं के पुराने छात्र हैं या फिर अन्य कॉलेज से किसी वजह से हटाए गए लोग हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
🎙 बिलासपुर के इस संस्थान की मार्केटिंग चमचमाती है, लेकिन हकीकत में ढहती छतें, दिखावटी स्टाफ और खोखले दावे छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ज़रूरत है कि शिक्षा को सिर्फ व्यापार न बनाकर, जिम्मेदारी समझा जाए
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165 किलोमीटर की रफ्तार से टकराया तूफान… सेंट्रल अमेरिका में सारा ने मचाई ऐसी तबाही, लोग करने लगे त्राहिमाम

नई दिल्ली. ट्रॉपिकल स्टॉर्म सारा ने हाल के दिनों में मध्य अमेरिका में भारी तबाही मचाई है. यह तूफान गुरुवार दोपहर को कैरेबियन सागर में बना था. यह अटलांटिक तूफान मौसम का 18वां तूफान है और इस महीने का तीसरा.
इस मौसम में इतने सारे उष्णकटिबंधीय तूफान (ट्रॉपिकल स्टॉर्म) और चक्रवात बनने का कारण कैरेबियन सागर और मैक्सिको की खाड़ी का औसत से अधिक गर्म होना है, जिससे इन सिस्टम के डेवलपमेंट और तेजी को अधिक एनर्जी मिलती है.
अपने बनने के बाद से, सारा समुद्री तूफान ने होंडुरास, कोस्टा रिका, निकारागुआ, बेलीज और ग्वाटेमाला को बुरी तरह से प्रभावित किया है, जिससे भारी बारिश, बड़े पैमाने पर बाढ़ और लैंडस्लाइड हुआ है. तूफान की धीमी गति ने नुकसान को और बढ़ा दिया है, जिससे इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है. हालांकि, सारा की ताकत कम हो रही है; गुरुवार को इसकी स्थायी हवाएं 45 मील प्रति घंटे की थीं, लेकिन अंदरूनी इलाकों में जाने के बाद यह थोड़ी कमजोर हो गई, और रविवार तक हवाएं 40 मील प्रति घंटे की रह गईं.
राष्ट्रीय तूफान केंद्र के अनुसार, सारा के सोमवार को युकाटन प्रायद्वीप के दक्षिणी क्षेत्र की ओर उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने की उम्मीद है. 15 नवंबर की रात से लगातार बारिश हो रही है और 16 नवंबर को भी सैन पेड्रो सुला शहर में यह बारिश जारी रही, जहां तूफान की वजह से एक नदी का पुल बह गया, जिससे एक पूरे समुदाय का संपर्क मुख्य शहर से कट गया. मियामी स्थित नेशनल हरिकेन सेंटर के अनुसार, इस वीकेंड में इस क्षेत्र में जानलेवा फ्लैश फ्लडिंग और लैंडस्लाइड हो सकता है.
वेदर सिस्टम ने 14 नवंबर देर रात होंडुरास-निकारागुआ सीमा पर काबो ग्रासियस ए डिओस से लगभग 105 मील (165 किलोमीटर) पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में लैंडफॉल किया था. हरिकेन सेंटर ने उम्मीद जताई कि तूफान शनिवार और रविवार को “थोड़ी तेज गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर” बढ़ते हुए होंडुरास की खाड़ी में प्रवेश करेगा और फिर बेलीज में लैंडफॉल करेगा.
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टीचिंग छोड़ शुरू किया खाना बनाना, आज हैं देश की सबसे अमीर महिला यूट्यूबर, हर दिन की कमाई लाखों में

नई दिल्ली. निशा मधुलिका का नाम आज भारतीय डिजिटल मीडिया में प्रेरणादायक कहानियों में सबसे आगे है. एक समय में शिक्षिका रहीं निशा ने यूट्यूब की दुनिया में “Nisha Madhulika” चैनल के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है.
उत्तर प्रदेश में एक साधारण परिवार में जन्मी निशा मधुलिका ने अपने जीवन की शुरुआत शिक्षिका के रूप में की थी और अपने पति एम.एस. गुप्ता के साथ उनके व्यापार में भी सहयोग किया. बाद में वह अपने पति के साथ नोएडा शिफ्ट हो गईं और यहीं से उनके यूट्यूब करियर की शुरुआत हुई.
निशा ने 2009 में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया, जिसमें वह सरल और पारंपरिक भारतीय शाकाहारी रेसिपी बनाती हैं. हिंदी भाषा में वीडियो बनाकर उन्होंने देश-विदेश में लाखों दर्शकों को अपने चैनल से जोड़ा है. आज उनके चैनल पर 14.5 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं और उन्होंने 2,300 से अधिक वीडियो पोस्ट किए हैं. सरल भाषा और आसान विधियों से खाना बनाना सिखाने के कारण उनके वीडियो हर आयु वर्ग के लोगों में लोकप्रिय हैं. उनके वीडियो में स्नैक्स से लेकर मिठाई और रोजमर्रा के खाने तक की रेसिपीज़ शामिल हैं, जो आसानी से उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके बनती हैं.
सबसे अमीर महिला यूट्यूबर
निशा मधुलिका के चैनल को भारत में सबसे बड़े यूट्यूब फूड चैनलों में से एक माना जाता है. उनकी नेट वर्थ लगभग 43 करोड़ रुपये आंकी गई है, और वह हर महीने लाखों रुपये कमा रही हैं. निशा को 2017 में सोशल मीडिया समिट एंड अवॉर्ड्स में टॉप यूट्यूब कुकिंग कंटेंट क्रिएटर के खिताब से सम्मानित किया गया था, जो उनके योगदान और सफलता को दर्शाता है. कुछ खबरों के अनुसार, वह देश की सबसे अमीर महिला यूट्यूबर भी हैं.
दर्शकों से जुड़ाव जरूरी
उनका कहना है कि यूट्यूब पर सफल होने के लिए नियमितता और अपने दर्शकों के साथ जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है. उनका यह विश्वास कि “हर घर में स्वाद और आनंद लाने” का उनका मिशन, उन्हें आगे बढ़ाता है. निशा मधुलिका का यह सफर केवल एक चैनल या बिजनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने पैशन को फॉलो कर यूट्यूब जैसी डिजिटल माध्यमों में पहचान बनाना चाहती हैं. निशा का यूट्यूब चैनल केवल रेसिपी सिखाने का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच बन चुका है जहाँ लोग उनकी सादगी और सरलता के कारण जुड़ते हैं.
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