छत्तीसगढ़
संथाल आदिवासी, आरएसएस कार्यकर्ता ओडिशा के नए मुख्यमंत्री

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता, सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व अध्यापक, ग्राहम स्टेंस और उनके दो बच्चों की हत्या के लिए दोषी दारा सिंह की रिहाई के लिए चलाये गए अभियान के नेता.
ओडिशा के नए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का बायोडाटा दूर से चमकता है.
जब भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के 24 साल के सफर पर विराम लगाते हुए ओडिशा में पहली बार सरकार बनाई, सदन के नए नेता को लेकर कयास लगाए जा रहे थे. जल्द ही भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री पद के लिए मोहन चरण माझी के नाम की घोषणा की, और उसके बाद प्रभाती परिदा और कनक वर्धन सिंह देव को उप-मुख्यमंत्री चुना गया.
बुधवार को माझी द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद खबरें आने लगीं कि उन्होंने
की मांग के लिए सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके का समर्थन किया था. दारा सिंह को 1999 में ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बच्चों की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था. स्टेंस कुष्ठरोगियों के लिए एक संस्थान चलाते थे.
कट्टर सांप्रदायिक बयानों के लिए जाने वाले चव्हाणके दारा सिंह को रिहा कराने के लिए अभियान का नेतृत्व कर रहे थे. सितंबर 2022 में चव्हाणके को क्योंझर जेल में सिंह से मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने, मोहन चरण माझी और अन्य भाजपा नेताओं ने जेल अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए धरना दिया था.
संथाल आदिवासी, संघ के नेता
क्योंझर जिले के रायकला गांव में जन्मे माझी के पिता सुरक्षा गार्ड थे. माझी ओडिशा के तीसरे आदिवासी मुख्यमंत्री हैं. उनसे पहले कांग्रेस के गिरिधर गमांग और हेमानंदा बिस्वाल मुख्यमंत्री पद पर आदिवासी समुदाय का नेतृत्व कर चुके हैं.
माझी संथाल जनजाति से आते हैं. संथाल भारत के सबसे बड़े आदिवासी समुदायों में से एक है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी संथाल हैं. वह क्योंझर के सीमावर्ती मयूरभंज जिले की निवासी हैं. ये दोनों जिले मिलकर राज्य का अत्यंत विस्तृत आदिवासी भूगोल रचते हैं.
माझी ने कई दशक पहले आरएसएस की सदस्यता ले ली थी. उन्होंने राजधानी भुवनेश्वर से 300 किलोमीटर दूर क्योंझर जिले के चंपुआ नगर स्थित चंद्र शेखर कॉलेज से साल 1993 में बीए की डिग्री प्राप्त करने के बाद मशहूर ढेंकनाल लॉ कॉलेज से विधि की पढ़ाई की. साधारण परिवार से आने वाले माझी ने क्योंझर जिले के झुमपुरा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यापन भी किया है. सरस्वती शिशु मंदिर आरएसएस द्वारा संचालित स्कूलों का नेटवर्क है.
माझी ने अपने राजनितिक जीवन की शुरुआत ग्राम पंचायत के चुनावों से की. माझी 1997 से 2000 के बीच रायकला ग्राम पंचायत के सरपंच थे.
उन्होंने भाजपा के आदिवासी मोर्चा के राज्य सचिव के रूप में भी काम किया है.
साल 2000 में वह पहली बार क्योंझर विधानसभा सीट से विधायक चुनकर गए. 2004 के चुनावों में उन्होंने फिर जीत हासिल की. हालांकि भाजपा और बीजू जनता दल (बीजद) गठबंधन टूटने के बाद वह साल 2009 और 2014 में चुनाव हार गए. साल 2019 में उन्होंने फिर से जीत हासिल की.
2024 के चुनाव में वे बीजद की मीनू माझी को 11500 से अधिक वोटों से हराकर क्योंझर विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक चुने गए.
साल 2019 से लेकर साल 2024 तक माझी ने विधानसभा में भाजपा के सचेतक प्रमुख(चीफ ऑफ ह्विप) के रूप में संभवतः सबसे अधिक चर्चाओं में भाग लिया, चाहे वह स्थगन प्रस्ताव हो या शून्यकाल. इस कार्यकाल के दौरान माझी ने सात निजी विधेयक पेश किए थे.
मोहन माझी क्यों भाजपा की पसंद बने
स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक, पड़ोसी राज्यों में आदिवासी वोट को साधने के लिए भाजपा ने माझी को चुना है. लोकसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा का प्रदर्शन पिछले बार के मुकाबले निराशाजनक रहा है, इसलिए वह विधानसभा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. उनके चुने जाने का एक अन्य कारण आरएसएस की पृष्ठभूमि भी है.
वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर ने द वायर को बताया कि भाजपा अभी तक आदिवासी वोट को साध नहीं पाई है, इसलिए उन्होंने एक आदिवासी चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया.
छत्तीसगढ़
केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…
बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.
ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.
इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.
जा सकती थी नवजात शिशु की जान
डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,
सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.
परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.
पहली बार आया अनोखा केस
सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.
छत्तीसगढ़
साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार
इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कैरियर
कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा
Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।
शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।
बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।
लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार
इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट
पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।
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