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जिन्होंने बांग्लादेश को आजादी दिलवाई, आज उन्हीं की बेरहमी से तोड़ी गई मूर्ति

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Bangladesh Protest: बांग्लादेश में हिंसा और विरोध प्रधर्शन के बीच शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। शेख हसीना के पीएम पद इस्तीफा देने के बाद हजारों प्रदर्शकारियों को जश्न मनाते हुए देखा गया है।

इसी बीच एक ऐसी वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया।

असल में ढाका के गणभवन में कुछ प्रदर्शकारी शेख हसीना के दिवगंत पिता शेख मुजीबुर रहमान (Sheikh Mujibur Rahman) की मूर्ति पर भी चढ़ गए और मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ये वही शेख मुजीबुर रहमान हैं, जिन्होंने बांग्लादेश की आजादी में बड़ी भूमिका निभाई है। शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री भी थे।

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रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास गणभवन में शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति को प्रदर्शकारी तोड़ रहे हैं। मुजीबुर रहमान की याद में बने एक संग्रहालय में भी प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी है।

मुजीबुर रहमान की याद में बने एक संग्रहालय में भी प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी है। बांग्लादेश के प्रदर्शनकारियों ने सद्दाम हुसैन की प्रतिमा को 2003 में इराक में गिराए जाने की याद दिला दी है।

Who was Sheikh Mujibur Rahman: कौन थे शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान

शेख मुजीबुर रहमान 1972 में बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री बने थे। शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति भी थे। शेख मुजीब के नेतृत्व में बांग्लादेश ने साल 1971 में पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई लड़ी थी।
शेख मुजीबुर रहमान शेख हसीना के पिता हैं। शेख मुजीबुर रहमान को बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे प्रमुख नेता माना जाता है।
मुजीबुर रहमान को बंगलादेश का जनक भी कहा जाता है। वे अवामी लीग के अध्यक्ष थे। मुजीबुर रहमान को ‘बंगबंधु’ की पदवी से सम्मानित किया गया था।
बांग्लादेश की मुक्ति के तीन साल के भीतर 1975 में सैनिक तख्तापलट के द्वारा उनकी हत्या कर दी गई। उनके साथ-साथ उनकी पत्नी और तीना बेटों की भी हत्या कर दी गई थी। शेख हसीना और उनकी छोटी बहन इसलिए बच गई थीं क्योंकि वह उस वक्त जर्मनी में थीं।

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ईरान ने चीन के दो जहाजों को पार नहीं करने दिया होर्मुज! बीच समंदर से लेना पड़ा यू-टर्न

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से चीन की सरकारी कंपनी के दो बड़े कंटेनर जहाजों को वापस लौटा दिया है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच अपने करीबी मित्रों को होर्मुज पार करने की छूट दी है. ऐसे में चीनी जहाजों को रोकना हैरान करने वाला है.

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Iran Israel war: अमेरिका और इजरायल से चल रही जंग के बीच ईरान को रूस और चीन से काफी समर्थन मिल रहा है. दोनों देश अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, लेकिन ईरान की मदद कर रहे हैं. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी चीन के लिए पूरी तरह खोल रखा है लेकिन अब ईरान ने एक ऐसा काम कर दिया है जिससे चीन नाराज हो सकता है. ईरान ने चीन की सरकारी कंपनी COSCO के दो बड़े कंटेनर जहाजों को होर्मुज से वापस लौटा दिया है.

ईरान ने अपने करीबी दोस्त के जहाजों को होर्मुज पार करने से ही रोक दिया जिसके बाद दोनों कंटेनरों को यू-टर्न लेकर वापस आना पड़ा है. दरअसल, चीनी कंपनी ने युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी देशों के डेस्टिनेशन के लिए अपनी बुकिंग बंद कर रखी थी लेकिन फिर बुधवार को कंपनी ने घोषणा की कि वो खाड़ी देशों के लिए बुकिंग शुरू कर रही है

ईरान ने होर्मुज से लौटा दिया, चीन के जहाजों ने लिया यू-टर्न

जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली मरीन ट्रैफिक के डेटा के अनुसार, कंपनी के दो अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल CSCL Indian Ocean और CSCL Arctic Ocean ने होर्मुज पार करने की कोशिश की लेकिन फिर दोनों ने यू-टर्न लिया और वापस आ गए.

मरीन ट्रैफिक का कहना है कि जहाजों का वापस आना संकेत है कि चीनी जहाजों को होर्मुज में सुरक्षित रास्ते की गारंटी नहीं मिल पा रही थी. संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है कि किसी बड़े कंटेनर शिपिंग ऑपरेटर के जहाजों ने होर्मुज पार करने की कोशिश की हो.

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दोनों जहाज COSCO के ‘ओशन अलायंस’ नेटवर्क का हिस्सा हैं जो मध्य पूर्व को सुदूर पूर्व से जोड़ता है. चीनी कंपनी COSCO फिलहाल क्षमता के आधार पर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी है.

एनर्जी मार्केट इंटेलिजेंस फर्म केप्लर ने भी इसकी पुष्टि की है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि चीनी कंपनी के दोनों कंटेनर जहाज कहां जा रहे थे.

‘ईरान की सेना ने कहा- तीन कंटेनर लौटाए हैं’

ईरान की सेना के एलिट फोर्स रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को वापस लौटा दिया. उन्होंने यह भी कहा कि यह रास्ता उन जहाजों के लिए बंद है जो अमेरिका और जायोनी (इजरायली) शासन या उनके सहयोगियों से जुड़े हुए हैं या उनके बंदरगाहों के लिए आ-जा रहे हैं.

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपनी सेपाह न्यूज वेबसाइट पर कहा, ‘आज सुबह भ्रष्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस झूठे दावे के बाद कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है, अलग-अलग देशों के तीन कंटेनर जहाजों को IRGC नेवी की चेतावनी के बाद वापस लौटा दिया गया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जायोनी-अमेरिकी दुश्मनों के सहयोगियों और समर्थकों से जुड़े मूल बंदरगाहों से आने-जाने वाले किसी भी जहाज की आवाजाही, किसी भी डेस्टिनेशन और किसी भी रास्ते से, प्रतिबंधित है.’

समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने मध्य पूर्व के आम नागरिकों से भी अपील की कि वो अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास के इलाकों से दूर रहें. यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि एक महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत ‘अच्छी तरह चल रही है.’

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ट्रंप ने बढ़ाया ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले का अल्टीमेटम

इस बीच ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले करने के अपने अल्टीमेटम को भी फिर से बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया है. उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है.

हालांकि, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वो अपनी शर्तों पर ही संघर्ष खत्म करना चाहता है और इजरायल व खाड़ी क्षेत्र में अपने जवाबी हमलों को जारी रखेगा.

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत के बीच ईरान की ओर से अमेरिका को ‘तोहफा’ दिया गया है और वो ये कि उसने होर्मुज स्ट्रेट से 10 तेल टैंकरों को गुजरने की इजाजत दी है.

ईरान की सेना ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिका और इजरायल आम लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हम सलाह देते हैं कि आप तुरंत उन जगहों को छोड़ दें जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, ताकि आपको कोई नुकसान न हो.’

ईरान की सेना ने क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों को ठहराने वाले होटलों को निशाना बनाने की धमकी दी थी. इसी बीच कुवैत ने कहा कि उसके मुख्य वाणिज्यिक बंदरगाह को तड़के ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है.

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रूस के कच्चे तेल निर्यात को भारी नुकसान! होर्मुज के बाद भारत के लिए एक और झटका

यूक्रेन के ड्रोन हमलों और टैंकर जब्ती के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता लगभग 40% घट गई है. ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल सप्लाई बाधित होने के बाद रूस भारत की रिफाइनरियों के लिए मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है. ऐसे में अब रूस की निर्यात क्षमता में आई यह गिरावट वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है.

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Iran isreal war: ईरान जंग के बीच खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बाधित हुई है और ऐसे में रूस का तेल भारत की रिफाइनरियों के लिए लाइफलाइन बना हुआ है. लेकिन अब इस लाइफलाइन पर भी संकट के बादल छाते दिख रहे हैं. यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस के तेल और गैस निर्यात के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है. यह नुकसान इतना बड़ा है कि रूस की तेल निर्यात क्षमता का कम से कम 40% हिस्सा ठप हो गया है. यह रुकावट रूस के आधुनिक इतिहास में तेल सप्लाई की सबसे गंभीर रुकावट मानी जा रही है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार आंकड़ों पर आधारित कैलकुलेशन के मुताबिक, यूक्रेन के ड्रोन हमलों, रूस की एक बड़ी पाइपलाइन पर हमले और टैंकरों की जब्ती के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता का कम से कम 40% हिस्सा ठप हो गया है.

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल निर्यातक रूस को यह झटका ऐसे समय लगा है जब ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं. रूस की तेल उत्पादन क्षमता उसकी आय का प्रमुख स्रोत है.

यूक्रेन ने बढ़ाए रूस के तेल गैस निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले

इस महीने यूक्रेन ने रूस के तेल और ईंधन निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं. उसने रूस के पश्चिमी क्षेत्र के तीन प्रमुख तेल निर्यात बंदरगाहों- ब्लैक सी में नोवोरोसिस्क, बाल्टिक सागर में प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा को निशाना बनाया है.

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रॉयटर्स के अनुसार, बुधवार तक हालिया हमलों के बाद रूस की कच्चे तेल की निर्यात क्षमता का करीब 40% यानी लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन प्रभावित हो गया है. इसमें प्रिमोर्स्क, उस्त-लुगा और ड्रुज्बा पाइपलाइन भी शामिल हैं, जो यूक्रेन के रास्ते हंगरी और स्लोवाकिया तक जाती है.

यूक्रेन ने पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों और रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया है. उसका कहना है कि वो रूस की तेल और गैस से होने वाली आय को कम करना चाहता है. रूस को तेल गैस निर्यात से देश के बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मिलता है. यूक्रेन का कहना है कि वो तेल-गैस से होने वाली आय को कम कर रूस की सैन्य ताकत कमजोर करना चाहता है.

वहीं रूस ने इन हमलों को आतंकवादी कार्रवाई बताया है और अपने 11 टाइम जोन में सुरक्षा कड़ी कर दी है.

बंदरगाह, पाइपलाइन और टैंकर प्रभावित, भारत पर क्या होगा असर?

यूक्रेन का कहना है कि जनवरी के अंत में ड्रुज्बा पाइपलाइन का एक हिस्सा रूसी हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ, जिसके बाद स्लोवाकिया और हंगरी ने सप्लाई बहाल करने की मांग की.

7 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाला नोवोरोसिस्क तेल टर्मिनल इस महीने की शुरुआत में हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद प्रभावित हुआ है और इस टर्मिनल से काफी कम तेल लोड हो रहा है.

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इसके अलावा, यूरोप में रूस से जुड़े टैंकरों की लगातार जब्ती की जा रही है जिससे मुरमान्स्क बंदरगाह से निकलने वाले आर्कटिक तेल के लगभग 3 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात में रुकावट आई है.

पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस को भारत, चीन जैसे एशियाई बाजारों की ओर रुख करना पड़ रहा है, हालांकि वहां भी रूस की क्षमता सीमित है.

रूस चीन को पाइपलाइन के जरिए बिना रुकावट तेल सप्लाई जारी रखे हुए है, जिसमें स्कोवोरोडिनो-मोहे, अतासु-अलाशांकोउ रूट और कोजमिनो बंदरगाह से समुद्री मार्ग शामिल हैं. इन तीनों के जरिए कुल करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है.

इसके अलावा, रूस अपने सखालिन प्रोजेक्ट्स से भी करीब 2.5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात कर रहा है और पड़ोसी बेलारूस की रिफाइनरियों को लगभग 3 लाख बैरल प्रतिदिन तेल की आपूर्ति कर रहा है.

भारत की बात करें तो, रूस का कच्चा तेल समुद्री रास्तों के जरिए बड़े कार्गो में लोड होकर भारत पहुंचता है. ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के युद्ध की वजह से सऊदी, यूएई, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से तेल सप्लाई में रुकावट आई है.

इस रुकावट के बीच भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और रूस एक बार फिर से भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है. ऐसे में रूसी तेल निर्यात में आई भारी कमी भारत पर असर डाल सकती है.

 

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वंदे भारत ट्रेन में परोसा खराब खाना, कंपनी पर लगा 50 लाख का जुर्माना, IRCTC पर भी फाइन

पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में खानेखाखा की खराब गुणवत्ता की शिकायत पर भारतीय रेलवे ने IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. साथ ही संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख का जुर्माना लगाकर उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आदेश दिए गए हैं. रेलवे ने यात्री सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है.

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भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस में खाने की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. रेलवे ने अपनी ही कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई पटना से टाटानगर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भोजन की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायत के बाद की गई है.

जानकारी के अनुसार, 15 मार्च 2026 को ट्रेन संख्या 21896 पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में एक यात्री ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत को रेलवे ने गंभीरता से लिया और जांच के बाद कार्रवाई की गई. रेलवे ने IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. साथ ही उस कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं.

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वंदे भारत में खाने की गुणवत्ता पर उठे सवाल

रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही या मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारतीय रेलवे अपने विशाल नेटवर्क के जरिए हर दिन लाखों यात्रियों को सेवाएं प्रदान करता है. IRCTC के माध्यम से प्रतिदिन 15 लाख से अधिक यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है. यह दुनिया के सबसे बड़े ऑनबोर्ड फूड ऑपरेशनों में से एक माना जाता है.

रेलवे का कहना है कि इस तरह के बड़े नेटवर्क में गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसलिए जब भी किसी तरह की शिकायत सामने आती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. इस घटना के बाद रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. खाने की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.

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खराब सेवा पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आदेश

यह कार्रवाई उन सभी सेवा प्रदाताओं के लिए भी एक संदेश है कि यात्रियों को बेहतर सेवा देना उनकी जिम्मेदारी है. रेलवे ने कहा है कि आगे भी इस तरह की शिकायतों पर नजर रखी जाएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

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