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Maharashtra चुनाव: इन 49 सीटों पर कांटे की टक्कर, उद्धव और शिंदे में कौन किस पर रहेगा भारी?

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Maharashtra Assembly Election 2024

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। प्रदेश में 20 नवंबर को मतदान होगा और 23 नवंबर को नतीजों का ऐलान किया जाएगा। इस बार की चुनावी जंग महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच होने जा रही है, जहाँ दोनों गठबंधनों के नेता एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।

चुनावी स्थिति
शिवसेना के दो धड़ों के बीच भी मुकाबला देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला गुट और एकनाथ शिंदे का गुट दोनों ही खुद को असली शिवसेना बताकर लोगों से वोट मांग रहे हैं। खासकर 49 सीटों पर यह कांटे की टक्कर देखी जा रही है, जिनमें 19 सीटें मुंबई के मेट्रोपोलिटन इलाकों में आती हैं और 12 सीटें शहर की हैं।

2022 में शिवसेना का विभाजन
जून 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद, एकनाथ शिंदे ने कई विधायकों के साथ एनडीए में शामिल होकर मुख्यमंत्री बनने में सफलता प्राप्त की थी। वहीं, उद्धव ठाकरे और कुछ विधायक महा विकास अघाड़ी में बने रहे। अब कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर उद्धव सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।

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उद्धव ठाकरे पर अपने पिता बालासाहेब ठाकरे की विरासत को बचाने का दबाव भी है। शिंदे का आरोप है कि उद्धव ने कांग्रेस के साथ जाकर अपने पिता के विचारों को धोखा दिया है। इस चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे अपना समर्थन देती है।

चुनावी रणनीतियाँ
उद्धव ठाकरे: उद्धव ने उन 40 सीटों पर जीतने की रणनीति बनाई है, जहां से विधायक जीत के बाद शिंदे के साथ चले गए थे। उनके लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने गढ़ को सुरक्षित रखें।

एकनाथ शिंदे: शिंदे का दावा है कि यदि महायुति की जीत होती है, तो मुख्यमंत्री वे ही होंगे। उन्हें अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ाने और पिछली जीत को दोहराने की चुनौती का सामना करना होगा।

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प्रमुख मुकाबले
ठाणे की कोपरी पांचपखाड़ी सीट: यहाँ शिंदे को कड़ी टक्कर मिल रही है, जहाँ उद्धव गुट ने आनंद दिघे के भतीजे केदार को मैदान में उतारा है।
वर्ली सीट: उद्धव ने यहाँ अपने बेटे आदित्य को चुनावी मैदान में उतारा है, जो मिलिंद देवड़ा से मुकाबला कर रहे हैं।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में यह 49 सीटें न केवल उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इन सीटों पर जीत या हार दोनों ही नेताओं के भविष्य का निर्धारण करेगी। सियासी दांव-पेंच और जनता की सोच इस बार के चुनाव में निर्णायक साबित होगी।

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BRICS Summit 2026: भारत आएंगे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, सितंबर में नई दिल्ली की यात्रा

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ईरानी सूत्रों के मुताबिक ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन आगामी BRICS Summit 2026 में हिस्सा लेने के लिए सितंबर में भारत की यात्रा कर सकते हैं। इस दौरान वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

भारत की मेजबानी में होगा 18वां BRICS Summit


भारत ने 2026 की शुरुआत में ब्रिक्स की अध्यक्षता ब्राजील से संभाली थी। इस वर्ष शिखर सम्मेलन की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखी गई है। पेजेश्कियन की प्रस्तावित भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत पहुंचे थे अरागची


जून 2026 में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत पहुंचे थे। बैठक के बाद उन्होंने नई दिल्ली की कूटनीतिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा था कि भारत पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अरागची ने कहा था कि ईरान मौजूदा संकट का सैन्य समाधान नहीं देखता और बातचीत के जरिए समाधान को ही व्यावहारिक रास्ता मानता है।

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स्वतंत्रता दिवस पर CM साय रायपुर में करेंगे ध्वजारोहण, शहर से लेकर गांव तक होंगे राष्ट्रभक्ति से जुड़े आयोजन

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छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 के आयोजन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह को गरिमामय, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण मनाने के लिए राज्य से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शासकीय भवनों एवं ऐतिहासिक स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। राजधानी रायपुर में मुख्य समारोह स्थानीय पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। समारोह का शुभारंभ प्रातः 9 बजे होगा। मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ध्वजारोहण कर परेड की सलामी लेंगे। साथ ही प्रदेश की जनता के नाम संदेश का वाचन होगा। समारोह स्थल पर देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने के लिए तिरंगे गुब्बारे भी छोड़े जाएंगे।

जिला मुख्यालयों में निर्धारित अतिथि करेंगे ध्वजारोहण
जिला मुख्यालय स्तर पर शासन की ओर से निर्धारित अतिथियों द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा और परेड की सलामी ली जाएगी। इसके पश्चात राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया जाएगा।

ग्राम पंचायत स्तर तक होंगे राष्ट्रभक्ति से जुड़े आयोजन
शासन ने जनपद पंचायत एवं तहसील स्तर पर भी स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जनपद पंचायत मुख्यालय में जनपद पंचायत अध्यक्ष द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। जिन नगर पालिका अथवा नगर पंचायतों का मुख्यालय विकासखण्ड मुख्यालय पर नहीं है, वहां नगर पालिका अथवा नगर पंचायत के अध्यक्ष द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। इसी तरह पंचायत मुख्यालयों एवं बड़े ग्रामों में सरपंच और गांव के मुखिया द्वारा ध्वजारोहण कर ग्रामीणों के साथ सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गान एवं वंदे मातरम् का गायन किया जाएगा। छुट्टियांव मौसमी आयोजन

रात में रोशन होंगे शासकीय एवं ऐतिहासिक भवन
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या एवं 15 अगस्त की रात्रि में प्रदेश के सभी शासकीय एवं सार्वजनिक भवनों तथा राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों पर रोशनी की जाएगी। राज्य एवं जिला स्तर पर ध्वजारोहण समारोह प्रातः 9 बजे से प्रारंभ किए जाएंगे। विभागों एवं कार्यालयों के प्रमुखों को अपने कार्यालयों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एकत्रित कर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्कूलों में ध्वजारोहण के साथ सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियां
शासन ने सभी शिक्षण संस्थानों में भी स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों में ध्वजारोहण के साथ सांस्कृतिक, साहित्यिक, मनोरंजन एवं खेल-कूद से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यालयों द्वारा वृक्षारोपण जैसे रचनात्मक कार्यक्रम भी किए जाएंगे। शिक्षण संस्थानों को अपने क्षेत्र में प्रातःकाल ‘प्रभात फेरी’ आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ध्वनि-विस्तारक यंत्र यानी लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति जिला कलेक्टर द्वारा प्रदान की जाएगी। छुट्टियांव मौसमी आयोजन

स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के परिवारों का होगा सम्मान
जिला कलेक्टर द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा नक्सली हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिवारों को जिला स्तर पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाएगा और सम्मानित किया जाएगा।

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हरेली तिहार : माटी पूजन, कृषि औजारों की पूजा और गेड़ी की परंपरा का पर्व

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छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं।

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कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं के साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।

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