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ट्रंप की एक धमकी… और ईरान के इन ब्रिज और पावर प्लांट्स पर तबाही का है खतरा, अगले 24 घंटे भारी

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने के लिए कहा है. अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाएगा.

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World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने के लिए कहा है. अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाएगा.

वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका ‘भारी तबाही’ मचाएगा. ट्रंप इससे पहले ईरान को स्टोन एज में पहुंचाने की धमकी दे चुके हैं.

वहीं अब 4 अप्रैल को जारी 48 घंटे का “फाइनल अल्टीमेटम” इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा.

इसमें ट्रंप ने साफ कहा है कि वह ईरान के पावर प्लांट्स और बड़े-बड़े पुलों को निशाना बनाएंगे. इससे कई शहरों का आपसी कनेक्शन कट जाएगा और ईरान अंदरूनी तौर पर भी अलग-थलग हो जाएगा.

ट्रंप की इन धमकियों के बाद सवाल उठता है कि ईरान में कितने पावर प्लांट और कितने अहम पुल हैं, जिन पर अमेरिकी सेना निशाना साध सकती है? क्योंकि ट्रंप की रणनीति अब ये है कि वो ईरान के इन्फ्रास्ट्रक्चर को अब पूरी तरह तहस-नहस करने की ओर बढ़ रहे हैं.

तकरीबन 110 गैस प्लांट हैं ईरान में

इस लिहाज से देखें तो ईरान में सोलर, हाइड्रो (जल), वायु, कोयला और न्यूक्लियर प्लांट हैं. इनमें गैस पर आधारित पॉवर प्लांट्स अधिक हैं. OpenInfraMap के डेटा की मानें तो ईरान में करीब 110 गैस प्लांट हैं जिनमें से कुछ हाइब्रिड हैं.

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बुशहर परमाणु पॉवर प्लांट, बुशेहर काउंटी, (ईरान) में है जो कि न्यूक्लियर साइट के तौर पर देखी जाती है. यह 1,000 मेगावाट (MW) की क्षमता वाला एक परमाणु ऊर्जा केंद्र है. इसका निर्माण 1970 के दशक में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन 1979 की क्रांति के बाद, इसे रूस की रोसाटॉम (Atomstroyexport) ने पूरा किया.

इसके अलावा उत्पादन के मामले में तीन सबसे बड़े प्लांट गैस से चलते हैं-

दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट- यह राजधानी तेहरान से लगभग 70 km दक्षिण-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,868 MW है.

शाहिद सलीमी- यह माजंदरान प्रांत में है कैस्पियन सागर के पास स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,215 MW है.

शाहिद रजाई- यह तेहरान शहर से लगभग 110 km उत्तर-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,043 MW है.

इसके अलावा और भी यूनिट्स हैं जो ईरान की ऊर्जा का प्रमुख सोर्स हैं

इनमें जहरोम पॉवर प्लांट, खानूज कंबांइड साइकिल पॉवर प्लांट, गिलान पॉवर प्लांट भी प्रमुख है.

जीवाश्म ईंधनों से बिजली बनाता है ईरान

ईरान अपनी ज्यादातर बिजली जीवाश्म ईंधनों से बनाता है. 2023 में ईरान ने न्यूक्लियर एनर्जी से 5,740 GWh बिजली बनाई.  थर्मल सेक्टर में रामिन अहवाज़ थर्मल पावर प्लांट (करीब 1900 मेगावाट) और दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट (लगभग 2800–3000 मेगावाट) सबसे बड़े संयंत्रों में शामिल हैं. जहरोम पावर प्लांट (करीब 1400 मेगावाट) और गनावेह पावर प्लांट (लगभग 484 मेगावाट) भी गैस बेस्ड प्रमुख इकाइयां हैं.

जलविद्युत क्षेत्र में करुन-3 हाइड्रोपावर प्लांट, मस्जिद-ए-सुलेमान हाइड्रोपावर प्लांट और शहीद अब्बासपुर हाइड्रोपावर प्लांट जैसे बड़े बांध आधारित संयंत्र शामिल हैं, जिनकी क्षमता लगभग 2000 मेगावाट के आसपास है. इसके अलावा केर्मान पावर प्लांट और शाहिद राजाई पावर प्लांट जैसे थर्मल संयंत्र भी सैकड़ों मेगावाट क्षमता के साथ नेशनल ग्रिड को मजबूती देते हैं.

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कुल मिलाकर ईरान की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 90 गीगावाट के आसपास है, जिसमें गैस आधारित संयंत्रों का दबदबा है, जबकि जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा सीमित लेकिन रणनीतिक भूमिका निभाते हैं.

ईरान में कितने ब्रिज?

अब आते हैं ईरान के पुलों पर. ईरान में कई बड़े और ऐतिहासिक ब्रिज हैं, जो न सिर्फ शहरों के बीच में कनेक्टिविटी बढ़ाते हैं, बल्कि उनकी भूमिका ईरान की विरासत बचाए रखने में भी है.

करुण-4 आर्च ब्रिज (Karun 4 Arch Bridge): करुण नदी पर स्थित, यह ईरान के सबसे खास आर्च पुलों में से एक है.

करज ब्रिज (Karaj bridge): 2026 में हुए संघर्षों के दौरान चर्चा में आया यह एक प्रमुख ब्रिज है

मेशगिन शहर सस्पेंशन ब्रिज (Meshgin Shahr Suspension Bridge): अर्दबील में स्थित, यह मध्य पूर्व का सबसे लंबा सस्पेंशन पुल है.

लाली ब्रिज (Lali Bridge): ऊपरी गोटवंद बांध के पास स्थित.

खाजू ब्रिज (Khaju Bridge): इस्फ़हान में ज़ायंडेह नदी पर बना एक ऐतिहासिक पुल, जो 1650 के आसपास बना था.

बता दें कि US और इज़रायली सेनाओं ने हाल ही में अल्बोर्ज़ प्रांत के करज के B1 पुल पर दो हमले किए. इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई और पुल पूरी तरह से तबाह हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि हमलों के बाद पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया. करीब एक हजार मीटर लंबा B1 पुल, ईरान के अहम मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता रहा है.

इसे तेहरान और करज के बीच भीड़ कम करने और देश के उत्तरी क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए बनाया गया था. ट्रंप ने कहा था. ‘ईरान का सबसे बड़ा पुल ढह गया है, अब इसका दोबारा इस्तेमाल कभी नहीं हो पाएगा. अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है.’

 

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‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

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रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना

छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।

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सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज

केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:

“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम

आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”

‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’

दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।

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कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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देश

पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।

  • महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
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साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।

  • पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल

पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

  • ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
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वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।

  • संगठन और रणनीति का मिला लाभ

बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।

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