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ट्रंप की एक धमकी… और ईरान के इन ब्रिज और पावर प्लांट्स पर तबाही का है खतरा, अगले 24 घंटे भारी
World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने के लिए कहा है. अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाएगा.

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने के लिए कहा है. अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाएगा.
वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका ‘भारी तबाही’ मचाएगा. ट्रंप इससे पहले ईरान को स्टोन एज में पहुंचाने की धमकी दे चुके हैं.
वहीं अब 4 अप्रैल को जारी 48 घंटे का “फाइनल अल्टीमेटम” इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा.
इसमें ट्रंप ने साफ कहा है कि वह ईरान के पावर प्लांट्स और बड़े-बड़े पुलों को निशाना बनाएंगे. इससे कई शहरों का आपसी कनेक्शन कट जाएगा और ईरान अंदरूनी तौर पर भी अलग-थलग हो जाएगा.
ट्रंप की इन धमकियों के बाद सवाल उठता है कि ईरान में कितने पावर प्लांट और कितने अहम पुल हैं, जिन पर अमेरिकी सेना निशाना साध सकती है? क्योंकि ट्रंप की रणनीति अब ये है कि वो ईरान के इन्फ्रास्ट्रक्चर को अब पूरी तरह तहस-नहस करने की ओर बढ़ रहे हैं.
तकरीबन 110 गैस प्लांट हैं ईरान में
इस लिहाज से देखें तो ईरान में सोलर, हाइड्रो (जल), वायु, कोयला और न्यूक्लियर प्लांट हैं. इनमें गैस पर आधारित पॉवर प्लांट्स अधिक हैं. OpenInfraMap के डेटा की मानें तो ईरान में करीब 110 गैस प्लांट हैं जिनमें से कुछ हाइब्रिड हैं.
बुशहर परमाणु पॉवर प्लांट, बुशेहर काउंटी, (ईरान) में है जो कि न्यूक्लियर साइट के तौर पर देखी जाती है. यह 1,000 मेगावाट (MW) की क्षमता वाला एक परमाणु ऊर्जा केंद्र है. इसका निर्माण 1970 के दशक में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन 1979 की क्रांति के बाद, इसे रूस की रोसाटॉम (Atomstroyexport) ने पूरा किया.
इसके अलावा उत्पादन के मामले में तीन सबसे बड़े प्लांट गैस से चलते हैं-
दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट- यह राजधानी तेहरान से लगभग 70 km दक्षिण-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,868 MW है.
शाहिद सलीमी- यह माजंदरान प्रांत में है कैस्पियन सागर के पास स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,215 MW है.
शाहिद रजाई- यह तेहरान शहर से लगभग 110 km उत्तर-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,043 MW है.
इसके अलावा और भी यूनिट्स हैं जो ईरान की ऊर्जा का प्रमुख सोर्स हैं
इनमें जहरोम पॉवर प्लांट, खानूज कंबांइड साइकिल पॉवर प्लांट, गिलान पॉवर प्लांट भी प्रमुख है.
जीवाश्म ईंधनों से बिजली बनाता है ईरान
ईरान अपनी ज्यादातर बिजली जीवाश्म ईंधनों से बनाता है. 2023 में ईरान ने न्यूक्लियर एनर्जी से 5,740 GWh बिजली बनाई. थर्मल सेक्टर में रामिन अहवाज़ थर्मल पावर प्लांट (करीब 1900 मेगावाट) और दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट (लगभग 2800–3000 मेगावाट) सबसे बड़े संयंत्रों में शामिल हैं. जहरोम पावर प्लांट (करीब 1400 मेगावाट) और गनावेह पावर प्लांट (लगभग 484 मेगावाट) भी गैस बेस्ड प्रमुख इकाइयां हैं.
जलविद्युत क्षेत्र में करुन-3 हाइड्रोपावर प्लांट, मस्जिद-ए-सुलेमान हाइड्रोपावर प्लांट और शहीद अब्बासपुर हाइड्रोपावर प्लांट जैसे बड़े बांध आधारित संयंत्र शामिल हैं, जिनकी क्षमता लगभग 2000 मेगावाट के आसपास है. इसके अलावा केर्मान पावर प्लांट और शाहिद राजाई पावर प्लांट जैसे थर्मल संयंत्र भी सैकड़ों मेगावाट क्षमता के साथ नेशनल ग्रिड को मजबूती देते हैं.
कुल मिलाकर ईरान की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 90 गीगावाट के आसपास है, जिसमें गैस आधारित संयंत्रों का दबदबा है, जबकि जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा सीमित लेकिन रणनीतिक भूमिका निभाते हैं.
ईरान में कितने ब्रिज?
अब आते हैं ईरान के पुलों पर. ईरान में कई बड़े और ऐतिहासिक ब्रिज हैं, जो न सिर्फ शहरों के बीच में कनेक्टिविटी बढ़ाते हैं, बल्कि उनकी भूमिका ईरान की विरासत बचाए रखने में भी है.
करुण-4 आर्च ब्रिज (Karun 4 Arch Bridge): करुण नदी पर स्थित, यह ईरान के सबसे खास आर्च पुलों में से एक है.
करज ब्रिज (Karaj bridge): 2026 में हुए संघर्षों के दौरान चर्चा में आया यह एक प्रमुख ब्रिज है
मेशगिन शहर सस्पेंशन ब्रिज (Meshgin Shahr Suspension Bridge): अर्दबील में स्थित, यह मध्य पूर्व का सबसे लंबा सस्पेंशन पुल है.
लाली ब्रिज (Lali Bridge): ऊपरी गोटवंद बांध के पास स्थित.
खाजू ब्रिज (Khaju Bridge): इस्फ़हान में ज़ायंडेह नदी पर बना एक ऐतिहासिक पुल, जो 1650 के आसपास बना था.
बता दें कि US और इज़रायली सेनाओं ने हाल ही में अल्बोर्ज़ प्रांत के करज के B1 पुल पर दो हमले किए. इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई और पुल पूरी तरह से तबाह हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि हमलों के बाद पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया. करीब एक हजार मीटर लंबा B1 पुल, ईरान के अहम मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता रहा है.
इसे तेहरान और करज के बीच भीड़ कम करने और देश के उत्तरी क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए बनाया गया था. ट्रंप ने कहा था. ‘ईरान का सबसे बड़ा पुल ढह गया है, अब इसका दोबारा इस्तेमाल कभी नहीं हो पाएगा. अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है.’
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ईरान ने चीन के दो जहाजों को पार नहीं करने दिया होर्मुज! बीच समंदर से लेना पड़ा यू-टर्न
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से चीन की सरकारी कंपनी के दो बड़े कंटेनर जहाजों को वापस लौटा दिया है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच अपने करीबी मित्रों को होर्मुज पार करने की छूट दी है. ऐसे में चीनी जहाजों को रोकना हैरान करने वाला है.

Iran Israel war: अमेरिका और इजरायल से चल रही जंग के बीच ईरान को रूस और चीन से काफी समर्थन मिल रहा है. दोनों देश अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, लेकिन ईरान की मदद कर रहे हैं. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी चीन के लिए पूरी तरह खोल रखा है लेकिन अब ईरान ने एक ऐसा काम कर दिया है जिससे चीन नाराज हो सकता है. ईरान ने चीन की सरकारी कंपनी COSCO के दो बड़े कंटेनर जहाजों को होर्मुज से वापस लौटा दिया है.
ईरान ने अपने करीबी दोस्त के जहाजों को होर्मुज पार करने से ही रोक दिया जिसके बाद दोनों कंटेनरों को यू-टर्न लेकर वापस आना पड़ा है. दरअसल, चीनी कंपनी ने युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी देशों के डेस्टिनेशन के लिए अपनी बुकिंग बंद कर रखी थी लेकिन फिर बुधवार को कंपनी ने घोषणा की कि वो खाड़ी देशों के लिए बुकिंग शुरू कर रही है
ईरान ने होर्मुज से लौटा दिया, चीन के जहाजों ने लिया यू-टर्न
जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली मरीन ट्रैफिक के डेटा के अनुसार, कंपनी के दो अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल CSCL Indian Ocean और CSCL Arctic Ocean ने होर्मुज पार करने की कोशिश की लेकिन फिर दोनों ने यू-टर्न लिया और वापस आ गए.
मरीन ट्रैफिक का कहना है कि जहाजों का वापस आना संकेत है कि चीनी जहाजों को होर्मुज में सुरक्षित रास्ते की गारंटी नहीं मिल पा रही थी. संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है कि किसी बड़े कंटेनर शिपिंग ऑपरेटर के जहाजों ने होर्मुज पार करने की कोशिश की हो.
दोनों जहाज COSCO के ‘ओशन अलायंस’ नेटवर्क का हिस्सा हैं जो मध्य पूर्व को सुदूर पूर्व से जोड़ता है. चीनी कंपनी COSCO फिलहाल क्षमता के आधार पर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी है.
एनर्जी मार्केट इंटेलिजेंस फर्म केप्लर ने भी इसकी पुष्टि की है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि चीनी कंपनी के दोनों कंटेनर जहाज कहां जा रहे थे.
‘ईरान की सेना ने कहा- तीन कंटेनर लौटाए हैं’
ईरान की सेना के एलिट फोर्स रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को वापस लौटा दिया. उन्होंने यह भी कहा कि यह रास्ता उन जहाजों के लिए बंद है जो अमेरिका और जायोनी (इजरायली) शासन या उनके सहयोगियों से जुड़े हुए हैं या उनके बंदरगाहों के लिए आ-जा रहे हैं.
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपनी सेपाह न्यूज वेबसाइट पर कहा, ‘आज सुबह भ्रष्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस झूठे दावे के बाद कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है, अलग-अलग देशों के तीन कंटेनर जहाजों को IRGC नेवी की चेतावनी के बाद वापस लौटा दिया गया.’
उन्होंने आगे कहा, ‘जायोनी-अमेरिकी दुश्मनों के सहयोगियों और समर्थकों से जुड़े मूल बंदरगाहों से आने-जाने वाले किसी भी जहाज की आवाजाही, किसी भी डेस्टिनेशन और किसी भी रास्ते से, प्रतिबंधित है.’
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने मध्य पूर्व के आम नागरिकों से भी अपील की कि वो अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास के इलाकों से दूर रहें. यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि एक महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत ‘अच्छी तरह चल रही है.’
ट्रंप ने बढ़ाया ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले का अल्टीमेटम
इस बीच ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले करने के अपने अल्टीमेटम को भी फिर से बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया है. उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है.
हालांकि, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वो अपनी शर्तों पर ही संघर्ष खत्म करना चाहता है और इजरायल व खाड़ी क्षेत्र में अपने जवाबी हमलों को जारी रखेगा.
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत के बीच ईरान की ओर से अमेरिका को ‘तोहफा’ दिया गया है और वो ये कि उसने होर्मुज स्ट्रेट से 10 तेल टैंकरों को गुजरने की इजाजत दी है.
ईरान की सेना ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिका और इजरायल आम लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हम सलाह देते हैं कि आप तुरंत उन जगहों को छोड़ दें जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, ताकि आपको कोई नुकसान न हो.’
ईरान की सेना ने क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों को ठहराने वाले होटलों को निशाना बनाने की धमकी दी थी. इसी बीच कुवैत ने कहा कि उसके मुख्य वाणिज्यिक बंदरगाह को तड़के ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है.
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रूस के कच्चे तेल निर्यात को भारी नुकसान! होर्मुज के बाद भारत के लिए एक और झटका
यूक्रेन के ड्रोन हमलों और टैंकर जब्ती के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता लगभग 40% घट गई है. ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल सप्लाई बाधित होने के बाद रूस भारत की रिफाइनरियों के लिए मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है. ऐसे में अब रूस की निर्यात क्षमता में आई यह गिरावट वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है.

Iran isreal war: ईरान जंग के बीच खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बाधित हुई है और ऐसे में रूस का तेल भारत की रिफाइनरियों के लिए लाइफलाइन बना हुआ है. लेकिन अब इस लाइफलाइन पर भी संकट के बादल छाते दिख रहे हैं. यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस के तेल और गैस निर्यात के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है. यह नुकसान इतना बड़ा है कि रूस की तेल निर्यात क्षमता का कम से कम 40% हिस्सा ठप हो गया है. यह रुकावट रूस के आधुनिक इतिहास में तेल सप्लाई की सबसे गंभीर रुकावट मानी जा रही है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार आंकड़ों पर आधारित कैलकुलेशन के मुताबिक, यूक्रेन के ड्रोन हमलों, रूस की एक बड़ी पाइपलाइन पर हमले और टैंकरों की जब्ती के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता का कम से कम 40% हिस्सा ठप हो गया है.
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल निर्यातक रूस को यह झटका ऐसे समय लगा है जब ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं. रूस की तेल उत्पादन क्षमता उसकी आय का प्रमुख स्रोत है.
यूक्रेन ने बढ़ाए रूस के तेल गैस निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले
इस महीने यूक्रेन ने रूस के तेल और ईंधन निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं. उसने रूस के पश्चिमी क्षेत्र के तीन प्रमुख तेल निर्यात बंदरगाहों- ब्लैक सी में नोवोरोसिस्क, बाल्टिक सागर में प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा को निशाना बनाया है.
रॉयटर्स के अनुसार, बुधवार तक हालिया हमलों के बाद रूस की कच्चे तेल की निर्यात क्षमता का करीब 40% यानी लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन प्रभावित हो गया है. इसमें प्रिमोर्स्क, उस्त-लुगा और ड्रुज्बा पाइपलाइन भी शामिल हैं, जो यूक्रेन के रास्ते हंगरी और स्लोवाकिया तक जाती है.
यूक्रेन ने पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों और रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया है. उसका कहना है कि वो रूस की तेल और गैस से होने वाली आय को कम करना चाहता है. रूस को तेल गैस निर्यात से देश के बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मिलता है. यूक्रेन का कहना है कि वो तेल-गैस से होने वाली आय को कम कर रूस की सैन्य ताकत कमजोर करना चाहता है.
वहीं रूस ने इन हमलों को आतंकवादी कार्रवाई बताया है और अपने 11 टाइम जोन में सुरक्षा कड़ी कर दी है.
बंदरगाह, पाइपलाइन और टैंकर प्रभावित, भारत पर क्या होगा असर?
यूक्रेन का कहना है कि जनवरी के अंत में ड्रुज्बा पाइपलाइन का एक हिस्सा रूसी हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ, जिसके बाद स्लोवाकिया और हंगरी ने सप्लाई बहाल करने की मांग की.
7 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाला नोवोरोसिस्क तेल टर्मिनल इस महीने की शुरुआत में हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद प्रभावित हुआ है और इस टर्मिनल से काफी कम तेल लोड हो रहा है.
इसके अलावा, यूरोप में रूस से जुड़े टैंकरों की लगातार जब्ती की जा रही है जिससे मुरमान्स्क बंदरगाह से निकलने वाले आर्कटिक तेल के लगभग 3 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात में रुकावट आई है.
पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस को भारत, चीन जैसे एशियाई बाजारों की ओर रुख करना पड़ रहा है, हालांकि वहां भी रूस की क्षमता सीमित है.
रूस चीन को पाइपलाइन के जरिए बिना रुकावट तेल सप्लाई जारी रखे हुए है, जिसमें स्कोवोरोडिनो-मोहे, अतासु-अलाशांकोउ रूट और कोजमिनो बंदरगाह से समुद्री मार्ग शामिल हैं. इन तीनों के जरिए कुल करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है.
इसके अलावा, रूस अपने सखालिन प्रोजेक्ट्स से भी करीब 2.5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात कर रहा है और पड़ोसी बेलारूस की रिफाइनरियों को लगभग 3 लाख बैरल प्रतिदिन तेल की आपूर्ति कर रहा है.
भारत की बात करें तो, रूस का कच्चा तेल समुद्री रास्तों के जरिए बड़े कार्गो में लोड होकर भारत पहुंचता है. ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के युद्ध की वजह से सऊदी, यूएई, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से तेल सप्लाई में रुकावट आई है.
इस रुकावट के बीच भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और रूस एक बार फिर से भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है. ऐसे में रूसी तेल निर्यात में आई भारी कमी भारत पर असर डाल सकती है.
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वंदे भारत ट्रेन में परोसा खराब खाना, कंपनी पर लगा 50 लाख का जुर्माना, IRCTC पर भी फाइन
पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में खानेखाखा की खराब गुणवत्ता की शिकायत पर भारतीय रेलवे ने IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. साथ ही संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख का जुर्माना लगाकर उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आदेश दिए गए हैं. रेलवे ने यात्री सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है.

भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस में खाने की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. रेलवे ने अपनी ही कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई पटना से टाटानगर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भोजन की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायत के बाद की गई है.
जानकारी के अनुसार, 15 मार्च 2026 को ट्रेन संख्या 21896 पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में एक यात्री ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत को रेलवे ने गंभीरता से लिया और जांच के बाद कार्रवाई की गई. रेलवे ने IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. साथ ही उस कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं.
वंदे भारत में खाने की गुणवत्ता पर उठे सवाल
रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही या मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारतीय रेलवे अपने विशाल नेटवर्क के जरिए हर दिन लाखों यात्रियों को सेवाएं प्रदान करता है. IRCTC के माध्यम से प्रतिदिन 15 लाख से अधिक यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है. यह दुनिया के सबसे बड़े ऑनबोर्ड फूड ऑपरेशनों में से एक माना जाता है.
रेलवे का कहना है कि इस तरह के बड़े नेटवर्क में गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसलिए जब भी किसी तरह की शिकायत सामने आती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. इस घटना के बाद रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. खाने की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.
खराब सेवा पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आदेश
यह कार्रवाई उन सभी सेवा प्रदाताओं के लिए भी एक संदेश है कि यात्रियों को बेहतर सेवा देना उनकी जिम्मेदारी है. रेलवे ने कहा है कि आगे भी इस तरह की शिकायतों पर नजर रखी जाएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
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