छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ : होगा हर घर नल, मिलेगा शुद्ध जल, मिशन अमृत से बदलेगा कल

रायपुर| जल है तो जीवन है। जल है तो कल है। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना पहले हुआ करती थी। लेकिन यह तो बस एक ऐसा संदेश है जो हमें जल संरक्षण का महत्व बताने के दरम्यान इस्तेमाल में लाया जाता है। धरातल पर जल की उपलब्धता वर्तमान में और हमारे आने वाले कल के लिए कितना है और इस दिशा में हम क्या प्रयास कर रहे हैं ? शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं ? कुछ ऐसा सवाल शायद ही किसी के मन में आता होगा। बहरहाल शुद्ध पेयजल सभी नागरिकों की नितांत आवश्यकताओं में से एक है और इसे उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता भी है। वैसे तो छत्तीसगढ़ की सरकार पूरे प्रदेश के हर घर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने नल कनेक्शन की दिशा में कार्य कर रही है, मगर शहरी क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले निकायों में मिशन अमृत योजन के माध्यम से हर घर में निजी नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने समय का लक्ष्य लेकर चल रही है। लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर चल रही छत्तीसगढ़ की सरकार की कई बड़ी परियोजनाएं इस साल के अंत तक और आगामी वर्ष तक पूरी होने की संभावना है।
मिशन अमृत योजना सिर्फ सरकार के लिए ही एक बड़ी योजना नही है। यह एक ऐसी योजना भी है जिसमें ‘जल है तो कल है‘ का एक बेहतर भविष्य जुड़ा है। धरातल पर इस योजना का बेहतर क्रियान्वयन लोगों के घरों में नल कनेक्शन के जरिये शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में मददगार साबित तो होगी ही, साथ ही जल प्रदाय योजनाओं की संपूर्णता हेतु मिशन अमृत योजना का धरातल पर तेजी से अमल किया जा रहा है। मिशन अमृत योजना में 2011 की जनसंख्या अनुसार 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश के 9 नगरीय निकाय रायपुर, भिलाई, दुर्ग,राजनांदगांव, बिलासपुर, कोरबा,रायगढ़ एवं जगदलपुर जिनकी कुल आबादी शहरी आबादी का 54 प्रतिशत है को सम्मिलित किया गया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य समस्त आवासों में निजी नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए कुल 1838 करोड़ रुपए की जल प्रदाय योजना स्वीकृत है।
उच्च स्तरीय पानी टंकी और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य प्रगति पर
मिशन अमृत योजना के अंतर्गत लक्ष्य अनुसार 9 जलशोधन सयंत्र में से 5 का कार्य प्रगति पर है। 77 उच्च स्तरीय जलागार निर्माण कार्य में 56 प्रगति पर है। पेयजल वितरण हेतु पाइप लाइन विस्तार कार्य के अंतर्गत 3521 किलोमीटर लक्ष्य के विरुद्ध 2659 किमी प्रगति पर है। निजी नल संयोजन कार्य में 322613 नग में से 171664 नग प्रगति पर है।
कई बड़ी जल प्रदाय परियोजना का कार्य इस पूरी होने की संभावना
निकायों में हर घर नल कनेक्शन और हर घर पानी उपलब्ध कराने छत्तीसगढ़ की सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने हाल ही में समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को जलप्रदाय परियोजना को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए। जल प्रदाय परियोजना में कोरबा लागत राशि 211 करोड़ रुपए, भिलाई लागत राशि 221 करोड़ , अम्बिकापुर लागत राशि 100 करोड़, रायगढ़ लागत राशि 131 करोड़ का कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो गया है। रायपुर फेस 1 लागत राशि 156 करोड़, राजनांदगांव लागत राशि 199 करोड़ का 80 प्रतिशत से अधिक का कार्य पूरा हो चुका है। इन सभी परियोजनाओं को इसी साल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दुर्ग लागत राशि 162 करोड़, बिलासपुर 292 करोड़, रायपुर फेस 2 लागत राशि 270 करोड़, जगदलपुर लागत राशि 96 करोड़ रुपए की परियोजना का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। जगदलपुर परियोजना को छोड़कर अन्य सभी को फरवरी 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जलप्रदाय परियोजना के पूर्ण होने के साथ 3.22लाख लोगों को मिलेगा नल कनेक्शन
इस वर्ष के अंत तक और अगले साल माह फरवरी तक जल प्रदाय परियोजनाओं का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होते ही नल कनेक्शन देने और घरों में पानी पहुचाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाएगी। जलप्रदाय परियोजना से जुड़े कोरबा में 26000, भिलाई में 50580, रायपुर फेस 1 में 11526, अम्बिकापुर में 15161, राजनांदगांव में 34000, रायगढ़ में 26837, दुर्ग में 21517, बिलासपुर में 56251, रायपुर फेस 2 में 56409 और जगदलपुर में 24332 नल कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
जल आवर्धन योजना से 1.53 लाख घरों में मिलेगा नल कनेक्शन
नगरीय निकायों में जल आवर्धन योजना अंतर्गत जलप्रदाय परियोजना का कार्य भी प्रगति पर है। शिवपुरचर्चा, जशपुर नगर और नारायणपुर जल आवर्धन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस वर्ष के अंत तक महासमुंद, कवर्धा, बलरामपुर और दंतेवाड़ा का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। धमतरी,तिल्दा-नेवरा, खैरागढ़, मुंगेली, जांजगीर-नैला, अकलतरा,सक्ति, बैकुंठपुर कोंडागांव, सराईपाली, भाटापारा और दीपका जल आवर्धन योजना को वर्ष 2022 के अलग-अलग माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर 1 लाख 53 हजार 458 नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त 25 नगर पंचायतों में भी जल आवर्धन योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। इससे 45481 नल कनेक्शन प्रदाय किए जाएंगे।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
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कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है


















