बिलासपुर| विहिप की युवा टोली बजरंग दल की महत्वपूर्ण बैठक संघ कार्यालय में आरएसएस के आदरणीय प्रदेश सह प्रचारक नारायण नामदेव जी के मार्गदर्शन के साथ...
बिलासपुर|नगर पालिक निगम बिलासपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा तैयार किए गए सेंट्रल लाइब्रेरी के जरिए अंचल के युवा अपना सुनहरा भविष्य गढ़ रहें हैंतीन जनवरी को बिलासपुर प्रवास के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस सर्व सुविधायुक्त सेंट्रल लाइब्रेरी की सौगात दी थी। बिलासपुर संभाग समेत पूरे प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जाना जाता है, ऐसे में काफी समय से शहर में एक सर्व सुविधायुक्त लाइब्रेरी की कमी महसूस की जा रही थी।नगर पालिक निगम बिलासपुर द्वारा यह कमी पूरी कर दी गई है सेंट्रल लाइब्रेरी में बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा प्रदेश के पहले डिजिटल लाइब्रेरी की भी स्थापना की गई है। लाइब्रेरी में 680 पंजीकृत सदस्य है, जो इस सर्व सुविधायुक्त लाइब्रेरी में पठन-पाठन का कार्य कर रहें हैं।पांच हजार पुस्तके और 30 सिस्टम सेंट्रल लाइब्रेरी परिसर में पाठकों के पढ़ने के लिए अलग-अलग विषयों की पांच हजार पुस्तकें उपलब्ध है | जिसमें कला, विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कानून, मोटिवेशनल, मेडिकल, अध्यात्म, प्रतियोगी परीक्षाओं के स्टडी मटेरियल शामिल है। इसके अलावा साहित्य जगत, उपन्यास और ख्यातिलब्ध लेखकों की पुस्तकों का भी संग्रह रखा गया है। इसी तरह डिजिटल लाइब्रेरी में तीस कंप्यूटर सिस्टम इंस्टाल किया गया है जिसमें पांच हजार स्टडी मटेरियल उपलब्ध है। इसके जरिए लोग देश-दुनिया से जुड़ भी रहें है और डिजिटल तरीके से पढ़ाई भी हो रही है। पीएससी की तैयारी के लिए रायगढ़ से आकर बिलासपुर में कोचिंग कर रही छात्रा सुश्री मनीषा पटेल विगत मार्च माह से सेंट्रल लाईब्रेरी में प्रतिदिन 7-8 घण्टे बैठकर अपनी पढ़ाई कर रही हंै। यहां का शांत वातावरण, साफ सफाई और अनुशासन उसे बहुत पसंद है। उसने बताया कि कोविड संक्रमण चलते सार्वजनिक स्थलों पर जाने से लोग बच रहे है लेकिन सेंट्रल लाईबे्ररी में प्रोटोकाल का पालन कड़ाई से किया जा रहा है। जो सदस्य इसका उल्लंघन करता है उस पर अर्थदण्ड भी लगाया जाता है। इस व्यवस्था से लाईब्रेरी में संक्रमण का खतरा कम है। इसलिए वह प्रतिदिन बिना नागा के लाईब्रेरी का लाभ ले रही है। मेडिकल के छात्र डाॅ. रजत अग्रवाल प्रीपीजी की तैयारी कर रहे है। वे जनवरी माह से रोज आते है और डिजिटल लाईब्रेरी का लाभ उठा रहे है। उन्होंने बताया कि लाईब्रेरी का माहौल उन्हें बहुत पसंद है। घर में पढ़ाई सुविधाजनक नहीं है, यहां बैठकर वे पूरी एकाग्रता के साथ अध्ययन कर पाते है।सेंट्रल लाइब्रेरी में सदस्यता के लिए अलग-अलग वर्गों हेतु शुल्क निर्धारित किया गया है। जिसमें सामान्य नागरिकों के लिए, छात्रों के लिए, पूर्व शासकीय सेवक, वरिष्ठ नागरिक, कार्पोरेट से जुड़े लोगों के लिए अलग-अलग शुल्क अलग निर्धारित किया गया है. सदस्यता शुल्क माह, तिमाही, अर्धवार्षिक और आजीवन सदस्यता के आधार पर लिया जा रहा है। बच्चों के लिए किड्स जोन सेंट्रल लाइब्रेरी प्रदेश की पहली लाइब्रेरी है जहाँ बच्चों के लिए एक अलग जोन बनाया गया है। जहां बच्चों के पढ़ने के लिए एक अलग वातावरण है। जिसमें ई बुक, आडियों बुक, बोर्ड बुक, पिक्चर बुक, साथ में मस्ती के लिए उपकरण भी उपलब्ध हंै। पुस्तकें दान भी कर सकतें हैंसेंट्रल लाइब्रेरी में अगर कोई पुस्तकें दान करने का इच्छुक हो तो वह दान कर सकता है। इसके लिए सहायक प्रभारी श्री विकास पात्रे, मो. 7440944000 और लाइब्रेरियन श्री धनकुमार महिलांग फोन नंबर-07752434279 से संपर्क किया जा सकता है।
नई दिल्ली| टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympics) की रेसलिंग मैट पर भारतीय पहलवान रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) ने फाइनल में जगह बनाते हुए भारत के...
नई दिल्ली| भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते कितने तल्ख है, ये तो हम सभी जानते हैं. ऐसे में जब दोनों देशों की क्रिकेट टीम मैदान...
बिलासपुर| आरोपीयो का नाम – 1 दीपू कौशिक पिता ज्वाला प्रसाद कौशिक एम 21 साल साधिन चोरमदतीकला थाना सकरी जिला बिलासपुर2 सोमेश कश्यप पिता संतोष कश्यप...
अम्बिकापुर| केन्द्रीय जेल अम्बिकापुर के जेल अधीक्षक ने बताया है कि कोरिया जिले के थाना केल्हारी के ग्राम डोडकी निवासी विचाराधीन बंदी धरमपाल पिता सुखी राम...
रायपुर| अगस्त माह का प्रथम सप्ताह ‘विश्व स्तनपान सप्ताह‘ के रूप में 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जा रहा है। स्तनपान शिशुओं के लिए ना केवल सर्वोतम आहार है बल्कि उनका मौलिक अधिकार भी हैं स्तनपान सप्ताह के लिय इस वर्ष की थीम ‘स्तनपान की रक्षा एक साझी जिम्मेदारी ’’प्रोटेक्ट ब्रेस्टफिडिंगः अ रेसपांसबिलिटी’’ इस बात पर जोर देती हैं कि स्तनपान पूरी दुनिया भर में सभी के अस्तित्व, स्वास्थ्य और देखभाल में अपना योगदान देती है। स्तनपान की सुरक्षा पूरी मानव जाति की जिम्मेदारी हैं। माँ का दूध अमृत समान होता है। इसका सेवन हर बच्चे का हक है। माँ भी पहली बार जब बच्चे को स्तन से लगाती है प्रसव पश्चात् होने वाली समस्त पीड़ा को भूल जाती है। स्तनपान माँ और बच्चे दोनों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। भारत सरकार ने वर्ष 2016 में स्तनपान ऊपरी आहार को बढ़ावा देने के लिये ‘माँ‘ कार्यक्रम की शुरूवात की थी। माँ कार्यक्रम के अंतर्गत सभी चिकित्सा इकाईयों को ‘बेबी फेण्डली‘ बनाने की आवश्यकता हैं। स्तनपान से शिशु एवं बाल जीवितता पर अहम प्रभाव पड़ता है, जिन शिशुओं को एक घण्टे के अन्दर स्तनपान नहीं कराया जाता हैं उनमें नवजात मृत्यु दर की संभावना 33 प्रतिशत अधिक होती हैं। 06 माह की आयु तक शिशु को केवल स्तनपान कराने पर सामान्य रोग जैसे दस्त रोग एवं निमोनिया के खतरंे में क्रमशः 11 प्रतिशित व 15 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती हैं। स्तनपान स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु को भी कम करता है। माँ के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता हैं। छःमाह तक ऊपर से पानी देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। नवजात शिशु की मॉग के अनुसार स्तनपान कराया जाये, यानि जितनी बार शिशु चाहे उसे उतनी बार स्तनपान करायें। बच्चे को चुसनी, निप्पल अथवा सूदर (चबाने के लिये मुलायम खिलौने) आदि नहीं दिया जाना चाहिए। माँ के दूध में आवश्यक पोषक तत्व, खनिज विटामिन, प्रोटीन वसा, एन्टीबाडीज और ऐसे प्रतिरोध कारक मौजूद होते है, जो नवजात शिशु के सम्पूर्ण विकास और स्वास्थ्य के लिये आवश्यक हैं। शिशु के जन्म से छः माह तक माँ का दूध ही बच्चे के लिये सम्पूर्ण आहार की सभी जरूरते पूरी करता हैं। स्तनपान बच्चे और माँ के बीच भावनात्मक संबंधों को मजबूत करता है। बच्चे को डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने में मदद करता हैं। माँ का दूध सुपाच्च होता है। यह शिशु के पाचन क्रिया के अनुरूप निर्मित होता है। माँ के दूध में है, मौजूद कैल्शियम शिशु के द्वारा अवशोषित कर लिये जाते है, जो हडिडयों को मजबूत बनाते है। स्तनपान के द्वारा मां को ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर के खतरे कम किया जा सकता है। प्रसव पश्चात् होने वाले रक्त स्त्राव को कम करता हैं। परिवार नियोजन के लिये लाभदायक स्तनपान वजन कम करने में सहायक होता है। जब माँ अपने शिशु को स्तनपान कराती हैं तो उसका शरीर लगभग 450 से 500 कैलोरी खर्च करता है. इससे प्राकृतिक ढंग से वजन कम करने में मदद मिलती हैं। स्तनपान एक स्वभाविक व जलवायु हितैषी प्रक्रिया है जिससे कचरे व प्रदूषण का सृजन नही होता हैं। मां के दूध के विकल्प के रूप में बाजार में उपलब्ध जैसे कि ब्रेस्ट मिल्क सब्सिट्यूट अल्ट्रा प्रोसेस्ड फुड पदार्थ होते हैं। इनके उत्पादन, पैकेजिंग, वितरण, मार्केटिंग और उपयोग की प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन होता है और पृथ्वी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता हैं। वही माँ के दूध के विकल्प के उपयोग में बोतल, निप्पल, कंटेन्ट आदि सामग्री भी उत्पन्न होती है। जिसके निपटाने की भी जरूरत पड़ती है, यही वजह है कि विशेषज्ञ स्तनपान को पर्यावरण हितैषी मानते हैं।
रायपुरराज्य शासन के गृह विभाग द्वारा संचालित विभागीय परीक्षा 25 जनवरी से 1 फरवरी तक शासकीय छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में आयोजित की गई थी। इसका परीक्षाफल घोषित किया गया है। ]उपायुक्त रायपुर संभाग आनंद मसीह ने बताया कि परीक्षा परिणाम का अवलोकन संभाग आयुक्त के कार्यालय में किया जा सकता है।
बलौदाबाजार| प्रदेश के एक मात्र सैनिक स्कूल अंबिकापुर में सत्र 2021-22 हेतु कक्षा 6वीं और 9वीं में प्रवेश हेतु परीक्षा परिणाम जारी कर दिया गया है।...
रायपुर| छत्तीसगढ़ में कोरोना से बचाव का पहला टीका लगवाने वालों की संख्या एक करोड़ से पार हो गई है। प्रदेश में 3 अगस्त तक एक...