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CG: मकान दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी, अब खाएंगे जेल की हवा

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां दीप्ति बिल्डर्स के संचालक और उसकी पत्नी ने मकान दिलाने के नाम पर 12 लोगों से 3 करोड़ 14 लाख रुपए ऐंठ लिए हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने दीप्ति बिल्डर्स के संचालक धनीराम बंजारे और उसकी पत्नी पार्वती बंजारे को 34 लाख 50 हजार रुपए की ठगी के मामले में गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि, आरोपी धनीराम बंजारे शिक्षक है, जिसे हाल ही में एक अन्य मामले में भी महिला की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने 14 फरवरी को सस्पेंड किया था। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
मिली जानकारी के अनुसार, बोड़सरा निवासी गोविंद साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 2 अगस्त 2018 को दीप्ति बिल्डर्स के मालिक धनीराम बंजारे ने उससे मकान का सौदा किया था। उसने दीप्ति विहार कॉलोनी में मकान नंबर बी-11 को दिखाकर 35 लाख रुपए में सौदा किया था। गोविंद ने 5-5 लाख रुपए अपने दामाद प्रकाश साहू के खाते (कोरबा SBI) से दीप्ति बिल्डर्स के खाते में ट्रांसफर किया गया था। इसमें से रजिस्ट्री 20 सितंबर 2018 को रजिस्ट्री शुल्क 2 लाख 50 हजार रुपए लगे। वहीं 2 लाख रुपए वापस कर दिया गया और बाकी रकम 5 लाख 50 हजार रुपए अपने पास ही आरोपी ने रख लिया था।
दूसरे का मकान दिखाकर की धोखाधड़ी
गोविंद साहू ने मकान के लिए 29 लाख रुपए होम लोन भी लिया था, जिसे धनीराम बंजारे के खाते में ट्रांसफर कराया गया था। गोविंद साहू ने मकान को हैंड ओवर करने के लिए बोलने पर मकान नहीं बना है, 1-2 माह बाद सौंप देंगे, कहते हुए टाल दिया। दीप्ति बिल्डर्स के मालिक धनीराम बंजारे और रजिस्ट्री कर्ता पार्वती बंजारे ने दूसरे के मकान को दिखाकर लोन दिलवाकर मकान बिक्री के नाम पर 34 लाख 50 हजार रुपए धोखाधड़ी कर ली। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सिटी कोतवाली में धारा 420, 120 बी, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। साथ ही रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट जब्त किया गया। दोनों पति पत्नी को गिरफ्तार कर फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
12 अन्य व्यक्तियों से भी ऐंठे पैसे
इसी तरह आरोपी पति-पत्नी ने गोविंद साहू निवासी बोड़सरा सिवनी से 35 लाख रुपए, द्वारिका प्रसाद पाटले बांकीमोंगरा से 29 लाख, दलेश्वर मांझी निवासी जांजगीर से 25 लाख, अनिल कुमार मिरी से 25 लाख, रमा मांझी/सोनाऊ मांझी निवासी चंदनिया पारा से 35 लाख, धनीराम रत्नाकर निवासी बस स्टैंड से 14 लाख रुपए, कन्हैया मरावी से 14 लाख, रोहन राठौर निवासी चांपा से 7 लाख, सुभद्रा कवंर/ज्ञान सिंह से 25 लाख, रोहिणी श्रीवास निवासी सुकली से 40 लाख, अभिषेक साहू से 45 लाख और यशवंत राठौर से 20 लाख इस प्रकार कुल 3 करोड़ 14 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है।
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Murder Case: छत्तीसगढ़ में सनसनी, बोरे के अंदर मिला शव, मचा हड़कंप

Surajpur Murder Case: छत्तीसगढ़ में अपराधियों के हौसलें इस कदर बुलंद है कि उन्हें अब पुलिस का भी डर नहीं रहा, प्रदेश में आए दिन मर्डर, रेप, मारपीट जैसी घटनाएं आते रहते है। इसी बीच सूरजपुर में एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। यहां एक सफेद बोरे के अंदर बंद युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। शव की स्थिति को देखकर हत्या के बाद उसे ठिकाने लगाने की आशंका जताई जा रही है।
शरीर पर मिले चोटों के निशान
Surajpur Murder Case दरअसल, रामानुजनगर थाना के तिवरागुड़ी में सुबह जब ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकले तो गांव के समीप एक संदिग्ध सफेद बोरा दिखाई दिया। पास जाकर देखने पर बोरे से तेज दुर्गंध आ रही थी। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी गांव के सरपंच को दी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही रामानुजनगर पुलिस, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंची। जब बोरे को खोला गया तो सभी के होश उड़ गए। भीतर एक युवक का शव मिला। जिसे रस्सियों से बांधा गया था। मृतक के सिर, चेहरे और गले सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। मृतक की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष बताई जा रही है, लेकिन उसकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है।
पुलिस आसपास के इलाकों (Surajpur Murder Case) में गुमशुदगी की जानकारी खंगाल रही है और घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। शव जिस तरह बोरे में बंद मिला है, उससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि आरोपी शव को किसी बांध या सुनसान स्थान पर ठिकाने लगाने की फिराक में थे, लेकिन किसी वजह से अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके। फिलहाल फॉरेंसिक टीम डॉग स्क्वॉयड और पुलिस इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी अपने अपने स्तर पर सुलझाने में जुटी हुई है।
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CG News: भतीजे-भतीजी ने की बड़ी मां की हत्या, मुर्गा-दारु पार्टी में विवाद के बाद जलाकर मारा

अंबिकापुर में भतीजा और भतीजी ने मिलकर अपनी बड़ी मां की हत्या कर दी। घर में मुर्गा और दारु की पार्टी चल रही थी, इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हो गया।
अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में भतीजा और भतीजी ने मिलकर अपनी बड़ी मां की हत्या कर दी। घर में मुर्गा और दारु की पार्टी चल रही थी, इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हो गया। जिसके बाद दोनों ने मिलकर चूल्हे में जल रही लकड़ी से पहले हमला करते हुए आग से जलाकर मौत के घाट उतार दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, धौरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत चटकपुर में यह घटना घटी है। मृतिका अपनी भतीजी प्रभा विश्वकर्मा को लड़कों के साथ घूमने से मना करती थी। जिससे नाराज होकर भतीजी ने अपने भाई के साथ मिलकर अपनी बड़ी मां की हत्या कर दी। जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपी भतीजा अमृत विश्वकर्मा और भतीजी प्रभा विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
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Digital Arrest Scam: CBI अफसर बनकर बुजुर्ग से ₹1 करोड़ की ठगी,15 दिन तक घर में किया ‘डिजिटल अरेस्ट’

Digital Arrest Scam: गुजरात के सूरत से एक 90 साल के बुजुर्ग व्यक्ति के साथ डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित ने अपने जीवनभर की जमापूंजी कुल ₹1.15 करोड़ गंवा दिए।
Digital Arrest Scam: देशभर में डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest ) स्कैम के मामले बढ़ते ही जा रहे है। आए दिन किसी न किसी के साथ डिजिटल अरेस्ट स्कैम की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इस स्कैम का शिकार बनकर अपनी जिंदगी भर की जमापूंजी को गवां चुके हैं। इसी बीच, डिजिटल अरेस्ट का एक नया मामला सामने आया है। जिसके चलते ठगों ने गुजरात के एक 90 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम का शिकार बनाया और उन्हें उनके ही घर में 15 दिनों तक वर्चुअली रूप से डिजिटली अरेस्ट किया। जिसमें बुजुर्ग ने 1 करोड़ रुपए से ज्यादा पैसे गंवा दिए।
क्या था पूरा मामला
दरअसल, साइबर अपराधियों ने गुजरात के 90 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति को व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से ठगी की शुरुआत की। धोखेबाजों ने पीड़ित को व्हाट्सएप कॉल करके सबसे पहले खुदको एक CBI अधिकारी बताया और उन्होंने कॉल पर कहा कि उनके नाम से एक पार्सल मुंबई से चीन भेजा गया है, जिसमें कथित तौर पर 400 ग्राम MD ड्रग्स थे। फिर गिरोह ने बुजुर्ग को जेल भेजने की धमकी दी और दवाव बनाकर उनसे मोटी रकम ऐंठने का खेल शुरू किया।
धोखेबाजी का यह सिलसिला पीड़ित के साथ यही तक नहीं रुका बल्कि बुजुर्ग को पूरे 15 दिनों तक उनके ही घर में वर्चुअली तौर पर डिजिटल अरेस्ट पर रखा गया। फिर ठगों ने पीड़ित की बैंक डिटेल निकालकर ₹1.15 करोड़ की राशि अपने खातों में ट्रांसफर कर ली।
इस पूरी घटना के बारें में जब बुजुर्ग के परिजनों को पता लगा तो उन्होंने 29 अक्टूबर को सूरत की साइबर सेल में धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट की शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 46 डेबिट कार्ड, 23 चेकबुक, 28 सिम कार्ड, 9 मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद किए। धोखेबाजों ने कई बैंक खातों और कंपनियों के रबर स्टांप का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा किया था।
गिरोह का मास्टरमाइंड फरार
सूरत की क्राइमब्रांच ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में अभी तक उन्होंने 5 अपराधियों- रमेश सुराना, उमेश जिंजाला, नरेश सुराना, राजेश देवड़ा और गौरांग राखोलिया को पकड़ लिया है। हालांकि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पार्थ गोपानी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। पुलिस कहना है कि यह अपराधी कंबोडिया में है। पुलिस ने इस रैकेट का खुलासा करते हुए बताया कि यह पूरा रैकेट चीन की एक गैंग की मदद से चलाया जा रहा था। बता दें, गिरोह ने बुजुर्ग व्यक्ति को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाकर डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया और डरा-धमकाकर करोड़ों रुपए ऐठ लिए गए।




















