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छत्तीसगढ़ राज्य उच्च शिक्षा परिषद की बैठक सम्पन्न, बस्तर और सरगुजा संभागों में नए कॉलेज खोलना प्राथमिकता- उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल

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रायपुर| उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा संभाग में दूरस्थ इलाकों में नये कॉलेज खोलना प्राथमिकता है, जिससे अनुसूचित जन जातीय इलाकों के विद्यार्थियों को उनके इलाके में ही उच्च शिक्षा हासिल करना सहज हो सके। उच्च शिक्षा मंत्री पटेल आज यहां महानदी मंत्रालय भवन में उच्च शिक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बैठक में मौजूद विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं कॉलेजों के प्राचार्यों से कहा कि वे अपने संस्थानों में शार्ट टर्म रोजगार मूलक कोर्स शुरू कराएं, जिससे प्रदेश के छात्रों को फायदा मिले। उन्होंने सभी स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में विद्यार्थियों को कार्ययोजना के अनुसार कम्प्यूटर प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए।


उच्च शिक्षा मंत्री पटेल ने बैठक में राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में नैक के मूल्यांकन कार्य की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नैक मूल्यांकन का कार्य राज्य के कॉलेजों में तेजी से किया जा रहा है। नैक मूल्यांकन के लिए शेष रहे गए कॉलेजों के मूल्यांकन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शीघ्र ही नैक मूल्यांकन की तिथि निश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही करें। उन्हांेंने नैक मूल्यांकन की प्रगति के लिए अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत न्यू एजूकेशन पालिसी के अंतर्गत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।

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उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के महाविद्यालयों को बहु संकायी रोजगार मूलक सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम स्ववित्तीय मोड में प्रारंभ करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एकल विषय पर आधारित संस्थानों को बहुविषयक संस्थान के रूप में उन्नयन किया जाना चाहिए। उन्होंने भविष्य में बहु विषयक संस्थान ही खोले जाने पर जोर देते हुए सुकमा, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया पेंड्रा और जशपुर नगर में प्राथमिकता के आधार पर बहु विषय कॉलेज खोलने की बात कही।


बैठक में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति, राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान कार्यालय में पूर्व एवं वर्तमान में केन्द्रीकृत ऑनलाईन कक्षाओं के संचालन की कार्योत्तर स्वीकृति के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई। नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के संबंध में गठित वर्किंग कमेटी की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई। इसी तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राज्य के कॉलेजों में सकल दर्ज अनुपात में वृद्धि के लिए कार्ययोजना के तहत कार्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाने अधिकारियों से कहा गया। बैठक में इंटर्नशिप एम्बेडेड पाठ्यक्रम लागू करने, सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग एवं एकीकरण तथा उच्च शिक्षा संस्थाओं में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए। बैठक में स्नातक कक्षाओं के पाठ्यक्रमों के निर्माण हेतु गठित केन्द्रीय अध्ययन मण्डल के सदस्यों हेतु प्रस्तावित मार्गदर्शी निर्देशों का अनुमोदन किया गया।

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इसी तरह से राष्ट्रीय स्तर के अन्य विश्वविद्यालयों के गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम के अनुरूप समान्तर स्नातक स्तर पर पाठ्यक्रम के निर्माण पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में राष्ट्रीय उच्चत्तर शिक्षा अभियान फेस तीन के संबंध में भारत सरकार से प्राप्त प्रस्तावित मापदंडों एवं नैक मूल्यांकन कार्य की प्रगति एवं विभागीय प्रयासों की समीक्षा तथा आगामी रणनीति पर सदस्यों ने जरूरी सुझाव दिए।


बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव भुवनेश यादव, उच्च शिक्षा की आयुक्त शारदा वर्मा, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति केशरीलाल वर्मा, कुलपति बस्तर विश्वविद्यालय शैलेन्द्र कुमार सिंह, कुलपति बिलासपुर विश्वविद्यालय एडीएम वाजपेयी, कुलपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय गिरीश चंदेल सहित छत्तीसगढ़ राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सदस्य डॉ. ए.टी.दाबके, एस.एन.अग्रवाल, डॉ. इंद्रा मिश्रा सहित अन्य सदस्य एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।

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इस वजह से हुई मानसून में देरी

सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:

  • सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।

  • न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।

इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

  • जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।

  • मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।

  • केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।

  • वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।

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मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।

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छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं

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सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है

नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है

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