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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की ढोकरा राखियां पहुँची विदेशी बाजारों तक

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रायपुर| बहन भाई के पवित्र रिश्ते एवं प्रेम के बंधन का त्यौहार रक्षाबंधन के आते ही बाजार में रंग बिरंगी सैकड़ों राखियों की दुकानें सज जाती हैं। इस बार रक्षाबंधन में छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल कोण्डागांव जिले के आदिवासी हस्तशिल्प कलाकारों ने परंपरागत हस्तशिल्प ‘ढोकरा शिल्प‘ का प्रयोग राखी बनाने में किया है । छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों द्वारा निर्मित  ढोकरा राखियों ने अपनी अलग पहचान के कारण देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी अपनी पैठ बनाने में सफलत पाई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान स्व सहायता समूह के द्वारा निर्मित इन राखियों में मौली, रुद्राक्ष, मोती आदि का भी प्रयोग किया गया है एवं इन राखियों की ब्रांडिंग ‘ढोकरा रक्षा राखी‘ के नाम से की गयी है। ढोकरा शिल्प के प्रयोग से छोटी-छोटी कलाकृतियाँ बेल मेटल से तैयार कर इन्हें राखियों में मौली,रूद्राक्ष,मोतियों के साथ पिरोया जाता है। अपने आकर्षक स्वरूप के कारण ये राखियाँ बरबस ही लोगों को आकर्षित करती हैं। अपनी इस विशेषता के कारण इन राखियों का उपयोग लॉकेट या ब्रेसलेट के रूप में भी किया जा सकता है।

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 इस पहल से जिले के शिल्पकार और महिला समूह को आय के नए स्रोत प्राप्त हुए हैैं। तथा नए डिजाइन एवं नई सोच के साथ काम करने का मौका मिला है । जिला प्रशासन की मदद से  ग्राम पंचायत डोंगरी गुड़ा के किडीछेपरा गांव में शिल्पकारों एवं जागो महिला समूह की महिलाओं को राखियों के नए डिजाइन निर्माण का प्रशिक्षण उड़ान महिला कृषक प्रड्यूसर कंपनी के द्वारा दिया गया है। इन राखियों को तैयार करने के लिए पंखुड़ी सेवा समिति के द्वारा प्रशिक्षण एवं मार्केटिंग का कार्य किया गया है।           
    ढोकरा राखी ने विदेशों में भी अपनी पहुँच बनाई है। राखियों का विक्रय ऑनलाइन माध्यमों से भी किया गया । कोण्डागांव जिले में जिला पंचायत की ओर से महिलाओं के रोजगार हेतु शुरू की गई इस नवीन पहल के तहत तीन महिला स्व-सहायता समूह की 30 महिलाओं को राखी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इनके प्रशिक्षण के लिये 65000 रुपये जिला पंचायत द्वारा प्रदान किया गया था। शेष व्यय उड़ान महिला कृषक प्रोड्यूसर कम्पनी द्वारा वहन  किया गया है तथा निर्माण कार्य भी उड़ान में ही प्रारम्भ किया गया था। 10 दिनों में महिला समूह द्वारा हजारो राखियां तैयार कर  बाजार में विक्रय हेतु उपलब्ध कराई गई। इस कार्य से महिला समूहों की प्रत्येक महिला को  2000 से 2500 तक आय प्राप्त हुई है।

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छत्तीसगढ़

‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ : सीएम साय ने कहा – गौ संरक्षण जनभागीदारी से ही बनेगा जनआंदोलन

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गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। ये बातें मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।

इस अवसर पर सीएम ने प्रदेशव्यापी ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।

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छत्तीसगढ़

“सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सुनेगी…”, सर्वदलीय बैठक खत्म होते ही किरण रिजिजू का पहला बयान, कल पेश होगा वंदे मातरम् बिल

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संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक ख़त्म हो गई है। इस बैठक के ख़त्म होते ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, अच्छे माहौल में यह बैठक हुई। सभी ने इस बैठक में अपनी बात रखी। संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक के बाद मिडिया को दिए अपने पहले बयान में कहा कि, सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सत्र के दौरान सुनेगी। इसके अलावा बागी सांसदों को बैठक में बुलाये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि, नियमों के मुताबिक़ ही उन्हें बुलाया गया है।

बता दें कि, रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में व्यवधान पैदा करने से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि इससे जनता के पैसे और समय की बर्बादी होती है।

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छत्तीसगढ़

सीएम साय ने अधिकारियों को किया अलर्ट, बारिश से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश…

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

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