बिलासपुर
किसान उर्वरक खरीदते समय असली-नकली की करें पहचान
बिलासपुर। छ.ग. में मानसून सामान्यतः 10 से 15 जून को आ जाता है। किसान खरीफ फसलों की बोवाई करने के लिए अपने खेतों को तैयार करने में जुटे हुए है। बिलासपुर जिले में हर वर्ष खरीफ की बोवाई लगभग 178450 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। जिसमें किसान उर्वरकों का उपयोग करते है। इसके लिए किसानों को असली एवं नकली उर्वरक की पहचान होनी चाहिए।
उप संचालक कृषि बिलासपुर ने बताया कि बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक खरीदते समय ध्यान में रखें कि सभी किसान बीज उर्वरक एवं कीटनाशक अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें। कृषि आदान संबंधित किसी भी प्रकार का बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक आन लाईन नहीं मंगाएं और इससे होने वाली संभावित ठगी से बचे। किसी भी प्रकार का कृषि आदान खरीदते समय अधिकृत विक्रेता से बिल अवश्य प्राप्त करें। कृषि आदानों का उपयोग करते समय इसकी निर्धारित मात्रा एवं सही आदान का ही प्रयोग करें ताकि होने वाले अपव्यय से बचा जा सके।
किसान उर्वरक खरीदते समय कुछ सामान्य जानकारी रखकर बाजार में मिलने वाले नकली उर्वरकों की पहचान करके आर्थिक नुकसान से बच सकते है। मुख्य उर्वरक जैसे-यूरिया, डी.ए.पी., सुपर फास्फेट पोटाश, जिंक सल्फेट आदि की असली या नकली होने की पहचान विभिन्न तरीकों से कर सकते हैं। यूरिया के सफेद गोल आकार के एक जैसे दाने होते है, इसकी पहचान के लिए यूरिया के कुछ दानों को एक पानी के गिलास में डालकर इसके हिलाने पर संपूर्ण यूरिया पानी में घुल जाता है। पानी को छूने पर ठंडा महसूस हो तो यूरिया असली है। डी.ए.पी. के दाने कंकड़ की तरह अनियमित आकार के होते है डी.ए.पी. के दानों को हथेली में रखकर तबांकू की तरह इसमें चूना मिलाकर रगड़ने पर तेज गंध का एहसास होता है तो डी.ए.पी. असली है|
दूसरा तरीका यह है कि डी.ए.पी. के कुछ दानों को गरम तवे पर रखकर गर्म करने पर असली डीएपी के दाने फूल जाते है और नकली डीएपी के दाने नही फूलते है। इसी प्रकार पोटाश को पहचाने के लिए असली पोटाश सफेद एवं लाल मिर्च पावडर जैसा होता है। असली पोटाश के दाने में नमी होने पर या उसमें पानी मिलाने पर आपस में चिपकते नहीं है तो पोटाश असली होता है।
इसका दूसरा तरीका यह है कि पोटाश में पानी मिलाने पर इसमें उपस्थित लाल दाने पानी की उपरी सतह पर तैरने लगते है तो समझना चाहिए कि पोटाश असली है। जिंक सल्फेट हल्का सफेद या पीले भूरे रंग का होता है। डीएपी के घोल में जिंक सल्फेट मिलाने पर थक्केदार घना अवशेष बन जाये तो यह असली है। अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के मैदानी विस्तार अधिकारियांे एवं विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
लासपुर| छ.ग. में मानसून सामान्यतः 10 से 15 जून को आ जाता है। किसान खरीफ फसलों की बोवाई करने के लिए अपने खेतों को तैयार करने में जुटे हुए है। बिलासपुर जिले में हर वर्ष खरीफ की बोवाई लगभग 178450 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। जिसमें किसान उर्वरकों का उपयोग करते है। इसके लिए किसानों को असली एवं नकली उर्वरक की पहचान होनी चाहिए।
उप संचालक कृषि बिलासपुर ने बताया कि बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक खरीदते समय ध्यान में रखें कि सभी किसान बीज उर्वरक एवं कीटनाशक अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें। कृषि आदान संबंधित किसी भी प्रकार का बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक आन लाईन नहीं मंगाएं और इससे होने वाली संभावित ठगी से बचे। किसी भी प्रकार का कृषि आदान खरीदते समय अधिकृत विक्रेता से बिल अवश्य प्राप्त करें। कृषि आदानों का उपयोग करते समय इसकी निर्धारित मात्रा एवं सही आदान का ही प्रयोग करें ताकि होने वाले अपव्यय से बचा जा सके।
किसान उर्वरक खरीदते समय कुछ सामान्य जानकारी रखकर बाजार में मिलने वाले नकली उर्वरकों की पहचान करके आर्थिक नुकसान से बच सकते है। मुख्य उर्वरक जैसे-यूरिया, डी.ए.पी., सुपर फास्फेट पोटाश, जिंक सल्फेट आदि की असली या नकली होने की पहचान विभिन्न तरीकों से कर सकते हैं। यूरिया के सफेद गोल आकार के एक जैसे दाने होते है, इसकी पहचान के लिए यूरिया के कुछ दानों को एक पानी के गिलास में डालकर इसके हिलाने पर संपूर्ण यूरिया पानी में घुल जाता है। पानी को छूने पर ठंडा महसूस हो तो यूरिया असली है। डी.ए.पी. के दाने कंकड़ की तरह अनियमित आकार के होते है डी.ए.पी. के दानों को हथेली में रखकर तबांकू की तरह इसमें चूना मिलाकर रगड़ने पर तेज गंध का एहसास होता है तो डी.ए.पी. असली है|
दूसरा तरीका यह है कि डी.ए.पी. के कुछ दानों को गरम तवे पर रखकर गर्म करने पर असली डीएपी के दाने फूल जाते है और नकली डीएपी के दाने नही फूलते है। इसी प्रकार पोटाश को पहचाने के लिए असली पोटाश सफेद एवं लाल मिर्च पावडर जैसा होता है। असली पोटाश के दाने में नमी होने पर या उसमें पानी मिलाने पर आपस में चिपकते नहीं है तो पोटाश असली होता है।
इसका दूसरा तरीका यह है कि पोटाश में पानी मिलाने पर इसमें उपस्थित लाल दाने पानी की उपरी सतह पर तैरने लगते है तो समझना चाहिए कि पोटाश असली है। जिंक सल्फेट हल्का सफेद या पीले भूरे रंग का होता है। डीएपी के घोल में जिंक सल्फेट मिलाने पर थक्केदार घना अवशेष बन जाये तो यह असली है। अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के मैदानी विस्तार अधिकारियांे एवं विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
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बिलासपुर को मिली नई सौगात
बिलासपुर। क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। Chouksey Group of Colleges के अंतर्गत नया Chouksey College of Ayurved Research Center & Hospital अब राष्ट्रीय आयुर्वेद आयोग (NCISM), नई दिल्ली से संबद्ध हो गया है।
यह उपलब्धि बिलासपुर के लिए गौरव की बात है, क्योंकि अब जिले को अपना पहला और एकमात्र निजी बीएएमएस (BAMS) कॉलेज मिल गया है।
कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि इस वर्ष होने वाली काउंसलिंग में चौकसे आयुर्वेद कॉलेज में NEET 2025 के आधार पर प्रवेश (Admission) दिए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेद शिक्षा एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।
ज्ञात रहे कि इस वर्ष Chouksey Group के इंजीनियरिंग कॉलेज में बिलासपुर संभाग में सर्वाधिक प्रवेश (Admissions) हुए हैं। साथ ही डिग्री पाठ्यक्रमों जैसे B.Com, Law, BBA, BCA, PGDCA की सभी सीटें भी पूर्ण रूप से भर गई हैं। यह विद्यार्थियों के बीच चौकसे ग्रुप की बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास को दर्शाता है।

चौकसे ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष जायसवाल ने कहा —
“हमारा संकल्प विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। बिलासपुर में पहला निजी बीएएमएस कॉलेज खुलना न केवल विद्यार्थियों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। हमें विश्वास है कि यह कॉलेज आयुर्वेद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।”
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Bilaspur के नामी LCIT Group of Institutions का छात्रों के साथ भयानक फर्जीवाड़ा : वादे बड़े-बड़े, हकीकत पानी-पानी!
बिलासपुर: LCIT Group of Institutions – Bilaspur, जो हर साल एडमिशन के दौरान बड़े-बड़े वादे और लुभावने दावे करता है, उसकी सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। दावा किया जाता है कि यहां आधुनिक लैब्स, अनुभवी फैकल्टी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा — लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
बारिश आई, लैब्स ने छलनी बनकर स्वागत किया!
हमें मिले वीडियो में कॉलेज की लैब्स से टपकती छतें साफ़ दिखाई दे रही हैं। जहां स्टूडेंट्स को मशीनों के साथ प्रैक्टिकल करना चाहिए था, वहां अब पानी से बचने के लिए प्लास्टिक की बाल्टियाँ रखी जा रही हैं। सवाल ये उठता है कि जब प्रयोगशालाएं ही सुरक्षित नहीं, तो शिक्षा कितनी सुरक्षित होगी?

फैकल्टी? बस कागज़ों पर!
सूत्रों के अनुसार, यहां कई फैकल्टी सदस्य केवल ऑन पेपर मौजूद हैं। यानी नाम तो है, पर काम में कहीं नजर नहीं आते। छात्रों का कहना है कि कई विषयों की क्लास ही नियमित नहीं होती।
इंजीनियरिंग प्रिंसिपल भी सिर्फ नाम के!
कहा जा रहा है कि इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रिंसिपल भी फुल टाइम नहीं है, बल्कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए कागजों पर मौजूद हैं। यह छात्रों के भविष्य के साथ खुला मज़ाक है।

स्टाफ की नियुक्ति पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि अधिकांश स्टाफ या तो यहीं के पुराने छात्र हैं या फिर अन्य कॉलेज से किसी वजह से हटाए गए लोग हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
🎙 बिलासपुर के इस संस्थान की मार्केटिंग चमचमाती है, लेकिन हकीकत में ढहती छतें, दिखावटी स्टाफ और खोखले दावे छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ज़रूरत है कि शिक्षा को सिर्फ व्यापार न बनाकर, जिम्मेदारी समझा जाए
बिलासपुर
Bilaspur News: सट्टा के खिलाफ संगठित अपराध और जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई
बिलासपुर: नगदी रकम 11,600/- रूपये, मोचाईल, सट्टा पट्टी पर्ची जप्त
अपराध क्रमांक 1268/2024 धारा- 06 ख जुआ प्रतिशेध अधिनियम 2022 तथा धारा 112(2) बीएनएस०
नाम गिर० आरोपी :– आकाश सारथी पिता राजेश सारथी उम्र 28 साल नि० दुर्गा मंदीर के पास, कस्तुरबा नगर थाना सिविल लाईन जिला बिलासपुर छ०ग०
विवरण इस प्रकार है कि उपरोक्त आरोपी कल्याण सट्टा नाम से अंको के माध्यम से हारजीत का दाव लगाकर सट्टा लिख रहा था। मुखबीर से प्राप्त सूचना के आधार पर आरोपी को गुरुद्वारा के सामने सिन्धी कॉलोनी थाना सिविल लाईन के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपी से पूछताछ करने पर मोबाईल नंबर धारक व्यक्ति कथित खाईवाल के कहने पर तथा उससे मिलकर कर सट्टा पट्टी लिखना, जिसके एवज में प्रतिदिन कमीशन के रूप में नगदी रकम प्राप्त होना बताया। आरोपी के बताये अनुसार प्रकरण में मोबाईल नंबर धारक व्यक्ति कथित खाईवाल को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियो के विरुध्द जुआ अधिनियम तथा संगठित अपराध की धारा के अंतर्गत कार्यवाही की गई।
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