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फ्रांस ने भारत की गणतंत्र दिवस परेड में विदेशी मेहमान बनने का रिकॉर्ड तोड़ा

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इमैनुएल मैक्रॉन भारत के 75वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे

  • परेड के लिए 6 बार आमंत्रित होने वाला एकमात्र देश बन गया फ्रांस

नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। गणतंत्र दिवस पर होने वाली सालाना परेड में किसी न किसी विदेशी मेहमान को मुख्य अतिथि बनाने की परंपरा रही है।

मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्ष को परेड का मेहमान बनाने का रिकॉर्ड इस साल फ्रांस ने तोड़ दिया है। इस बार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन भारत के 75वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे, जिससे फ्रांस 6 बार आमंत्रित होने वाला एकमात्र देश बन जाएगा, जो किसी भी देश के लिए सबसे अधिक है।

भारत सरकार हर साल एक विदेशी नेता को गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर आमंत्रित करती है। भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर विदेशी नेता को आमंत्रित करने का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना और भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि को दिखाना है। देश में संविधान लागू होने के बाद प्रथम चार गणतंत्र दिवस परेड समारोह विभिन्न स्थानों (लाल किला, रामलीला मैदान, इरविन स्टेडियम, किंग्सवे मार्ग) पर आयोजित किये गए थे, लेकिन राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर पहली परेड, 1955 में निकाली गई थी। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मुहम्मद को बुलाया गया था।

अब तक यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के प्रतिनिधियों को सबसे अधिक 5-5 बार आमंत्रित किया गया है। इस बार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन को आमंत्रित किये जाने से फ्रांस 6 बार आमंत्रित होने वाला एकमात्र देश बन गया है, जो किसी भी देश के लिए सबसे अधिक है। देश के 67वें गणतंत्र दिवस पर 2016 में राजपथ से ऐतिहासिक लाल किले तक निकली परेड में पहली बार किसी विदेशी सैन्य टुकड़ी को शामिल किया गया था। परेड में फ्रांसीसी दस्ते का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल पॉल बरी कर रहे थे।

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फ्रांस के 76 सैनिकों का यह दस्ता जब मार्च पास्ट करता हुआ राजपथ पर गुजर रहा था तो सलामी मंच पर फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। लियोन स्थित 48 सदस्यीय ‘द म्यूजिक ऑफ द इंफैंट्री’ ने दो सैन्य धुनें बजाईं और उपस्थित लोगों ने उनका करतल ध्वनि से स्वागत किया था। राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की यह यात्रा रक्षा, व्यापार और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने की पहल पर केंद्रित थी।

फ्रांस के तत्कालीन प्रधानमंत्री जैक्स शिराक 1976 में गणतंत्र दिवस परेड के लिए आमंत्रित होने वाले पहले फ्रांसीसी नेता बने। भारत के प्रशंसक शिराक ने संस्कृत का अध्ययन किया था। उन्होंने भारत को एक प्रमुख उभरती शक्ति के रूप में देखा और फ्रांस के साथ राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके बाद 1980 में गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत का दौरा करने वाले फ्रांसीसी राष्ट्रपति वैलेरी गिस्कार्ड डी’एस्टेंग ने भारत-फ्रांस संबंधों में काफी संभावनाएं देखीं। उन्होंने वैश्विक मामलों में भारत की प्रमुख भूमिका को रेखांकित किया।

जैक्स शिराक 1998 में गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति के रूप में भारत वापस आये। एक ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने फ्रांस और भारत के द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जो यूरोपीय संघ के बाहर फ्रांस के लिए पहली बार था। फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी 2008 में गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि बने। उनकी इस यात्रा ने फ्रांस-भारत रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे किए। उनकी इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार करने के लिए नई प्रेरणा प्रदान की।

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भारत के 75वें गणतंत्र दिवस पर परेड के लिए भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने जनवरी में नई दिल्ली की यात्रा करने में असमर्थता व्यक्त की। फिर फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रॉन को गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। देश के इतिहास में पहली बार आर्म्ड फोर्सज मेडिकल सर्विसेज की महिला टुकड़ी गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड में शामिल होगी। इसके अलावा भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेवा से भी एक-एक टुकड़ी इस परेड का हिस्सा होंगी, जो भारतीय सेनाओं में नारी शक्ति के बढ़ते वर्चस्व का प्रदर्शन करेंगी।

फ्रांस और भारत के बीच बढ़ती दोस्ती का ही नतीजा था कि पेरिस में इसी साल 14 जुलाई को ‘बैस्टिल डे’ पर हुई फ्रांसीसी सैन्य परेड में भारतीय सैन्य दल भी मार्चिंग दल का हिस्सा बना था। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फ्रांसीसीपरेड में सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। फ्रांस और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के तीन राफेल लड़ाकू जेट ने ‘बैस्टिल डे’ पर पेरिस के चैंप्स एलिसीजज के ऊपर फ्लाईपास्ट में उड़ान भरी थी।

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रूस के कच्चे तेल निर्यात को भारी नुकसान! होर्मुज के बाद भारत के लिए एक और झटका

यूक्रेन के ड्रोन हमलों और टैंकर जब्ती के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता लगभग 40% घट गई है. ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल सप्लाई बाधित होने के बाद रूस भारत की रिफाइनरियों के लिए मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है. ऐसे में अब रूस की निर्यात क्षमता में आई यह गिरावट वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है.

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Iran isreal war: ईरान जंग के बीच खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई बाधित हुई है और ऐसे में रूस का तेल भारत की रिफाइनरियों के लिए लाइफलाइन बना हुआ है. लेकिन अब इस लाइफलाइन पर भी संकट के बादल छाते दिख रहे हैं. यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस के तेल और गैस निर्यात के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है. यह नुकसान इतना बड़ा है कि रूस की तेल निर्यात क्षमता का कम से कम 40% हिस्सा ठप हो गया है. यह रुकावट रूस के आधुनिक इतिहास में तेल सप्लाई की सबसे गंभीर रुकावट मानी जा रही है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार आंकड़ों पर आधारित कैलकुलेशन के मुताबिक, यूक्रेन के ड्रोन हमलों, रूस की एक बड़ी पाइपलाइन पर हमले और टैंकरों की जब्ती के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता का कम से कम 40% हिस्सा ठप हो गया है.

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल निर्यातक रूस को यह झटका ऐसे समय लगा है जब ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं. रूस की तेल उत्पादन क्षमता उसकी आय का प्रमुख स्रोत है.

यूक्रेन ने बढ़ाए रूस के तेल गैस निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले

इस महीने यूक्रेन ने रूस के तेल और ईंधन निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं. उसने रूस के पश्चिमी क्षेत्र के तीन प्रमुख तेल निर्यात बंदरगाहों- ब्लैक सी में नोवोरोसिस्क, बाल्टिक सागर में प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा को निशाना बनाया है.

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रॉयटर्स के अनुसार, बुधवार तक हालिया हमलों के बाद रूस की कच्चे तेल की निर्यात क्षमता का करीब 40% यानी लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन प्रभावित हो गया है. इसमें प्रिमोर्स्क, उस्त-लुगा और ड्रुज्बा पाइपलाइन भी शामिल हैं, जो यूक्रेन के रास्ते हंगरी और स्लोवाकिया तक जाती है.

यूक्रेन ने पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों और रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया है. उसका कहना है कि वो रूस की तेल और गैस से होने वाली आय को कम करना चाहता है. रूस को तेल गैस निर्यात से देश के बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मिलता है. यूक्रेन का कहना है कि वो तेल-गैस से होने वाली आय को कम कर रूस की सैन्य ताकत कमजोर करना चाहता है.

वहीं रूस ने इन हमलों को आतंकवादी कार्रवाई बताया है और अपने 11 टाइम जोन में सुरक्षा कड़ी कर दी है.

बंदरगाह, पाइपलाइन और टैंकर प्रभावित, भारत पर क्या होगा असर?

यूक्रेन का कहना है कि जनवरी के अंत में ड्रुज्बा पाइपलाइन का एक हिस्सा रूसी हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ, जिसके बाद स्लोवाकिया और हंगरी ने सप्लाई बहाल करने की मांग की.

7 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाला नोवोरोसिस्क तेल टर्मिनल इस महीने की शुरुआत में हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद प्रभावित हुआ है और इस टर्मिनल से काफी कम तेल लोड हो रहा है.

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इसके अलावा, यूरोप में रूस से जुड़े टैंकरों की लगातार जब्ती की जा रही है जिससे मुरमान्स्क बंदरगाह से निकलने वाले आर्कटिक तेल के लगभग 3 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात में रुकावट आई है.

पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस को भारत, चीन जैसे एशियाई बाजारों की ओर रुख करना पड़ रहा है, हालांकि वहां भी रूस की क्षमता सीमित है.

रूस चीन को पाइपलाइन के जरिए बिना रुकावट तेल सप्लाई जारी रखे हुए है, जिसमें स्कोवोरोडिनो-मोहे, अतासु-अलाशांकोउ रूट और कोजमिनो बंदरगाह से समुद्री मार्ग शामिल हैं. इन तीनों के जरिए कुल करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है.

इसके अलावा, रूस अपने सखालिन प्रोजेक्ट्स से भी करीब 2.5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात कर रहा है और पड़ोसी बेलारूस की रिफाइनरियों को लगभग 3 लाख बैरल प्रतिदिन तेल की आपूर्ति कर रहा है.

भारत की बात करें तो, रूस का कच्चा तेल समुद्री रास्तों के जरिए बड़े कार्गो में लोड होकर भारत पहुंचता है. ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के युद्ध की वजह से सऊदी, यूएई, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से तेल सप्लाई में रुकावट आई है.

इस रुकावट के बीच भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है और रूस एक बार फिर से भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है. ऐसे में रूसी तेल निर्यात में आई भारी कमी भारत पर असर डाल सकती है.

 

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वंदे भारत ट्रेन में परोसा खराब खाना, कंपनी पर लगा 50 लाख का जुर्माना, IRCTC पर भी फाइन

पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में खानेखाखा की खराब गुणवत्ता की शिकायत पर भारतीय रेलवे ने IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. साथ ही संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख का जुर्माना लगाकर उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आदेश दिए गए हैं. रेलवे ने यात्री सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है.

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भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस में खाने की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. रेलवे ने अपनी ही कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई पटना से टाटानगर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में भोजन की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायत के बाद की गई है.

जानकारी के अनुसार, 15 मार्च 2026 को ट्रेन संख्या 21896 पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में एक यात्री ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत को रेलवे ने गंभीरता से लिया और जांच के बाद कार्रवाई की गई. रेलवे ने IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके अलावा संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. साथ ही उस कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं.

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वंदे भारत में खाने की गुणवत्ता पर उठे सवाल

रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही या मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारतीय रेलवे अपने विशाल नेटवर्क के जरिए हर दिन लाखों यात्रियों को सेवाएं प्रदान करता है. IRCTC के माध्यम से प्रतिदिन 15 लाख से अधिक यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है. यह दुनिया के सबसे बड़े ऑनबोर्ड फूड ऑपरेशनों में से एक माना जाता है.

रेलवे का कहना है कि इस तरह के बड़े नेटवर्क में गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसलिए जब भी किसी तरह की शिकायत सामने आती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. इस घटना के बाद रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. खाने की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.

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खराब सेवा पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के आदेश

यह कार्रवाई उन सभी सेवा प्रदाताओं के लिए भी एक संदेश है कि यात्रियों को बेहतर सेवा देना उनकी जिम्मेदारी है. रेलवे ने कहा है कि आगे भी इस तरह की शिकायतों पर नजर रखी जाएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे.

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सीहोर में ब्रिज निर्माण के लिए खुदाई करते समय धंसी मिट्टी, 3 मजदूरों की दबने से मौत

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मध्य प्रदेश के सीहोर में सोमवार (23 दिसंबर) को बड़ी घटना हो गई। ब्रिज निर्माण के लिए खुदाई करते समय अचानक मिट्टी धंस गई। दबने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। एक को सुरक्षित निकाल लिया।

मध्य प्रदेश के सीहोर में सोमवार (23 दिसंबर) को बड़ी घटना हो गई। बुधनी में ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। पुलिया के पास खुदाई करते समय अचानक मिट्टी धंस गई। मिट्‌टी में दबने से 3 मजदूरों की मौत हो गई। एक को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। घटना शाहगंज थाना क्षेत्र के सियागहन गांव की है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

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रेस्क्यू कर एक को सुरक्षित बाहर निकाला
शाहगंज थाना क्षेत्र के सियागहन गांव में ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। सोमवार को चार मजदूर निर्माण के लिए दूसरी पुलिया के पास से मिट्टी खोद रहे थे। खुदाई के समय अचानक मिट्टी धंस गई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंची। रेस्क्यू टीम ने एक मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। तीन की मौत हो गई।

हादसे में इनकी हुई मौत
पुलिस के मुताबिक, लटेरी (विदिशा) निवासी करण (18) पिता घनश्याम, रामकृष्ण उर्फ रामू (32) पिता मांगीलाल गौड और गुना के रहने वाले भगवान लाल पिता बरसादी गौड़ की मौत हो गई। लटेरी निवासी वीरेंद्र पिता सुखराम गौड (25) को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वीरेंद्र को नर्मदापुरम रेफर किया है।

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राजलक्ष्मी कंस्ट्रक्शन करवा रहा निर्माण
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, राजलक्ष्मी कंस्ट्रक्शन पुलिया का निर्माण कार्य करा रहा है। पुलिया सियागहन और मंगरोल गांव को जोड़ती है। पुलिया की रिटेनिंग वॉल बनाते समय पहले से बनी रोड की रिटेनिंग वॉल का स्लैब धंस गया। पोकलेन मशीन से मिट्टी हटाकर चारों मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तीन की मौत हो गई। वीरेंद्र का इलाज चल रहा है।

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