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Middle East War Update: ‘गोलीबारी शुरू होगी..’, सीजफायर के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फिर कही बड़ी बात, ईरान को दे दी ये चेतावनी

Middle East War Update:ईरान के साथ सीजफायर के बाद अमेरिका की ओर से एक बार फिर सख्त रुख देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भले ही फिलहाल संघर्ष विराम लागू है,

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Middle East War Update:ईरान के साथ सीजफायर के बाद अमेरिका की ओर से एक बार फिर सख्त रुख देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट के जरिए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भले ही फिलहाल संघर्ष विराम लागू है, लेकिन अमेरिका पूरी तरह सतर्क है। ट्रंप ने कहा कि सभी अमेरिकी जहाज और विमान ईरान और उसके आसपास के इलाकों में तैनात रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सैन्यकर्मी अतिरिक्त गोला-बारूद और अत्याधुनिक हथियारों के साथ अलर्ट मोड में रखे गए हैं, ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत जवाब दिया जा सके।

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ट्रंप ने अपने बयान में यह भी साफ कर दिया कि यह सीजफायर स्थायी शांति की गारंटी नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वास्तविक समझौते का पूरी तरह पालन नहीं हुआ, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। उनके शब्दों में, यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो “ऐसी गोलीबारी शुरू होगी, जो पहले कभी नहीं देखी गई।”

इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति दबाव बनाए रखने और ईरान को समझौते के पालन के लिए मजबूर करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन इससे क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

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बता दें कि, मिडिल ईस्ट में पिछले एक महीने से जारी तनाव और संघर्ष के बीच बीते दिन राहत की खबर सामने आई। जहां अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई है, जिससे क्षेत्र में फिलहाल तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस सीजफायर का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने किया, जिसके बाद दोनों देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि भी सामने आई। इस फैसले के साथ ही करीब दो हफ्तों के लिए युद्ध पर विराम लग गया है।

 

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इस्लामाबाद में वार्ता का इंतजार, उधर लेबनान पर इजरायल कर रहा वार पर वार… हिज्बुल्लाह ने भी खोला फायर

Iran Israel war: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान को लेकर शांति वार्ता के शुरू होने का इंतजार है, इधर इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है. दक्षिणी लेबनान के अल शहाबिया में इजरायली हमले के बाद व्यापक नकुसान की तस्वीरें सामने आई हैं, कई घर ढह गए हैं, सड़कों पर मलबा दिख रहा है. और पूरा इलाका सुनसान दिख रहा है. 

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Iran Israel war: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान को लेकर शांति वार्ता के शुरू होने का इंतजार है, इधर इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है. दक्षिणी लेबनान के अल शहाबिया में इजरायली हमले के बाद व्यापक नकुसान की तस्वीरें सामने आई हैं, कई घर ढह गए हैं, सड़कों पर मलबा दिख रहा है. और पूरा इलाका सुनसान दिख रहा है.

पिछले 48 घंटों में इजरायल ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा ठिकानों पर 160 से अधिक मिसाइलें दागी गईं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सिविल डिफेंस के अनुसार इन हमलों में कम से कम 250 से 300 लोग मारे गए और 1000 लोग जख्मी हुए हैं.

इजरायल का हमला मुख्य रूप से बेरूत, सेंट्रल और तटीय इलाके, कॉर्निश के पास हुए. इसके अलावा दक्षिणी लेबनान के टायर, सिडोन, नबातिएह और पूर्वी बेका घाटी में हुए.

इजरायल का दावा है कि हिजबुल्लाह के 100 कमांड सेंटर्स और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन कई नागरिक इलाकों और आवासीय भवनों में भी हमले हुए.

आज इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव तब बढ़ गया, जब लेबनान ने इज़रायल पर देश के दक्षिणी कस्बों पर हवाई हमले करके संघर्ष-विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में हिज़्बुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई की.

एक बयान में ईरान-समर्थित लेबनानी उग्रवादी समूह ने कहा कि उसने सुबह लगभग 8 बजे इजरायली बस्ती मिसगाव अम को निशाना बनाते हुए एक रॉकेट हमला किया. हिज़्बुल्लाह ने कुल मिलाकर 6 रॉकेट लेबनान पर दागे हैं.

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हिज्बुल्लाह ने इस हमले को “लेबनान और उसके लोगों की रक्षा में” किया गया बताया.

हिज्बुल्लाह  ने आगे दावा किया कि यह उसी टारगेट पर उसका दूसरा हमला था, और चेतावनी दी कि जब तक लेबनान के खिलाफ इज़रायल की कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक वह भी अपनी कार्रवाई जारी रखेगा.

इन दावों पर इज़रायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई. इस बीच लेबनान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि किसी भी आगे की बातचीत के लिए युद्धविराम एक पूर्व शर्त बनी हुई है, जो बढ़ते तनाव के बीच बेरूत के कड़े रुख का संकेत है.

रॉयटर्स से बात करते हुए अधिकारी ने आगे कहा कि लेबनान अगले सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली एक बैठक में हिस्सा लेने का इरादा रखता है, जहां चर्चा का मुख्य केंद्र युद्धविराम को अंतिम रूप देना और उसकी औपचारिक घोषणा करना होने की उम्मीद है.

तनाव में यह ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से होने वाली अहम बातचीत से पहले बयानबाजियों का दौर चल रहा है.

ठीक एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेबनान पर हमलों को कम करने का आग्रह किया था. इसके बाद इजरायल के हमले कुछ घंटे तक तो कम हुए लेकिन शुक्रवार को इन हमलों में तेज इजाफा हुआ.

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हालांकि इजरायल के पीएम अभी भी यह कह रहे हैं कि हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने पर ही लेबनान के साथ व्यापक शांति समझौते की दिशा में काम  हो पाएगा.

एक बड़ी अड़चन अभी भी यह बनी हुई है कि क्या लेबनान इस संघर्ष-विराम के दायरे में आता है. जहां एक ओर ट्रंप और नेतन्याहू का मानना है कि यह इसके दायरे में नहीं आता, वहीं दूसरी ओर ईरान का जोर देकर कहना है कि यह इसके दायरे में आता है.

इजरायल लेबनान की पुरानी अदावत

1948 में इज़राइल की स्थापना के बाद से ही इजरायल और लेबनान तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं.  लेबनान के साथ बातचीत की इजरायल की घोषणा ऐसे समय में आई है, जब इस बात पर असहमति बनी हुई है कि क्या युद्धविराम समझौते में इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई में विराम शामिल था या नहीं.

एक व्यक्ति के अनुसार वाशिंगटन में होने वाली इन वार्ताओं में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल इस्सा करेंगे, जबकि इज़रायली पक्ष का नेतृत्व अमेरिका में इज़रायली राजदूत येचिएल लाइटर करेंगे.

शुक्रवार सुबह तक लेबनान सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी और यह भी तत्काल स्पष्ट नहीं था कि लेबनान का प्रतिनिधित्व कौन करेगा.

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Iran Israel war: ईरान के खार्ग पर ताबड़तोड़ हमले, ट्रंप की डेडलाइन पूरी होने से पहले ही US-इजरायल का अटैक

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खार्ग द्वीप पर हमले के बाद चेतावनी देते हुए कहा कि अब संयम खत्म हो चुका है. आईआरजीसी ने चेताते हुए कहा कि अगर हमले ऐसे ही जारी रहे तो अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया जा सकता है. 

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Iran Israel war: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. वह ईरान को लगातार अल्टीमेटम दे रहे हैं. उनके नए अल्टीमेटम की मियाद खत्म होती नजर आ रही है. इस बीच खबर है कि ईरान के खार्ग द्वीप पर ताबड़तोड़ हमले हुए हैं.

मेहर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के ऑयल हब खार्ग द्वीप पर मंगलवार को ताबड़तोड़ हवाई हमले हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, खार्ग पर एक के बाद एक हमले किए जा रहे हैं.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खार्ग द्वीप पर हमले के बाद चेतावनी देते हुए कहा कि अब संयम खत्म हो चुका है. आईआरजीसी ने चेताते हुए कहा कि अगर हमले ऐसे ही जारी रहे तो अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया जा सकता है. इससे वर्षों तक इस क्षेत्र में तेल और गैस संकट बाधित हो सकता है.

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होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप की डेडलाइन नजदीक, वेस्ट एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज

बता दें कि यह हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब एक दिन पहले ही ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन के रेस्क्यू ऑपरेशन की डिटेल जानकारी दी थी. ईरान जंग को छह हफ्ते का समय हो गया है.

इससे पहले पिछले महीने भी अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर हमला कर ईरान के सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था. इन हमलों में ईरान के नौसेना माइन स्टोरेज और मिसाइल बंकर नष्ट कर दिए गए जबकि तेल प्रतिष्ठानों का बाल भी बांका नहीं किया.

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इस द्वीप को इसके आइसोलेशन की वजह से फॉरबिडन आइलैंड भी कहा जाता है. ट्रंप ने पहले भी खार्ग द्वीप पर हमले की धमकी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर होर्मुज में जहाजों पर हमले नहीं रुके तो खार्ग में तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा.

बता दें कि खार्ग द्वीप ईरान का मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल है. यहां से ईरान के 90 फीसदी तेल का एक्सपोर्ट होता है. इसकी स्टोरेज क्षमता लगभग तीन करोड़ बैरल है.

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ट्रंप की एक धमकी… और ईरान के इन ब्रिज और पावर प्लांट्स पर तबाही का है खतरा, अगले 24 घंटे भारी

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने के लिए कहा है. अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाएगा.

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World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने के लिए कहा है. अगर ईरान इस मांग को पूरा नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाएगा.

वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका ‘भारी तबाही’ मचाएगा. ट्रंप इससे पहले ईरान को स्टोन एज में पहुंचाने की धमकी दे चुके हैं.

वहीं अब 4 अप्रैल को जारी 48 घंटे का “फाइनल अल्टीमेटम” इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट्स, तेल ढांचे और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा.

इसमें ट्रंप ने साफ कहा है कि वह ईरान के पावर प्लांट्स और बड़े-बड़े पुलों को निशाना बनाएंगे. इससे कई शहरों का आपसी कनेक्शन कट जाएगा और ईरान अंदरूनी तौर पर भी अलग-थलग हो जाएगा.

ट्रंप की इन धमकियों के बाद सवाल उठता है कि ईरान में कितने पावर प्लांट और कितने अहम पुल हैं, जिन पर अमेरिकी सेना निशाना साध सकती है? क्योंकि ट्रंप की रणनीति अब ये है कि वो ईरान के इन्फ्रास्ट्रक्चर को अब पूरी तरह तहस-नहस करने की ओर बढ़ रहे हैं.

तकरीबन 110 गैस प्लांट हैं ईरान में

इस लिहाज से देखें तो ईरान में सोलर, हाइड्रो (जल), वायु, कोयला और न्यूक्लियर प्लांट हैं. इनमें गैस पर आधारित पॉवर प्लांट्स अधिक हैं. OpenInfraMap के डेटा की मानें तो ईरान में करीब 110 गैस प्लांट हैं जिनमें से कुछ हाइब्रिड हैं.

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बुशहर परमाणु पॉवर प्लांट, बुशेहर काउंटी, (ईरान) में है जो कि न्यूक्लियर साइट के तौर पर देखी जाती है. यह 1,000 मेगावाट (MW) की क्षमता वाला एक परमाणु ऊर्जा केंद्र है. इसका निर्माण 1970 के दशक में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन 1979 की क्रांति के बाद, इसे रूस की रोसाटॉम (Atomstroyexport) ने पूरा किया.

इसके अलावा उत्पादन के मामले में तीन सबसे बड़े प्लांट गैस से चलते हैं-

दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट- यह राजधानी तेहरान से लगभग 70 km दक्षिण-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,868 MW है.

शाहिद सलीमी- यह माजंदरान प्रांत में है कैस्पियन सागर के पास स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,215 MW है.

शाहिद रजाई- यह तेहरान शहर से लगभग 110 km उत्तर-पूर्व में स्थित है. इसकी उत्पादन क्षमता- 2,043 MW है.

इसके अलावा और भी यूनिट्स हैं जो ईरान की ऊर्जा का प्रमुख सोर्स हैं

इनमें जहरोम पॉवर प्लांट, खानूज कंबांइड साइकिल पॉवर प्लांट, गिलान पॉवर प्लांट भी प्रमुख है.

जीवाश्म ईंधनों से बिजली बनाता है ईरान

ईरान अपनी ज्यादातर बिजली जीवाश्म ईंधनों से बनाता है. 2023 में ईरान ने न्यूक्लियर एनर्जी से 5,740 GWh बिजली बनाई.  थर्मल सेक्टर में रामिन अहवाज़ थर्मल पावर प्लांट (करीब 1900 मेगावाट) और दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट (लगभग 2800–3000 मेगावाट) सबसे बड़े संयंत्रों में शामिल हैं. जहरोम पावर प्लांट (करीब 1400 मेगावाट) और गनावेह पावर प्लांट (लगभग 484 मेगावाट) भी गैस बेस्ड प्रमुख इकाइयां हैं.

जलविद्युत क्षेत्र में करुन-3 हाइड्रोपावर प्लांट, मस्जिद-ए-सुलेमान हाइड्रोपावर प्लांट और शहीद अब्बासपुर हाइड्रोपावर प्लांट जैसे बड़े बांध आधारित संयंत्र शामिल हैं, जिनकी क्षमता लगभग 2000 मेगावाट के आसपास है. इसके अलावा केर्मान पावर प्लांट और शाहिद राजाई पावर प्लांट जैसे थर्मल संयंत्र भी सैकड़ों मेगावाट क्षमता के साथ नेशनल ग्रिड को मजबूती देते हैं.

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कुल मिलाकर ईरान की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 90 गीगावाट के आसपास है, जिसमें गैस आधारित संयंत्रों का दबदबा है, जबकि जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा सीमित लेकिन रणनीतिक भूमिका निभाते हैं.

ईरान में कितने ब्रिज?

अब आते हैं ईरान के पुलों पर. ईरान में कई बड़े और ऐतिहासिक ब्रिज हैं, जो न सिर्फ शहरों के बीच में कनेक्टिविटी बढ़ाते हैं, बल्कि उनकी भूमिका ईरान की विरासत बचाए रखने में भी है.

करुण-4 आर्च ब्रिज (Karun 4 Arch Bridge): करुण नदी पर स्थित, यह ईरान के सबसे खास आर्च पुलों में से एक है.

करज ब्रिज (Karaj bridge): 2026 में हुए संघर्षों के दौरान चर्चा में आया यह एक प्रमुख ब्रिज है

मेशगिन शहर सस्पेंशन ब्रिज (Meshgin Shahr Suspension Bridge): अर्दबील में स्थित, यह मध्य पूर्व का सबसे लंबा सस्पेंशन पुल है.

लाली ब्रिज (Lali Bridge): ऊपरी गोटवंद बांध के पास स्थित.

खाजू ब्रिज (Khaju Bridge): इस्फ़हान में ज़ायंडेह नदी पर बना एक ऐतिहासिक पुल, जो 1650 के आसपास बना था.

बता दें कि US और इज़रायली सेनाओं ने हाल ही में अल्बोर्ज़ प्रांत के करज के B1 पुल पर दो हमले किए. इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई और पुल पूरी तरह से तबाह हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि हमलों के बाद पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया. करीब एक हजार मीटर लंबा B1 पुल, ईरान के अहम मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता रहा है.

इसे तेहरान और करज के बीच भीड़ कम करने और देश के उत्तरी क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए बनाया गया था. ट्रंप ने कहा था. ‘ईरान का सबसे बड़ा पुल ढह गया है, अब इसका दोबारा इस्तेमाल कभी नहीं हो पाएगा. अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है.’

 

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