छत्तीसगढ़
रायपुर : अब चाहे बारिश हो या धूप, पार्वती की सब्जियां बिकती है खूब

रायपुर|सब्जी का धंधा करने वाली पार्वती गोस्वामी को वह दिन आज भी याद है, जब वह सड़क किनारे सब्जियों की अपनी दुकान लगाती थी। दो साल पहले उसे सब्जी बेचने के लिए एक तरफ खूब मेहनत करनी पड़ती थी तो दूसरी तरफ बारिश और गर्मी जैसे दिनों में उसकी मेहनत पर पानी फिर जाता था। गर्मी में धूप से उसकी ताजी और हरी सब्जियां खराब हो जाती थी। वहीं बारिश में सड़क किनारे कीचड़ और तेज बारिश को देखते हुए उसे आनन-फानन में अपनी दुकान समेटना भी पड़ जाता था। इस तरह उसका पूरा धंधा बारिश और गर्मी की भेंट चढ़ जाता था। अब ऐसा नहीं होता है। पार्वती रोजाना बिना किसी बाधा के अपनी दुकान समय पर लगाती है और समय पर बंद करती है। बारिश हो या धूप उसकी सब्जियां भी खराब नहीं होती। उसके दुकान पर ग्राहक आते हैं और खुशी-खुशी सब्जियां ले जाते हैं। पहले घाटे में रहने वाली पार्वती अब सब्जियों की खूब बिक्री से फायदे में रहती है।
]रायपुर के महोबाबाजार अंतर्गत शिवानंद बस्ती में रहने वाली पार्वती गोस्वामी, सूरज साहू, सहित अन्य कई सब्जी विक्रेता है, जो पहले सड़क के किनारे फुटपाथ में पसरा लगाकर सब्जियां बेचा करते थे। लगभग दो साल पहले सब्जी बेचने के लिए कोई ठोस ठिकाना नहीं होने की वजह से बारिश और गर्मी के दिनों में इन्हें अक्सर परेशानी उठानी पड़ती थी। सब्जी बिक्री में व्यवधान तो होता ही था। सब्जियां खराब होने से घाटा भी सहना पड़ता था। अब जबकि पौनी पसारी योजना अंतर्गत आसपास सब्जी सहित अन्य सामग्रियों की बिक्री करने वाले विक्रेताओं को पक्का शेड युक्त स्थान मिल गया है तो इन्हें अपना सामान बेचने में बहुत आसानी हो रही है। महोबाबाजार में पौनी पसारी योजना अंतर्गत तैयार भवन में सब्जी की दुकान लगाने वाली पार्वती गोस्वामी ने बताया कि वह विगत 10 साल से सड़क किनारे पसरा लगाकर सब्जियां बेचा करती थी। इससे बारिश और धूप में उन्हें नुकसान सहने के साथ परेशानी में उठानी पड़ती थी। अब एक निश्चित ठिकाना मिल जाने से उसे बरसात और गर्मी में किसी तरह का कोई परेशानी उठाना नहीं पड़ता। उसने बताया कि समय पर दुकान लगाने और बंद करने से उसे अच्छी आमदनी हो जाती है। यहां सब्जी बेचने वाले सूरज साहू ने बताया कि पहले उसके पिताजी और वह सड़क किनारे पसरा लगाकर सब्जी बेचते थे। अब पक्के भवन के नीचे सब्जियों बेचते हैं। पौनी पसारी योजना से बनाए पक्के भवन में बारिश और गर्मी के दिनों में आसानी से सब्जी बेच सकते हैं। पार्वती और सूरज साहू सहित अन्य सब्जी विक्रेताओं ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा पौनी पसारी योजना अंतर्गत बनाए गए शेडयुक्त पक्के भवन उपलब्ध कराने के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
परंपरागत व्यवसाय को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने पौनी-पसारी योजना प्रारंभ की है। इस योजना के तहत नगरीय निकायों के बाजारों में परंपरागत व्यवसाय से जुड़े लोगों को जगह उपलब्ध कराए जाने के साथ ही व्यवसाय की सुविधा महैया कराई जा रही है। योजना से लगभग 12 हजार परिवारों को रोजगार मिल सकेगा। प्रदेश के सभी 169 नगरीय निकायों में 261 पौनी पसारी स्वीकृत किए गए हैं। पौनी पसारी योजना के तहत ऐसे परंपरागत व्यवसाय से जुड़े परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने की पहल मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया की दूूूर-दृष्टि सोच के परिणामस्वरूप आज हजारों छोटे व्यवसायियों को बड़ी राहत मिली है।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
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कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है


















