देश
US Election 2024: ट्रंप चुनाव जीते तो क्या खारिज हो जाएंगे मुकदमे, जानें क्या कहता है अमेरिकी कानून
US Presidential Election 2024: डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अमेरिका में कई आपराधिक मामले चल रहे हैं। कमला हैरिस से उनको राष्ट्रपति चुनाव में कड़ी टक्कर मिल रही है। अगर डोनाल्ड ट्रंप चुनाव में जीत जाते हैं तो क्या उनके खिलाफ चल रहे मामले खारिज हो जाएंगे? इसके बारे में जानते हैं।
US Election 2024: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को कमला हैरिस से कड़ी चुनौती मिल रही है। ट्रंप के खिलाफ अमेरिका में कई आपराधिक मामले चल रहे हैं। सवाल यह है कि अगर ट्रंप को जीत मिली तो क्या उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले खारिज हो जाएंगे? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अगर राष्ट्रपति बन जाते हैं तो उनके खिलाफ चल रहे केस खारिज भी हो सकते हैं, वहीं, कई मामलों में सजा कम हो सकती है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रिपब्लिकन पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। विशेषज्ञ मानकर चल रहे हैं कि अगर ट्रंप जीते तो उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों को खारिज किया जा सकता है। ट्रंप के खिलाफ कुछ संघीय मामले भी चल रहे हैं।
एक मामले में ठहराए जा चुके दोषी
ट्रंप पर फिलहाल न्यूयॉर्क हश मनी केस, वर्गीकृत दस्तावेज और चुनाव में हस्तक्षेप को लेकर मामले विचाराधीन हैं। एबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ट्रायल डिविजन के पूर्व प्रमुख करेन फ्रीडमैन एग्निफिलो ने ट्रंप की जीत को लेकर बयान जारी किया है। करेन के अनुसार अगर ट्रंप जीते तो सभी ट्रायल बंद हो जाएंगे। ट्रंप को एडल्ट स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को कथित तौर पर एक लाख 30 हजार डॉलर (10935405 रुपये) की राशि देने के मामले रिकॉर्ड में हेराफेरी करने पर दोषी ठहराया गया था।
स्टॉर्मी ने ट्रंप पर एक दशक पहले यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। यह पैसा 2016 में ट्रंप के राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने से पहले दिया गया था। ट्रंप ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया था। इस मामले में ट्रंप को 4 साल की जेल हो सकती है। 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव संपन्न होना है। ट्रंप को इस मामले में 26 नवंबर को सजा सुनाई जा सकती है। मैनहट्टन के जज जुआन एम मर्चेन ने सितंबर में ट्रंप को राहत देते हुए सजा स्थगित करने का ऐलान किया था।
मौजूदा राष्ट्रपति पर नहीं चलता केस
उन्होंने कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति को फिलहाल दंडित करना चुनाव में हस्तक्षेप करने के बराबर होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप को जेल नहीं भेजा जाएगा। जज मर्चेन हल्की सजा उनको सुना सकते हैं। न्याय विभाग के विशेष वकील जैक स्मिथ भी ट्रंप पर दो संघीय मामले दायर कर चुके हैं। 2020 चुनाव में ट्रंप पर चार संघीय आरोप लगे थे। यूएस को धोखा देने की कोशिश, सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने की साजिश, अधिकारों के खिलाफ साजिश आदि के आरोप उन पर लगे थे। विशेष वकील स्मिथ के आरोपों के बाद अब इन मामलों में ट्रायल रुक चुका है। न्याय विभाग की नीति भी है कि किसी मौजूदा राष्ट्रपति के खिलाफ़ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। ऐसे में अगर ट्रंप राष्ट्रपति बने तो उनके खिलाफ दर्ज सभी केस खारिज हो जाएंगे।
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
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परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
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भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
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खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।
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