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मोदी सरकार युवा लेखकों के लिए लेकर आयी युवा – प्रधानमंत्री योजना, ऐसे करें Apply

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शिक्षा मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने आज युवा लेखकों को  प्रशिक्षित करने के लिए युवा – प्रधानमंत्री योजना की शुरुआत की। यह युवा और नवोदित लेखकों (30 वर्ष से कम आयु) को प्रशिक्षित करने के लिए एक लेखक परामर्श कार्यक्रम है, जिससे पढ़ने, लिखने और पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके व वैश्विक स्तर पर भारत और भारतीय लेखन को प्रदर्शित किया सके।

युवा (युवा, आगामी और बहुमुखी लेखकों) की शुरुआत युवा लेखकों को भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के बारे में लिखने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है। 31 जनवरी, 2021 को मन की बात के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवा पीढ़ी से स्वतंत्रता सेनानियों, स्वतंत्रता से जुड़ी घटनाओं, स्वतंत्रता संग्राम की अवधि के दौरान वीरता की गाथा के बारे में अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों में लिखने का आह्वान किया था। उनका कहना था कि यह भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर पर भारत की स्वतंत्रता के नायकों को सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि के रूप में होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह विचारशील नेताओं की एक श्रेणी भी तैयार करेगा जो भविष्य की दिशा तय करेगा।”

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युवा, भारत@75 परियोजना (आजादी का अमृत महोत्सव) का एक हिस्सा है। यह योजना विस्मृत नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों, अज्ञात और भूले हुए स्थानों और राष्ट्रीय आंदोलन में उनकी भूमिका और अन्य विषय वस्तुओं पर लेखकों की युवा पीढ़ी के दृष्टिकोण को एक अभिनव व रचनात्मक तरीके से सामने लाने के लिए है। इस प्रकार यह योजना लेखकों की एक धारा विकसित करने में सहायता करेगी जो भारतीय विरासत, संस्कृति और ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए विषयों के अलग-अलग पहलुओं पर लिख सकते हैं।

इसके लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में शिक्षा मंत्रालय के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत संरक्षण के सुव्यवस्थित चरणों के तहत इस योजना के चरणबद्ध निष्पादन को सुनिश्चित करेगा। इस योजना के तहत तैयार की गई पुस्तकों का प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत करेगा। इसके अलावा संस्कृति और साहित्य के आदान-प्रदान को सुनिश्चित करने के लिए इनका अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद किया जाएगा, जिससे ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत‘ को बढ़ावा मिलेगा। वहीं चयनित युवा लेखक विश्व के कुछ बेहतरीन लेखकों के साथ बातचीत करेंगे और साहित्यिक उत्सवों आदि में भाग लेंगे।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने युवा दिमागों के सशक्तिकरण और एक सीखने वाला इकोसिस्टम बनाने पर जोर दिया है, जो युवा पाठकों/सीखने वालों को भविष्य की दुनिया में नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार कर सकता है। इस संदर्भ में, युवा रचनात्मक संसार के भविष्य के नेताओं की नींव रखने में एक लंबा सफर तय करेगा।

युवा (युवा, आगामी और बहुमुखी लेखकों) की मुख्य विशेषताएं:

  • 1 जून से 31 जुलाई, 2021 तक https://www.mygov.in/ के माध्यम से आयोजित होने वाली अखिल भारतीय प्रतियोगिता के जरिए कुल 75 लेखकों का चयन किया जाएगा।
  • विजेताओं की घोषणा 15 अगस्त, 2021 को की जाएगी।
  • युवा लेखकों को प्रख्यात लेखक/संरक्षक प्रशिक्षित करेंगे।
  • संरक्षण के तहत, पांडुलिपियों को प्रकाशन के लिए 15 दिसंबर, 2021 तक पढ़ा जाएगा।
  • प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन 12 जनवरी, 2022 को राष्ट्रीय युवा दिवस (युवा दिवस) के अवसर पर किया जाएगा।
  • संरक्षण योजना के तहत छह महीने की अवधि के लिए प्रत्येक लेखक को 50,000 रुपये प्रति माह की समेकित छात्रवृत्ति का भुगतान किया जाएगा।
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‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

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रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना

छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।

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सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज

केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:

“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम

आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”

‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’

दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।

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छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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देश

पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।

  • महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
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साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।

  • पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल

पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

  • ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
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वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।

  • संगठन और रणनीति का मिला लाभ

बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।

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