छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में अब तक 34.30 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हुई

रायपुर: राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के लिए एक दिसम्बर से शुरू हुए धान खरीदी के बीते 20 दिनों में कल शाम साढ़े 6 बजे तक 9 लाख 36 हजार 806 किसानों से 34 लाख 30 हजार 276 मीटरिक टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। किसानों से 2483 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से धान खरीदी की जा रही है। धान खरीदी के एवज में किसानों को अब तक मार्कफेड द्वारा बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 6250 करोड़ 85 लाख रूपए जारी किया गया है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री बघेल की पहल पर इस वर्ष धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव भी तेजी से हो रहा है। अब तक 11 लाख 75 हजार 163 मीटरिक टन का डीओ जारी कर दिया गया है। उपार्जन केन्द्रों से मिलर्स द्वारा 8,38,958 मीटरिक धान का उठाव कर लिया गया है।
धान खरीदी के 20वें दिन भी राजनांदगांव जिला, प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के मामले में पहले स्थान पर है। राजनांदगांव जिले में 3,28,434 मीटरिक टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। जांजगीर-चांपा जिला प्रदेश में धान खरीदी में दूसरे पायदान पर है। जिले में 2,60,246 मीटरिक टन धान की खरीदी हुई है। बेमेतरा जिला धान खरीदी में आज राज्य में तीसरे क्रम पर है। बेमेतरा जिला में 2,57,038 मीटरिक टन धान की खरीदी की गई है।
खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 दिसम्बर तक चालू विपणन वर्ष में समर्थन मूल्य पर राज्य के बस्तर जिले में 47,349 मीटरिक टन, बीजापुर जिले में 13,817 मीटरिक टन, दंतेवाड़ा जिले में 2,394 मीटरिक टन, कांकेर जिले में 1,10,352 मीटरिक टन, कोण्डागांव जिले में 55,462 मीटरिक टन, नारायणपुर जिले में 7,279 मीटरिक टन, सुकमा जिले में 8,446 मीटरिक टन, बिलासपुर जिले में 1,79,823 मीटरिक टन, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 22,472 मीटरिक टन, जांजगीर-चांपा जिले में 2,60,246 मीटरिक टन, कोरबा जिले में 39,274 मीटरिक टन, मुंगेली जिले में 1,49,004 मीटरिक टन, रायगढ़ जिले में 1,85,068 मीटरिक टन, बालोद जिले में 2,22,372 मीटरिक टन, बेमेतरा जिले में 2,57,038 मीटरिक टन, दुर्ग जिले में 1,57,963 मीटरिक टन, कवर्धा जिले में 1,68,819 मीट्रिक टन, राजनांदगांव जिले में 3,28,434 मीटरिक टन, बलौदाबाजार जिले में 2,49,852 मीटरिक टन, धमतरी जिले में 1,50,162 मीटरिक टन, गरियाबंद जिले में 1,24,551 मीटरिक टन, महासमुंद जिले में 2,38,781 मीटरिक टन, रायपुर जिले में 1,86,115 मीटरिक टन, बलरामपुर जिले में 50,126 मीटरिक टन, जशपुर जिले में 35,362 मीटरिक टन, कोरिया जिले में 39,175 मीटरिक टन, सरगुजा जिले में 54,392 मीटरिक टन और सूरजपुर जिले में 86,185 मीटरिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है
छत्तीसगढ़
तीसरा बड़ा मंगलवार आज : अपनी मनोकामना के अनुसार हनुमान जी को इन चीजों का लगाए भोग …

Dharm Desk- ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. आज 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है. जो पुरुषोत्तम मास के साथ पड़ने से और अधिक खास बन गया है. इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूजा-अर्चना का विशेष क्रम जारी है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमानजी के मिलन हुआ था. इसी कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है.
1.गुड़-चना चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग अर्पित करना अत्यंत प्रिया है. यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष से जुड़े कष्टों को शांत करने के लिए किया जाता है. नियमित रूप से यह भोग चढ़ाने से जीवन में स्थिरता आती है और बाधाओं में कमी देखने को मिलती है. ऐसे में बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को गुड़ चने भोग लगाकर प्रार्थना करना चाहिए.
2.नारियल अर्पित करने से क्या होता है
इस दिन को लेकर मानता है कि साबुत नारियल पर सिंदूर लगाकर और कलावा बांधकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संबंधी समस्याओं में सुधार आता हैं.
3.पान का बीड़ा चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करना खास तौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है. जिनके काम अटक रहे होते हैं. पूजा के बाद पान चढ़ाकर कार्य सिद्धि की कामना की जाती है. इससे कठिन और रुके हुए कार्यों में गति आने लगती है और हनुमान जी से प्रार्थना की जाती है कि आप मेरा इस कष्ट या पीड़ा को हारने का बीड़ा आपको मैं सोचता हूं.
4.इमरती और लड्डू चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को इमरती और बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय है. इनका भोग लगाने से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. यह प्रसाद चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में खुशहाली का वातावरण बनता है.
5.केसर भात अर्पित करने से क्या होता है
केसर भात का भोग हनुमान जी को अर्पित करने से कुंडली के दोषों को शांत करने का प्रयास किया जाता है. यह भोग विशेष रूप से बड़े मंगल के दिन किया जाता है. इससे जीवन में आने वाले संकटों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है. इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.
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