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छत्तीसगढ़

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे केन्द्रीय चिकित्सालय बिलासपुर में 137 मरीजों का निःशुल्क पेसमेकर कर बनाया रिकॉर्ड

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                    दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के केन्द्रीय चिकित्सालय, बिलासपुर मे आज दिनांक 25 मार्च, 2022 (शुक्रवार) सुबह 9 बजे से 21वें नि:शुल्क पेस मेकर जांच शिविर का आयोजन किया गया । *इस पेस मेकर जांच शिविर में 137 मरीजों के नि:शुल्क पेस मेकर जांच किया गया* । छत्तीसगढ़, मप्र के विभिन्न हिस्सों से आए मरीज और महाराष्ट्र नामत: नैनपुर, डोंगरगढ़, नागपुर, भिलाई, रायपुर, भोपाल, अंबिकापुर, रायगढ़, शहडोल, मुंगेली और बिलासपुर ने इस शिविर में भाग लिया था । रेलवे के मरीजों की संख्या 84 थी और गैर-रेलवे की ओर से 53 सबसे कम उम्र की मरीज 14 साल की एक बच्ची थी और सबसे बड़ा मरीज 92 साल का एक पुरुष था । डिवाइस मुफ्त 12 मरीज अनियमित दौड़ रहे थे और असामान्य रूप से तेजी से धड़कने लगे। उन्हें उपयुक्त दवाएं निर्धारित की गईं और तदनुसार डिवाइस को फिर से प्रोग्राम किया गया ।

             इस नि:शुल्क पेस मेकर जांच शिविर का दौरा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री आलोक कुमार ने किया । उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों और राज्य के बाहर से आए शिविर के मरीजों के साथ संक्षिप्त बातचीत की । उन्होंने ऐसे शिविर के आयोजकों की सराहना की है जो बिलासपुर जैसे दूरस्थ स्थान पर इतने वर्षों से मानव जाति की ऐसी अमूल्य सेवा कर रहे हैं । श्री आलोक कुमार के साथ केंद्रीय अस्पताल/एसईसीआर के चिकित्सा निदेशक डॉ.एस.ए.नजमी,डॉ.एस.धन,डॉ.एस.एल.मैथ्यूज और सचिव श्रीहिमांशु जैन भी थे ।

            पेसमेकर जीवन रक्षक उपकरण होते हैं जो उन रोगियों में छाती के सामने की त्वचा के नीचे लगाए जाते हैं जो कॉलर बोन के नीचे दोनों ओर होते हैं, जिन्हें घातक ताल गड़बड़ी का पता चला है। लेकिन एक बार उपकरण प्रत्यारोपित हो जाने के बाद मरीज आमतौर पर भीड़ में खो जाते हैं, इसका पता तब चलता है जब उनके उपकरण विफल हो जाते हैं, खराब हो जाते हैं या बैटरी जीवन समाप्त हो जाता है। यह वास्तव में आज अत्यधिक उन्नत चिकित्सा विज्ञान के युग में नोट करने के लिए बहुत ही दयनीय है। दिशा-निर्देशों के अनुसार हर साल औसतन एक एकल कक्ष पेसमेकर का मूल्यांकन करने की आवश्यकता होती है, जबकि प्रत्येक छठे महीने में एक दोहरे कक्ष के रूप में। मानव जाति को सर्वोत्तम संभव सेवाएं प्रदान करने के लिए केंद्रीय अस्पताल, एसईसीरेलवे, बिलासपुर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सीकेदास ने हर छठे महीने बिलासपुर और आसपास के सभी हृदय रोगियों के लिए यह पेसमेकर पूछताछ [जांच] शिविर नि: शुल्क शुरू किया था। फरवरी 2011। इस बार कोविड-19 की महामारी की स्थिति के कारण शिविर नियमित रूप से आयोजित नहीं किया जा सका। पिछला शिविर 14 फरवरी 2020 को आयोजित किया गया था। रेलवे के साथ-साथ गैर-रेलवे रोगियों को यह सुविधा पूरी तरह से मुफ्त प्रदान की गई है। ऐसे प्रत्येक शिविर में डिवाइस में विभिन्न दोषों का पता लगाकर और उन्हें ठीक करके कम से कम 3 से 4 रोगियों की जान बचाई गई है। भारत में अग्रणी पेसमेकर कंपनियों द्वारा अपने वरिष्ठ इंजीनियरों को उन्नत उपकरणों [प्रोग्रामर] के साथ प्रतिनियुक्त करके ऐसे कीमती और सफल शिविरों के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे सेंट जूड, मेडट्रॉनिक, बोस्टन साइंटिफिक और बायोट्रॉनिक हैं। यह एक छत के नीचे मानव जाति के लिए एक अत्यधिक समन्वित कुशल तकनीकी सेवा है। यह अपनी तरह का अनूठा है और भारत में पहली बार डॉ. दास द्वारा रिपोर्ट किया गया है ।
                  इस अवसर पर डॉ. दास ने सभी भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर विचार करने और बिलासपुर जैसे छोटे शहरों में इस तरह के शिविरों के समन्वय और आयोजन के लिए अपने दैनिक व्यस्त कार्यक्रम में कुछ समय निर्धारित करने की विनम्र अपील की है। वास्तव में यह कार्डियोलॉजी अभ्यास का एक उपेक्षित क्षेत्र है जिसे प्यार और देखभाल करने की आवश्यकता है। इस प्रकार के शिविर छोटे शहरों में आयोजित किए जाने चाहिए जहां पेसमेकर कंपनियां दैनिक सेवाएं प्रदान नहीं कर सकतीं । ऐसा करने से हजारों पेसमेकर मरीजों की अकाल मृत्यु से बचा जा सकता है । इस कैंप में किसी भी डॉक्टर/इंजीनियर/सहायक स्टाफ या कंपनियों को कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा । हर छठे महीने में मानव जाति के लिए यह सेवा करना इस टीम के लिए एक लत बन गई है। इस शिविर के लिए डॉ. सीकेदास, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएल भांजा, डॉ मारुति त्रिपाठी, डॉ मनमीत टोपनो, डॉ अभिषेक सुख, डॉ रंजीत थवैत, डॉ प्रकाश जायसवाल, डॉ आशीष पुरोहित, डॉ. दीपक देवांगन, और एएनओ श्रीमती सुनीता सोनवणे के साथ नर्सिंग स्टाफ श्रीमती ई.इनेस, मीना, नामलिन, मनीषा, जीवन लाल, अमिता, शशि, उमाशंकर, भरतू, बीना, कौशल्या, रीतू और विल्सन।  अजीत कुमार जंघेल और घनश्याम का विशेष योगदान था। इस अमूल्य शिविर के लिए महत्वपूर्ण योगदान 4 अंतरराष्ट्रीय पेसमेकर कंपनियों के इंजीनियरों का था जिन्होंने मानव जाति के लिए अपनी पूरी धर्मार्थ सेवा दी। वे एमआर थे । सुधीर दत्ता (सेंट जूड),  मोहित पचौरी (मेडट्रॉनिक),  राहुल चोपडे (बोस्टन) और  लुकी शर्मा (बायोट्रॉनिक्स) ।
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केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

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बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.

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इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.

जा सकती थी नवजात शिशु की जान

डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,

सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.

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परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.

पहली बार आया अनोखा केस

सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.

 

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छत्तीसगढ़

साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।

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महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार

इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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कैरियर

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

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Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

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बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।

लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार

इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट

पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।

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