छत्तीसगढ़
बिलासपुर: कलेक्टर ने की कोविड-19 संक्रमण के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा

बिलासपुर। कोविड केयर को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी है। कलेक्टर ने आज स्वास्थ्य विभाग की बैठक में कहा कि टेस्टिंग, ट्रैसिंग, टीकाकरण, कोविड प्रोटोकाॅल संक्रमण को रोकने का महत्वपूर्ण हथियार है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कोविड अस्पताल, कोविड केयर सेंटर एवं प्राईवेट अस्पताल कुल मिलाकर 47 अस्पतालों में कोविड मरीजों के लिए 2 हजार 344 बेड की व्यवस्था कर ली गई है, जिनमें 844 आॅक्सीजन बेड, 646 आईसीयू के बेड, 348 एचडीयू बेड शामिल है। 160 वेंटिलेटर्स की व्यवस्था की गई है।
मंथन सभाकक्ष में आयोजित बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सिम्स में दो आॅक्सीजन प्लांट 1 हजार एलपीएम एवं 870 एलपीएम का तैयार है। इसी प्रकार जिला अस्पताल में एक आॅक्सीजन प्लांट 570 एलपीएम का तैयार है। कलेक्टर ने सीजीएमएससी के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तीन दिवस के भीतर 1 हजार एलपीएम का दूसरा आॅक्सीजन प्लांट शुरू करवाएं। कलेक्टर ने कहा कि संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी है। टीकाकरण होने से लोग संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति नहीं आती है। जिन्होंने कोविड का दूसरा डोज नहीं लगाया है वे दूसरा डोज अवश्य लगवाएं। जिन लोगों को दूसरा डोज लगाया जाना है ऐसे व्यक्तियों को फोन कर उन्हें इसके लिए प्रेरित करते हुए नजदीकी टीकाकरण केन्द्रों की जानकारी देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि स्वयं सुरक्षित होने के साथ-साथ बच्चों को सुरक्षित रखना जरूरी है। बैठक में बताया गया कि 15 से 18 वर्ष आयु के 50 प्रतिशत बच्चों का वैक्सीनेशन हो गया है। कलेक्टर ने शेष बचे बच्चों के लिए कार्ययोजना बनाकर वैक्सीनेशन पूरा करने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी को कहा कि निजी स्कूल संचालकों को कार्ययोजना बनाकर स्पष्ट बता दे कि टीकाकरण कब किया जाएं। टीकाकरण के दिन स्कूलों में पूरे बच्चे अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने कहा।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चित्रकूट, बिल्हा, तखतपुर, रतनपुर कोविड केयर सेंटर में कोविड मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था कर ली गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि डयूटी रोस्टर बनाकर रखे। अस्पतालों में वेंटिलेटर, आॅक्सीजन कन्सन्ट्रेटर, बैड, सैनेटेजाईर, पीपीई किट, आॅक्सीजन सिलेण्डर, दवाईयों की सुदृढ़ व्यवस्था होनी चाहिए। होम आईसालेशन में रहने वाले मरीजों से डाॅक्टर फोन से बात कर स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहे।
कलेक्टर ने की नागरिकों से कोविड-19 के प्रोटोकाॅल का पालन करने की अपील –
कलेक्टर डाॅ. मित्तर ने नागरिकों से अपील की है कि मास्क लगाएं एवं कोविड -19 के प्रोटोकाॅल का पालन करें। कोरोना की पहली एवं दूसरी लहर की त्रासदी से हम अभी-अभी उबरे है और हमारे सामने कोरोना की तीसरी लहर की यह चुनौती सामने है। जिसका सामना करने के लिए हमें कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि सर्दी, खांसी एवं बुखार के लक्षण आने पर तत्काल कोरोना जांच कराएं। उन्होंने नागरिकों से आव्हान किया कि जिन्होंने अपना दूसरा डोज नहीं लगवाया है। वे तत्काल कोविड टीकाकरण केंद्र में जाकर टीका अवश्य लगवाएं। उन्होंने कहा कि पात्र लोग बूस्टर डोज भी अनिवार्य रूप से लगवाएं।
छत्तीसगढ़
केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…
बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.
ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.
इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.
जा सकती थी नवजात शिशु की जान
डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,
सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.
परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.
पहली बार आया अनोखा केस
सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.
छत्तीसगढ़
साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार
इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कैरियर
कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा
Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।
शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।
बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।
लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार
इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट
पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।
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