छत्तीसगढ़
राज्य में आज से अस्तित्व में आ जाएंगे 13 और नए अनुविभाग और 18 नई तहसीलें

रायपुर| 20 अगस्त से राज्य में 13 अनुविभाग और 18 तहसीलें अस्तित्व में आ जाएंगी और यहां विधिवत कामकाज शुरू हो जाएगा. नवगठित अनुविभागों एवं तहसीलों का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 अगस्त को महासमुंद में पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती ‘सद्भावना दिवस‘ के अवसर पर वर्चुअल शुभारंभ करेंगे. इन नवीन तहसीलों एवं अनुविभाग के प्रारंभ होने से राज्य में अब 122 राजस्व अनुविभाग एवं 250 तहसीलें हो जाएंगी|
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बीते पौने पांच सालों में शासन-प्रशासन को आम जनता के करीब लाने और प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और कसावट लाने के उद्देश्य से राज्य में नए जिले, अनुविभागों एवं तहसीलों को बनाए जाने की घोषणा की जाती रही है. वर्ष 2018 में राज्य में जिलों की संख्या 27 थी. गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगगढ़-बिलाईगढ़, मोहला-मानपुर-चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिलों का गठन होने के बाद राज्य में जिलों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है. इसी तरह मुख्यमंत्री द्वारा अभी हाल ही में राज्य में 13 नवीन अनुविभाग एवं 18 नवीन तहसीलों के गठन की घोषणा की गई थी, जिनका विधिवत शुभारंभ 20 अगस्त को होगा. नवीन अनुविभागों एवं तहसीलों की स्थापना से शासकीय योजनाओं के सुचारू रूप से क्रियान्वयन एवं प्रशासनिक कामकाज में कसावट लाने में सुविधा होगी. शासन की योजनाएं एवं मूलभूत सुविधाएं आम जनता को आसानी से उपलब्ध होगी
नवगठित 13 अनुविभाग
वर्ष 2023 में 13 नवीन अनुविभाग जिला बस्तर अंतर्गत अनुविभाग बकावण्ड, जिला सुकमा अंतर्गत अनुविभाग छिंदगढ़, जिला सूरजपुर अंतर्गत अनुविभाग रामानुजनगर, जिला बालोद अंतर्गत अनुविभाग डौंडी, जिला जशपुर अंतर्गत अनुविभाग फरसाबहार, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा अंतर्गत अनुविभाग पलारी, जिला गरियाबंद अंतर्गत अनुविभाग छुरा, जिला बीजापुर अंतर्गत अनुविभाग उसूर (आवापल्ली), जिला महसमुंद अंतर्गत अनुविभाग बसना, जिला सरगुजा अंतर्गत अनुविभाग लुण्ड्रा (धौरपुर) एवं अनुविभाग उदयपुर, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर अंतर्गत अनुविभाग केल्हारी तथा जिला बलरामपुर-रामानुजनगर अंतर्गत अनुविभाग शंकरगढ़ का गठन किया गया है.
नवगठित 18 तहसील
वर्ष 2023 में 18 नवीन तहसील जिला रायगढ़ अंतर्गत तहसील कापू, जिला सूरजपुर अंतर्गत तहसील भटगांव, जिला कबीरधाम अंतर्गत तहसील कुकदुर, जिला बस्तर अंतर्गत तहसील करपावण्ड जिला सुकमा अंतर्गत तहसील दोरनापाल एवं तहसील जगरगुण्डा, जिला राजनांदगांव अंतर्गत तहसील घुमका और तहसील कुमरदा, जिला बिलासपुर अंतर्गत तहसील पचपेड़ी, जिला जशपुर अंतर्गत तहसील बागबहार, जिला कांकेर अंतर्गत तहसील बान्दे, तहसील आमाबेड़ा एवं तहसील कोयलीबेड़ा, जिला सक्ती अंतर्गत तहसील चंद्रपुर, जिला गरियाबंद अंतर्गत तहसील फिंगेश्वर, जिला बेमेतरा अंतर्गत तहसील दाढ़ी, जिला सक्ती अंतर्गत तहसील भोथिया तथा जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंतर्गत तहसील सरसींवा का गठन किया गया है.
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है
छत्तीसगढ़
तीसरा बड़ा मंगलवार आज : अपनी मनोकामना के अनुसार हनुमान जी को इन चीजों का लगाए भोग …

Dharm Desk- ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. आज 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है. जो पुरुषोत्तम मास के साथ पड़ने से और अधिक खास बन गया है. इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूजा-अर्चना का विशेष क्रम जारी है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमानजी के मिलन हुआ था. इसी कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है.
1.गुड़-चना चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग अर्पित करना अत्यंत प्रिया है. यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष से जुड़े कष्टों को शांत करने के लिए किया जाता है. नियमित रूप से यह भोग चढ़ाने से जीवन में स्थिरता आती है और बाधाओं में कमी देखने को मिलती है. ऐसे में बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को गुड़ चने भोग लगाकर प्रार्थना करना चाहिए.
2.नारियल अर्पित करने से क्या होता है
इस दिन को लेकर मानता है कि साबुत नारियल पर सिंदूर लगाकर और कलावा बांधकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संबंधी समस्याओं में सुधार आता हैं.
3.पान का बीड़ा चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करना खास तौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है. जिनके काम अटक रहे होते हैं. पूजा के बाद पान चढ़ाकर कार्य सिद्धि की कामना की जाती है. इससे कठिन और रुके हुए कार्यों में गति आने लगती है और हनुमान जी से प्रार्थना की जाती है कि आप मेरा इस कष्ट या पीड़ा को हारने का बीड़ा आपको मैं सोचता हूं.
4.इमरती और लड्डू चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को इमरती और बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय है. इनका भोग लगाने से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. यह प्रसाद चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में खुशहाली का वातावरण बनता है.
5.केसर भात अर्पित करने से क्या होता है
केसर भात का भोग हनुमान जी को अर्पित करने से कुंडली के दोषों को शांत करने का प्रयास किया जाता है. यह भोग विशेष रूप से बड़े मंगल के दिन किया जाता है. इससे जीवन में आने वाले संकटों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है. इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.
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