देश
फ्री वाई-फाई सुविधा से लैस हुए देश के 6 हजार रेलवे स्टेशन

छत्तीसगढ़ केसरी| कोरोना काल में भी भारतीय रेलवे अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन कर रही है। यही वजह है कि आज रेलवे को देश के सबसे मजबूत परिवहन नेटवर्क के बतौर जाना जाता है। वहीं, सरकार भी रेलवे से जुड़ी तमाम सुविधाओं में सुधार कर इसे और बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। जी हां, इसी का बड़ा परिणाम भी आज हमारे सामने है। दरअसल, सरकार ने भारतीय रेलवे को ‘डिजिटल इंडिया’ मुहिम से जोड़ने को बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह देशभर के सभी रेलवे स्टेशनों पर फ्री वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराए और अब भारतीय रेलवे ने देश भर के छह हजार रेलवे स्टेशनों को मुफ्त वाई-फाई की सुविधा से लैस कर दिया है।
इस सपने को साकार करने में रेलवे को लगे मात्र पांच साल
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि रेलवे को इस काम में मात्र पांच साल लगे हैं। रेलवे ने जनवरी 2016 में मुंबई सेंट्रल स्टेशन से मुफ्त वाई-फाई सुविधा की शुरुआत की थी। रेलवे यात्रियों और आम जनता को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने के लिए दूर-दराज के स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा का विस्तार जारी रखे हुए है। वर्तमान में देश के 30 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 6 हजार रेलवे स्टेशनों पर यह सुविधा कार्यरत है। इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक स्टेशन हैं।
रेलवे ने दिया आधिकारिक बयान
रेल मंत्रालय ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी कर कहा, 15 मई को पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद डिवीजन में झारखंड राज्य के हजारीबाग जिले के अंतर्गत आने वाला हजारीबाग टाउन देश का 6,000वां स्टेशन है, जहां मुफ्त वाई-फाई की सुविधा पहुंच गई है। वहीं इस बाबत रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्वीट कर यह जानकारी साझा की।
फ्री वाई-फाई सुविधा के लिए रेलवे ने 2016 में ऐसे शुरू किया था सफर
भारतीय रेलवे ने जनवरी 2016 में मुंबई के पहले रेलवे स्टेशन पर वाई-फाई सुविधा प्रदान करके अपनी यात्रा शुरू की है। इसके बाद, पश्चिम बंगाल का मिदनापुर स्टेशन इस सुविधा से युक्त होने वाला 5,000वां रेलवे स्टेशन था। उसके बाद अब 15 मई को हजारीबाग 6,000वां रेलवे स्टेशन हो गया। साथ ही, उसी दिन ओडिशा राज्य के अंगुल जिले के जरापाड़ा स्टेशन को भी वाई-फाई सुविधा से जोड़ दिया गया।
बिना किसी खर्च के रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा
रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा भारत सरकार के महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के उद्देश्यों को पूरा करती है। यह ग्रामीण और शहरी नागरिकों के बीच डिजिटल खाई को पाटने का काम करेगी। भारतीय रेलवे द्वारा अभी 6,000 स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा दी जा रही है। रेलवे को बिना किसी खर्च के रेलवे स्टेशनों पर स्व-टिकाऊ आधार पर वाई-फाई सुविधाओं का प्रावधान है। यह सुविधा रेल मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम, रेलटेल की मदद से प्रदान की जाती है। यह कार्य गूगल, डॉट (यूएसओफ के तहत), पीजीसीआईएल और टाटा ट्रस्ट के साथ साझेदारी में किया जा रहा है।
राज्यवार वाई-फाई सुविधा का ब्यौरा
मंत्रालय के बयान के अनुसार, 15 मई की स्थिति के अनुसार रेलवे स्टेशनों पर राज्यवार वाई-फाई सुविधा निम्नानुसार है: उत्तर प्रदेश 762, महाराष्ट्र 550, आंध्र प्रदेश 509, पश्चिम बंगाल 498, राजस्थान 458, तमिलनाडु 418, मध्य प्रदेश 393, बिहार 384, कर्नाटक 335, गुजरात 320, ओडिशा 232, झारखंड 217, असम 222, पंजाब 146, हरियाणा 134, केरल 120, छत्तीसगढ़ 115, तेलंगाना 45, दिल्ली 27, हिमाचल प्रदेश 24, उत्तराखंड 24, जम्मू और कश्मीर 14, गोवा 20, त्रिपुरा 19, चंडीगढ़ 5, अरुणाचल प्रदेश 3, नागालैंड 3, मेघालय, मिजोरम और सिक्किम में 1-1 रेलवे स्टेशन पर यह सुविधा है।
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।















