Connect with us

Uncategorized

भालुओं ने ली आदिवासी नेता की जान

Published

on

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में आदिवासी नेता मवेशियों को चराने के लिये जंगल में गया हुआ था। इसी बीच उस पर अचालक भालुओं ने हमला कर दिया। इससे उसकी मौत हो गई। यह घटना ग्राम उरपांजुर की बताई जा रही है। मामला बड़गांव थाना क्षेत्र का है।

मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को गोंडवाना समाज बड़गांव सर्कल अध्यक्ष गणेश ध्रुव मवेशियों को चराने जंगल में गया था। जब वह शाम में जब घर लौट रहा था तो तभी उस पर भालुओं ने हमला कर दिया। इस हमले में भालुओं ने उसके चेहरे पर और पैरों को बुरी तरह से काट लिया। बताया जा रहा है कि 3 भालुओं के एक साथ हमला करने की वजह से वह संभल नहीं पाए। उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम पहुंचकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

यह भी पढ़ें   पति ने अवैध सम्बन्ध के शक में पत्नी को उतारा मौत के घाट, पुलिस ने सुलझाई लूट व हत्या मामले की गुत्थी

3 तेंदुए सड़क किनारे घूमते दिखे

वहीं शहर से सटे इलाको में अब भालू के बाद तेंदुए की भी दहशत देखी जा रही है। दो गांवों में तेंदुए सड़क किनारे नज़र आये। जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर नरहरपुर मार्ग पर डुमाली गांव के पास 3 तेंदुए सड़क किनारे घूमते दिखे। सिदेसर गांव के पास भी एक तेंदुआ नजर आया है। गांववालों को देखकर तेंदुआ भागते हुए बस्ती के एक सुनसान घर में घुस गया था। इसकी जानकारी ग्राम पंचायत ने वन विभाग चारामा को दी थी।

तेंदुआ बस्ती के एक घर में घुसा

वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सहित कांकेर जिला प्रशासन के अधिकारी भी ग्राम सराधुनावागांव पहुंचे। ये घर सालों से बंद है और उसमें ताला लगा हुआ है। घरवाले किसी दूसरे गांव में रहते हैं। हालांकि घर में ताला लगा हुआ था, लेकिन उसके एक हिस्से में ऊपर की ओर थोड़ी सी जगह अंदर आने के लिए थी जिससे तेंदुआ घुस गया था। काफी मशक्कत के बाद तेंदुए को सुनसान घर से निकाला गया। इसके बाद तेंदुआ जंगल में चला गया। हालांकि वन विभाग की टीम तेंदुए के मूवमेंट पर नजर बनाए हुए है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uncategorized

राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…

Published

on

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आज राजधानी रायपुर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली. ‘मोर तिरंगा, मोर अभिमान-हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत आयोजित इस तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत प्रदेश के कई मंत्री, विधायक के साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए.

रायपुर के इंडोर स्टेडियम से भव्य तिरंगा यात्रा की कार्यक्रम का आगाज हुआ. देशभक्ति के रंग से सराबोर इस आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत तमाम कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे, डिप्टी सीएम अरुण साव, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक राजेश मूणत और विधायक सुनील सोनी समेत बीजेपी के अनेक नेता-कार्यकर्ता के साथ स्काउट एंड गाइड्स, NCC कैडेट्स, स्कूली छात्र-छात्राएं समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए.

इंडोर स्टेडियम में बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे. इस दौरान मौजूद युवाओं और स्कूली बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. तिरंगा यात्रा इंडोर स्टेडियम से निकलकर गणेश मंदिर तिराहा, बूढ़ापारा बिजली ऑफिस, नगर निगम भवन, महिला थाना चौक और फायर ब्रिगेड चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंची.

यह भी पढ़ें   मुख्यमंत्री बघेल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें किया नमन
Continue Reading

Uncategorized

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘जेन Z हमारे बच्चे’, गुमराह किए गए

Published

on

धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद पर शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जेन जी को गुमराह करने की कोशिशें की गईं. लेकिन पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा. उन्होंने कहा कि खुद पीएम से अपने इस्तीफे की पेशकश की थी.

कॉकरोच पार्टी प्रोटेस्ट के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि जेन जी हमारे ही बच्चे हैं. कुछ लोगों के द्वारा वे लोग गुमराह हो रहे है.

यह भी पढ़ें   Bhanupratapur By Election: भाजपा प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम ने दाखिल किया नामांकन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे को लेकर हुए भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के करीब दो हफ्ते बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. प्रधान ने शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर बात की.

आपको याद दिल दे कि NEET पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच उन्होंने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था.

Continue Reading

Uncategorized

बिना सुविधाओं के रचा इतिहास : छोटे से गांव ने देश को दिए 17 अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी….

Published

on

अहमदाबाद। गुजरात के महीसागर जिले का एक छोटा सा गांव रतुसिंह ना मुवाडा, जहां महज 100 घर हैं, आज देश भर में शतरंज क्रांति की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। बिना किसी महंगी अकादमी या बड़ी सुविधाओं के, इस गांव ने बीते चार सालों में 17 FIDE-रेटेड खिलाड़ी तैयार कर दिए हैं।

इस प्रेरणादायक बदलाव की नींव 2021 में रखी गई थी। गांव के  सरकारी प्राइमरी स्कूल ‘बाल वाटिका’ के 45 वर्षीय गणित शिक्षक संदीप उपाध्याय ने बच्चों को शतरंज सिखाने की मुहिम शुरू की। स्कूल की जर्जर हालत और सीमित संसाधनों के बावजूद, संदीप सर ने अपने वेतन का बड़ा हिस्सा बच्चों की एंट्री फीस, यात्रा खर्च, किताबों और चेस किट पर लगाकर उनके सपनों को पंख दिए। उनके इस संकल्प को ग्रैंडमास्टर अंकित राजपरा का भी साथ मिला, जो हर महीने गांव आकर बच्चों को मुफ्त कोचिंग देते हैं।

यह भी पढ़ें   पति ने अवैध सम्बन्ध के शक में पत्नी को उतारा मौत के घाट, पुलिस ने सुलझाई लूट व हत्या मामले की गुत्थी

उपलब्धियां और आंकड़े

मेडल व ट्रॉफी: खेत मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों के इन बच्चों ने अब तक 120 ट्रॉफी और 179 मेडल अपने नाम किए हैं।


टूर्नामेंट का प्रदर्शन: राज्य स्तर के 24 टूर्नामेंट्स में से 22 में गांव के बच्चों ने टॉप-3 में जगह बनाई।


विशेष पहचान: गांधीनगर के ‘स्टूडेंट्स चेस फेस्टिवल’ में बाल वाटिका को ‘बेस्ट इंस्टीट्यूट’ चुना गया। साथ ही, 21 बच्चों को सरकारी डिस्ट्रिक्ट लेवल स्पोर्ट्स स्कूल में मुफ्त शिक्षा और कोचिंग के लिए चुना गया है।

Continue Reading
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Trending