छत्तीसगढ़
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष धीरेंद्र दुबे और बिलासपुर सांसद अरुण साव के प्रयास से मिला कृषि केन्द्र, डीजल व बैंकों को छूट, जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार

भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने समस्याएं रखीं तो सांसद अरुण साव ने कलेक्टर से की थी बात
बिलासपुर। लॉकडाउन के दौरान किसानों को हो रही भारी दिक़्क़तों को लेकर भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने बिलासपुर के सांसद अरुण साव से बातचीत की इस पर सांसद अरुण साव ने कलेक्टर से बात कर समस्या के निराकरण के लिए कहा है, जिसके बाद लॉकडाउन में कृषि केन्द्र,पेट्रोल डीजल पंप एवं बैंक को खोलने का आदेश जारी किया गया, अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे व बिलासपुर के सांसद अरुण साव के प्रयास के लिए किसानो एवं जनप्रतिनिधियों ने आभार माना हैं|
ज्ञात हो कि भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने किसानो की समस्या को लेकर कहा था कि कोरोना महामारी ने पूरा जीवन चक्र ठप्प करके रख दिया है बार बार के लॉकडाउन से जीवन अस्त व्यस्त हो गया है परंतु लोगों का जीवन बचाने यह आवश्यक भी है क्योंकि लोगों का जीवन लेने वाला शत्रु अदृष्य है। लॉकडाउन के अंतराल में किसानों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । सब्जी की खेती करने वालों को खाद, दवा इत्यादि वस्तुओं की निरंतर आवश्यकता पड़ती है । वे उन्हे नहीं मिल पा रही है ।
उसी प्रकार से रबी के धान में भी बाली निकलने की अवस्था है ,तो कहीं धान की कटाई हो रही है ,तो कही धान कट चुका है । ऐसे में किसानों को हारवेस्टर, थ्रेसर ट्रेक्टर आदि यंत्रों की आवश्यकता पड़ रही है । परंतु लॉकडाउन के कारण डीजल नहीं मिल पाने के कारण इन मशीनों से काम नहीं हो पा रहा है वहीं किसानों को एक और समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अभी सामने खरीफ फसल की तैयारी करनी है। लगभग शत -प्रतिशत किसान समितियों के माध्यम से खाद एवं नकद ऋण उठाते है।
लॉकडाउन में सभी शासकीय एवं अर्धशासकीय कार्यालय बंद होने के कारण किसानों को खरीफ की तैयारी हेतु दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान धान खरीदी के समय ही अपना ऋण समायोजित करा लेते है और अप्रेल-मई माह में पुनः ऋण लेते है।
धीरेन्द्र दुबे ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शासन, प्रशासन ने विवशता में लॉकडाउन लगाया है । क्योंकि इस पर प्रदेश के मुखिया भूपेंश बघेल ने भी कहा है वे स्वयं लॉकडाउन के विरोध में है।
सरकार को इस ओर भी ध्यान देते हुए किसानों की समस्याओं का हल निकालना चाहिए। कम से कम सहकारी साख समितियों एवं बैंकों को कार्यालयीन दिवस में एक निश्चित अवधि के लिए खोलने की छूट दी जानी चाहिए ताकि किसानों को खरीफ फसलों की तैयारियां करने में सुविधा हो। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन हो ।
इस बात का भी ध्यान किसानों द्वारा रखा जाना आवश्यक है एवं किसानों ने ही अपनी जवाबदारी समझ इसका पालन करना चाहिए । क्योंकि जीवन से बढ़कर कुछ भी नहीं है । कहा गया है जान है तो जहान है।
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने कहा है कि सरकार की ही सारी जिम्मेदारी नहीं बनती है । किसानों को भी कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही जो किसान 31 मार्च तक ऋण पटाते है लॉकडाउन लगने से नहीं पटा पाए है उनके लिए सरकार को 31 मार्च की समय सीमा बढ़ाकर 31 जून करनी चाहिए।
धीरेन्द्र दुबे ने इन मुद्दों को लेकर सांसद अरुण साव से फ़ोन पर बात की सांसद ने कलेक्टर से बात कर समस्याओं के निराकरण के लिए कहा था जिसके बाद लॉकडाउन में कृषि केन्द्र,पेट्रोल डीजल पंप एवं बैंक को खोलने का आदेश जारी किया गया।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है



















