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छत्तीसगढ़

इफको नैनो यूरिया (तरल) बिक्री का शुभारंभ

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बिलासपुर| इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआॅपरेटिव लिमिटेड (इफको), सहकारिता विभाग एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या. बिलासपुर के संयुक्त तत्वाधान में आज संभागीय सहकारी संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर इफको नैनो यूरिया (तरल) बिक्री का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में चंद्राकर ने कहा की कृषि, सहकारिता व बैंक मिलकर कार्य करेंगे तभी सरकार के उद्देश्य की पूर्ति होेगी और किसानो का कल्याण होगा। उन्होने कहां कि गोधन न्याय योजना सरकार की अनूठी योजना है। गोबर को हम लोग फेंक देते थे और जगह-जगह सड़को पड़ा रहता था आज वह रोजगार का एक बड़ा साधन बन गया है। गोधन न्याय योजना से आज महिलाओं को स्वरोजगार मिल रहा है और गोबर से अलग-अलग उत्पाद बनाकर स्व सहायता समूह की महिलाएं आय प्राप्त कर रही है।

चंद्राकर ने कहा कि इफको किसानो की अपनी संस्था है। पर्यावरण को नुकसान न हो इसको ध्यान में रखकर नैनो यूरिया उत्पाद तैयार कर दिखा दिया हैं कि भारत के वैज्ञानिक रचनात्मक सोंच रखते है। इफको ने यह उत्पाद लाकर किसानो के लिए उपकार का कार्य किया है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ में इफको का कारखाना स्थापित हो इसके लिए प्रयास किया जायेगा।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय सहकारी बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष प्रमोद नायक ने कहां कि नैनो यूरिया कृषि जगत के लिए एक चमत्कार है। जिसके उपयोग से किसानो को लाभ मिलेगा। इसके आने से भारत की अर्थ व्यवस्था में बहुत फर्क पड़ेगा। कार्यक्रम में कृषि विभाग के उपसंचालक शशांक सिंदे ने भी उपयोगी जानकारी से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

इफको के राज्य विपणन प्रबंधक एस.के. चैहान ने नैनो यूरिया के संबंध में विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि पूरे देश में इसकी बिक्री प्रारंभ हो गई है। यूरिया की 45 किलो की एक बोरी जितना काम करती है उतना ही 500 एमएल की नैनो यूरिया की बाॅटल करेगी। विश्व मे पहली बार इस तकनीक का विकास इ्फको द्वारा किया गया। उन्होने बताया कि खेतो में एक बोरी यूरिया डालने पर उसका 30 से 40 प्रतिशत ही उपयोग होता है। शेष 60 से 70 प्रतिशत यूरिया गैंस बनकर अथवा पानी में घुलकर जमीन मे चला जाता है और जल को प्रदूषित करता है साथ ही अत्यधिक उपयोग से मिट्टी अम्लीय होने लगती है।

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नैनो के उपयोग से पर्यावरण के साथ-साथ किसानो को भी फायदा है। उन्होने बताया कि गतवर्ष 11 हजार किसानो के खेतो में 91 फसलो मे इसका परीक्षण तथा 41 विश्वविद्यालयों मे रिसर्च प्रकाशित होने के बाद नैनो को बिक्री के लिए लाया गया है। खेतो में 50 प्रतिशत दानेदार यूरिया के बदले नैनो यूरिया के उपयोग से फसलो के उत्पादन में लगभग साढ़े चार प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। उन्होने बताया कि यूरिया की एक बोरी की कीमत 266 रूपए है वही नैनो यूरिया का 500 एमएल 240 रूपए मे किसानो के लिए उपलब्ध है। 50 प्रतिशत यूरिया के बदलें नैनो के उपयोग से सरकार की लगभग 29 हजार करोड़ रूपए की सब्सीडी बचेगी।

कार्यक्रम का संचालन इफको के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन कुमार तिवारी ने किया इस अवसर पर अपेक्स बैंक रायपुर के प्रबंधक अभिषेक तिवारी, संयुक्त संचालक कृषि एम.के चैहान, संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं सुनील तिवारी, उप पंजीयक मंजू पाण्डेय, जिला सहकारी केद्रीय बैंक के सी.ई.ओ. प्रभात मिश्रा, सहायक नोडल अधिकारी आशीष दुबे, इ्फको आमसभा सदस्य डी.पी.सोनी, मार्कफेड जिला विपणन अधिकारी गजेन्द्र राठौर, सहकारी बैंको के शाखा प्रबंधक, पर्यवेक्षक, समिति प्रबंधक उपस्थित थे।

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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।

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इस वजह से हुई मानसून में देरी

सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:

  • सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।

  • न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।

इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

  • जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।

  • मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।

  • केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।

  • वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।

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मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।

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छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं

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सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है

नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है

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