छत्तीसगढ़
बदलता दन्तेवाड़ाः स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाएं हुई बेहतर, लोगो के सेहत में हुआ सुधार

दन्तेवाड़ा| मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अन्तर्गत जिले में 898 आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं 278 सुपोषण केन्द्रों के माध्यम से 6 हजार 228 गर्भवती एवं शिशुवती माता, 06 वर्ष तक के 27 हजार 025 बच्चों एवं 2 हजार 615 शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को लाभांवित किया जा रहा है। 01 जनवरी 2021 से अब तक 1 हजार 703 बच्चे कुपोषण से मुक्त हुये है। लक्षित बच्चों में से 55.06 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से बाहर आये हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा मुख्यमंत्री सुपोषण संग स्वरोजगार की शुरूआत जिला दन्तेवाड़ा से शुरू की गई थी। उक्त अभियान में प्रदाय की जा रही अण्डा सप्लाई हेतु 573 महिलाओं को चिन्हांकित कर बैकयार्ड मुर्गी पालन से जोड़कर उनके आजीविका वर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। 1 जनवरी से अब तक 75 हितग्राहियों को 5210 लेयर बर्ड्स का वितरण किया गया।
बापी ना उवाट जिले में कुपोषण एवं एनीमिया को कम करने सभी ग्राम पंचायतों में 197 बापियां स्वैच्छिक रूप से कार्यरत है। युनिसेफ के साथ जिला प्रशासन द्वारा ‘‘बापी न उवाट‘‘ (दादी की सीख) कार्यक्रम के माध्यम से गांव की बुजुर्ग एवं अनुभवी महिलाओं को अभियान में शामिल करते हुए उनके अनुभवों एवं नुस्खों के माध्यम से कुपोषण के विरूद्ध जनआंदोलन सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता के प्रति परिवार समाज एवं ग्राम वासियों में व्यवहार परिवर्तन कराया जा रहा है।
जिले में 19 हाट-बाजार संचालित है। जिसमें मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना का संचालन किया जा रहा है। जहां मरीजों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा एवं दवाईयां उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही माताओं एवं शिशुओं का टीकाकरण भी किया जाता है। इस वर्ष कुल 26 हजार 564 मरीजों को निःशुल्क ईलाज कर लाभांवित किया गया है।
सुगम स्वास्थ्य दन्तेवाड़ा से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में राहत मिली है। इस योजना से स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई है। बिना समय गंवाए जल्द से जल्द गर्भवती महिलाओं एवं गम्भीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना सुगम हुआ है। जिले के कुल 82 निजी वाहनों को चिन्हित किया गया है। इस वर्ष 79 लोंगो ने इस योजना का लाभ प्राप्त किया है। एवं अब तक कुल राशि 31 हजार 200 रूपये का नगद भुगतान संबंधित निजी वाहन मालिकों को किया गया है।
जिले में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के चार चरण पूर्ण हो चुके है। इन चारो चरणों में जिले की सम्पूर्ण जनसंख्या में प्रत्येक व्यक्ति का रक्त परीक्षण किया गया प्रथम चरण में जहाँ धनात्मक प्रकरण 14891 एवं एपीआई 46.91 रहा वहीं चतुर्थ चरण में धनात्मक प्रकरण 1215 एवं एपीआई 5.05 रहा है, इस अभियान के कारण मलेरिया के प्रकरण जिले में एक वर्ष में 54 प्रतिशत की कमी परीलक्षित हुई है। यह जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वर्तमान में जिले में पॉचवा चरण संचालित किया जा रहा है।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है


















