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बिलासपुर: स्कूलों में सामुदायिक सहभागिता का नया अध्याय,1788 न्योता भोज में सवा लाख बच्चों ने लिया पौष्टिक भोजन का आनंद

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स्कूलों में सामुदायिक सहभागिता का नया अध्याय लिख रहा न्योता भोज

जिले में 1788 न्योता भोज में लगभग सवा लाख बच्चों ने लजीज और पौष्टिक व्यंजनों का लिया आनंद

बिलासपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर 16 फरवरी 2024 को विधिवत रूप से स्कूलों में न्योता भोज की शुरुआत की गई और देखते ही देखते न्योता भोज ने पूरे प्रदेश के स्कूलों में अपनी एक अलग पहचान बना ली। सामुदायिक सहयोग से स्कूली बच्चों को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस आयोजन को स्कूली शिक्षक और विभिन्न समुदाय के लोग हाथों हाथ ले रहे हैं और साथ ही प्रशासन की भी पूरी सहभागिता इसमें नजर आ रही है, यही वजह है कि जहां भी न्योता भोज का आयोजन होता है वहां कलेक्टर कमिश्नर समेत स्कूल शिक्षा विभाग के तमाम अधिकारी पहुंचने की कोशिश करते हैं इसका सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि जहां बच्चों को एक तरफ पौष्टिक आहार मिल जा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ स्कूलों की मॉनीटरिंग भी हो जा रही है यानी एक पंथ दो काज के तर्ज पर न्योता भोज छत्तीसगढ़ के स्कूलों में छाया हुआ है। प्रदेश के सभी स्कूलों में न्योता भोज होता हुआ नजर आ रहा है। जिले के स्कूलों में अब तक 1 हजार 788 न्योता भोज का आयोजन विभिन्न अवसरों पर किया गया है, जिसमें 1 लाख 18 हजार 27 बच्चों ने पौष्टिक एवं लजीज भोजन का आनंद लिया है।

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नन्हे मुन्ने बच्चों को मिलने लगा स्वादिष्ट आहार-
यूं तो स्कूल में मध्याह्न भोजन पहले से ही बच्चों को वितरित होता आ रहा है लेकिन मध्याह्न भोजन जहां पौष्टिक भोजन के रूप में परोसा जाता है वही न्योता भोज की अवधारणा स्वादिष्ट भोज के रूप में की गई है जिसमें बच्चों को पूरी हलवा खीर मिठाई जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाने का मौका मिलता है।

शिक्षक और स्कूल से जुड़े लोग अपने जन्मदिन या खास अवसरों को अब स्कूल के बच्चों के साथ न्योता भोज के रूप में मनाना पसंद कर रहे हैं। स्वादिष्ट भोजनों को पाकर उनके चेहरे पर जो संतुष्टि नजर आती है, उसे देखकर अपने खास मौकों पर न्योता भोज देने वालों को भी संतुष्टि और खुशी मिलती है।

  सरकंडा बिलासपुर स्थित पंडित रामदुलारे दुबे स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक बालक शाला सरकंडा में पिछले माह रिटायर हुए शिक्षक श्री प्रताप पाटनवार ने अपने जन्मदिन के अवसर पर 700 लोगों के न्योता भोज का आयोजन किया और कार्यक्रम के बाद उन्होंने रुंधे गले और आंखों में आंसुओं के साथ कहा कि ‘‘जिन बच्चों के कारण मुझे 42 साल तक सरकार सैलरी देती रही और जिनके कारण मेरा घर चला रहा उनके लिए मैं एक दिन कुछ खास कर पाया उसकी मुझे खुशी है।’’ 

  सरकंडा स्कूल में पूरे आयोजन को संपूर्ण संपूर्ण करने में महती भूमिका निभाने वाले शिक्षक नेता और व्याख्याता विवेक दुबे ने  बताया कि शासन की यह योजना वास्तव में अपने आप में एक अद्भुत योजना है क्योंकि हम अपनी खुशी ऐसे लोगों के साथ बांटते हैं जिन्हें उसका मोल पता है। 

सरकारी स्कूल में पलने बढ़ने वाले अधिकांश बच्चे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले घर के बच्चे हैं और उनके साथ मिलकर जब आप बैठकर भोजन करते हैं तो उनके थाली में जब यह भोज भरोसा जाता है तो इसकी कीमत उन्हें बेहतर तरीके से पता है और वह आनंद के साथ इसका लुत्फ़ उठाते हैं, उनके चेहरे की खुशी देखकर न्योता भोज करने वाला भाव विभोर ना हो जाए ऐसा हो ही नहीं सकता।

इससे न केवल सामुदायिक परस्परता बढ़ रही है बल्कि स्कूलों से आमजन का जुड़ाव भी और अधिक बेहतर तरीके से हो रहा है साथ ही बड़े अधिकारी जब न्योता भोज के बहाने ही स्कूल पहुंचते हैं तो स्कूल की मॉनिटरिंग भी हो जाती है।

क्या है न्योता भोज-
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना को सामुदायिक सहयोग से और अधिक पोषक बनाने राज्य शासन द्वारा न्योता भोज की अभिनव पहल की जा रही है। न्योता भोज की अवधारणा एक सामुदायिक भागीदारी पर आधारित है। कोई भी व्यक्ति या सामाजिक संगठन, जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य खास मौको पर अपने पास के स्कूल, आश्रम या छात्रावास में जाकर बच्चों के लिए न्योता भोजन का कार्यक्रम कर सकता है। इसमें पूर्ण भोजन का योगदान किया जा सकता है या अतिरिक्त पूरक पोषण के रूप में मिठाई, नमकीन, फल या अंकुरित अनाज आदि के रूप में खाद्य सामग्री का योगदान दिया जा सकता है।

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बिलासपुर को मिली नई सौगात

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Chouksey College of Ayurved Research Center & Hospital

बिलासपुर। क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। Chouksey Group of Colleges के अंतर्गत नया Chouksey College of Ayurved Research Center & Hospital अब राष्ट्रीय आयुर्वेद आयोग (NCISM), नई दिल्ली से संबद्ध हो गया है।

यह उपलब्धि बिलासपुर के लिए गौरव की बात है, क्योंकि अब जिले को अपना पहला और एकमात्र निजी बीएएमएस (BAMS) कॉलेज मिल गया है।

कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि इस वर्ष होने वाली काउंसलिंग में चौकसे आयुर्वेद कॉलेज में NEET 2025 के आधार पर प्रवेश (Admission) दिए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेद शिक्षा एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।

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ज्ञात रहे कि इस वर्ष Chouksey Group के इंजीनियरिंग कॉलेज में बिलासपुर संभाग में सर्वाधिक प्रवेश (Admissions) हुए हैं। साथ ही डिग्री पाठ्यक्रमों जैसे B.Com, Law, BBA, BCA, PGDCA की सभी सीटें भी पूर्ण रूप से भर गई हैं। यह विद्यार्थियों के बीच चौकसे ग्रुप की बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास को दर्शाता है।

चौकसे ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष जायसवाल ने कहा —
“हमारा संकल्प विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। बिलासपुर में पहला निजी बीएएमएस कॉलेज खुलना न केवल विद्यार्थियों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। हमें विश्वास है कि यह कॉलेज आयुर्वेद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।”

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Bilaspur के नामी LCIT Group of Institutions का छात्रों के साथ भयानक फर्जीवाड़ा : वादे बड़े-बड़े, हकीकत पानी-पानी!

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LCIT Group of College bilaspur

बिलासपुर: LCIT Group of Institutions – Bilaspur, जो हर साल एडमिशन के दौरान बड़े-बड़े वादे और लुभावने दावे करता है, उसकी सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। दावा किया जाता है कि यहां आधुनिक लैब्स, अनुभवी फैकल्टी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा — लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

बारिश आई, लैब्स ने छलनी बनकर स्वागत किया!
हमें मिले वीडियो में कॉलेज की लैब्स से टपकती छतें साफ़ दिखाई दे रही हैं। जहां स्टूडेंट्स को मशीनों के साथ प्रैक्टिकल करना चाहिए था, वहां अब पानी से बचने के लिए प्लास्टिक की बाल्टियाँ रखी जा रही हैं। सवाल ये उठता है कि जब प्रयोगशालाएं ही सुरक्षित नहीं, तो शिक्षा कितनी सुरक्षित होगी?

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फैकल्टी? बस कागज़ों पर!
सूत्रों के अनुसार, यहां कई फैकल्टी सदस्य केवल ऑन पेपर मौजूद हैं। यानी नाम तो है, पर काम में कहीं नजर नहीं आते। छात्रों का कहना है कि कई विषयों की क्लास ही नियमित नहीं होती।

इंजीनियरिंग प्रिंसिपल भी सिर्फ नाम के!
कहा जा रहा है कि इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रिंसिपल भी फुल टाइम नहीं है, बल्कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए कागजों पर मौजूद हैं। यह छात्रों के भविष्य के साथ खुला मज़ाक है।

स्टाफ की नियुक्ति पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि अधिकांश स्टाफ या तो यहीं के पुराने छात्र हैं या फिर अन्य कॉलेज से किसी वजह से हटाए गए लोग हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाता है।

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🎙 बिलासपुर के इस संस्थान की मार्केटिंग चमचमाती है, लेकिन हकीकत में ढहती छतें, दिखावटी स्टाफ और खोखले दावे छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ज़रूरत है कि शिक्षा को सिर्फ व्यापार न बनाकर, जिम्मेदारी समझा जाए

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बिलासपुर

Bilaspur News: सट्टा के खिलाफ संगठित अपराध और जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई

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बिलासपुर: नगदी रकम 11,600/- रूपये, मोचाईल, सट्टा प‌ट्टी पर्ची जप्त

अपराध क्रमांक 1268/2024 धारा- 06 ख जुआ प्रतिशेध अधिनियम 2022 तथा धारा 112(2) बीएनएस०
नाम गिर० आरोपी :– आकाश सारथी पिता राजेश सारथी उम्र 28 साल नि० दुर्गा मंदीर के पास, कस्तुरबा नगर थाना सिविल लाईन जिला बिलासपुर छ०ग०

विवरण इस प्रकार है कि उपरोक्त आरोपी कल्याण सट्टा नाम से अंको के माध्यम से हारजीत का दाव लगाकर स‌ट्टा लिख रहा था। मुखबीर से प्राप्त सूचना के आधार पर आरोपी को गुरुद्वारा के सामने सिन्धी कॉलोनी थाना सिविल लाईन के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपी से पूछताछ करने पर मोबाईल नंबर धारक व्यक्ति कथित खाईवाल के कहने पर तथा उससे मिलकर कर स‌ट्टा प‌ट्टी लिखना, जिसके एवज में प्रतिदिन कमीशन के रूप में नगदी रकम प्राप्त होना बताया। आरोपी के बताये अनुसार प्रकरण में मोबाईल नंबर धारक व्यक्ति कथित खाईवाल को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियो के विरुध्द जुआ अधिनियम तथा संगठित अपराध की धारा के अंतर्गत कार्यवाही की गई।

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