छत्तीसगढ़
दंतेवाड़ा: जैविक किसानों का सम्मान, पद्मश्री भारत त्यागी होंगे शामिल

दंतेवाड़ा जिले की धान की 18 परंपरागत किस्मों को प्रमोट करने पर जिला प्रशासन एक तीन दिवसीय बड़ा आयोजन कर रहा है। इस आयोजन में पद्मश्री भारत त्यागी भी शामिल होने वाले हैं।
दंतेवाड़ा: जैविक जिला दंतेवाड़ा ने जैविक उत्पादों के मामले में नाम तो खूब कमाया, लेकिन किसानों को उत्पादों का बाजिब दाम कभी नहीं मिल पाया। जिला प्रशासन इस दिशा में अब बड़ी पहल करने जा रहा है। चैन्नई और पुणे की लैब से टेस्ट होकर आए उत्पादों की प्रदर्शनी आडिटोरियम जावंगा में लगाने जा रहा है। यह आयोजन तीन दिनों तक 5 से 7 दिसंबर तक चलेगा।

इस कार्यक्रम में जैविक खेती में खासी रुचि रखने वाले पद्मश्री भरत त्यागी दंतेवाड़ा के किसानों से मिलने आ रहे हैं। यहां वे दंतेवाड़ा के उन आठ किसानों से मिलेंगे जिनके उत्पाद पुणे और चेन्नई लैब से टेस्ट होकर आए हैं। इस दौरान कृषि मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव और सातों जिलों के कलेक्टर भी इस आयोजन में शामिल होंगे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दंतेवाड़ा की परंपरागत किस्मों को देश- दुनियां में पहचान दिलाना है। साथ ही जैविक उत्पादों को भारत के बाजारों में उचित मूल्य दिलाना है। जिले में जैविक खेती करने वाले 10 हजार 2 सौ 63 किसान हैं। मौजूदा वक्त में 65 हजार 2 सौ 79 हैक्टेयर रकबे में जैविक खेती हो रही है।
पहचान के लिए जूझ रहीं चूड़ी, सिंदूर, श्रृंगार और नैन कजरिया किस्में
दंतेवाड़ा जिले की धान की 18 किस्में जो अपनी पहचान के लिए हजारों सालों से जूझ रही हैं। आदिवासी अंचल में इन किस्मों को पीढी दर पीढ़ी संजोकर रखा गया है। लेकिन दंतेवाड़ा से बाहर अपनी पहचान नही बना सकी। इस आयोजन से धान की इन किस्मों की बड़ी प्रदर्शनी लगाई जा रही है। विशेष तौर पर इन किस्मों को दंतेवाड़ा आ रहे मेहमानों को दिखाया जाएगा। इसमें सफरी, गाढ़ृा खूटा, लोक्टी मांझी, चूड़ी, जोंधरा धान, हल्दीघाटी, दुबराज, बादशाह भोग, साठका, गुमड़ा, लाल धान, लाल हजारी, मल्हार, चूड़ी धान, सिंदूर और श्रृंगार धान, नैन कजरिया, कालामारी, कदमफूल, गंगामारू, जीराफूल, जबाफूल, देव भोग, बबई खूटा, ये वो किस्में है जिनका उत्पादन दंतेवाड़ा में लिया जा रहा है।
आईकॉन किसानों की दिखाई जाएगी डॉक्यूमेंट्री
इस आयोजन के लिए कृषि विभाग विशेष तैयारियों में जुटा हुआ है। जिले के चारों विकास खंडों से आठ किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों की डॉक्यूमेंट्री बना ली गई है। यह डॉक्यूमेंट्री जिले भर से आए जैविक खेती करने वाले किसानों को दिखाई जाएगी। कुपेर निवासी कृषक चरण सिंह, भोगाम निवासी महिला कृषक मंगरिता, बिजाम के कृषक हरि सिंह, मासोडी निवासी गीता मोडिय़ाम, मैलावाड़ा निवासी कमल सिेंह, नकुलनार की महिला किसान रंजना, छोटे बेड़मा निवासी बलदीप ओयाम और गाटम निवासी फूलो को किसानों के सामने रॉम मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
पहचान के लिए जूझ रहीं चूड़ी, सिंदूर, श्रृंगार और नैन कजरिया किस्में
दंतेवाड़ा जिले की धान की 18 किस्में जो अपनी पहचान के लिए हजारों सालों से जूझ रही हैं। आदिवासी अंचल में इन किस्मों को पीढी दर पीढ़ी संजोकर रखा गया है। लेकिन दंतेवाड़ा से बाहर अपनी पहचान नही बना सकी। इस आयोजन से धान की इन किस्मों की बड़ी प्रदर्शनी लगाई जा रही है। विशेष तौर पर इन किस्मों को दंतेवाड़ा आ रहे मेहमानों को दिखाया जाएगा। इसमें सफरी, गाढ़ृा खूटा, लोक्टी मांझी, चूड़ी, जोंधरा धान, हल्दीघाटी, दुबराज, बादशाह भोग, साठका, गुमड़ा, लाल धान, लाल हजारी, मल्हार, चूड़ी धान, सिंदूर और श्रृंगार धान, नैन कजरिया, कालामारी, कदमफूल, गंगामारू, जीराफूल, जबाफूल, देव भोग, बबई खूटा, ये वो किस्में है जिनका उत्पादन दंतेवाड़ा में लिया जा रहा है।
आईकॉन किसानों की दिखाई जाएगी डॉक्यूमेंट्री
इस आयोजन के लिए कृषि विभाग विशेष तैयारियों में जुटा हुआ है। जिले के चारों विकास खंडों से आठ किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों की डॉक्यूमेंट्री बना ली गई है। यह डॉक्यूमेंट्री जिले भर से आए जैविक खेती करने वाले किसानों को दिखाई जाएगी। कुपेर निवासी कृषक चरण सिंह, भोगाम निवासी महिला कृषक मंगरिता, बिजाम के कृषक हरि सिंह, मासोडी निवासी गीता मोडिय़ाम, मैलावाड़ा निवासी कमल सिेंह, नकुलनार की महिला किसान रंजना, छोटे बेड़मा निवासी बलदीप ओयाम और गाटम निवासी फूलो को किसानों के सामने रॉम मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है






















