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Explainer: हूतियों के हमले का क्या पड़ेगा असर, बढ़ेंगी तेल की कीमतें? जहाज बचाने का नया तरीका

Houthi rebels of Yemen attacking cargo ships in Red Sea amid Israel Hamas war: इजराइल और हमास के बीच जारी जंग के बीच यमन के विद्रोही गुट हूती विद्रोही लाल सागर में लगातार समुद्री मालवाहक जहाजों को निशाना बना रहे हैं।
जिस वजह से कंपनियां इस रास्ते से जहाज भेजने से कतरा रही हैं। हाल ही में अमेरिका और ब्रिटेन ने हूतियों से निपटने के लिए उनपर हमला शुरू किया है। ज्यादा समय तक अगर जहाज इस रास्ते से नहीं गुजरेंगे तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि इस रास्ते बड़ी मात्रा में तेल भेजा जाता है।
हूतियों के इस हमले की वजह इजराइल का गाजा में हमला है। हूति फिलिस्तिनियों की साथ एकजुटता दिखाने के लिए ऐसे हमले कर रहे हैं। अब अमेरिका हूती विद्रोहियों पर बम बरसाने लगा है। बावजूद इसके हूति विद्रोहियों का कहना है कि वे यमन से आने वाले जहाजों पर हमला करेंगे।
बता दें कि लाल सागर का यह रास्ता व्यापार के लिए बहुत अहम है क्योंकि दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार इसी मार्ग से होता है। स्वेज नहर के रास्ते हर साल 17 हजार से ज्यादा जहाज गुजरते हैं। जानकारों का कहना है कि हूती खुद पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी ऐसा कर सकते हैं। इसका मकसद इजराइल पर दबाव बनाना भी हो सकता है। अब अमेरिका, ब्रिटेन समेत उनके कई सहयोगी देशों ने कॉमर्शियल शिप्स पर हमले को रोकने के लिए हूतियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
अन्य मार्ग अपनाने पर 10 गुना बढ़ेगी लागत
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर और दिसंबर के बीच लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हूतियों के हमले 500% बढ़ गए हैं। इस वजह से कई शिपिंग कंपनियां इस रास्ते जहाज भेजने से कतरा रही हैं और अन्य मार्गों को अपनाने के लिए मजबूर हैं। लेकिन इस वजह से सामान भेजने की लागत 10 गुना बढ़ गई है। इस रास्ते के बाद अफ्री के चारो तरफ घूमकर जाने का रास्ता बचता है। इससे 4 हजार मील की एक्स्ट्रा दूरी तय करनी पड़ सकती है जिसमें खर्च ज्यादा आएगा।
लॉजिस्टिक्स टेक कंपनी फ्लेक्सीपोर्ट ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि 389 कंटेनर जहाज पहले ही स्वेज नहर के रास्ते से हट चुके हैं। यह दुनिया की कंटेनर क्षमता का लगभग 20 प्रतिशत है। अन्य कंटेनर जहाज भी ऐसा ही कर रहे हैं।
चीन से अपना संबंध क्यों बता रहे हैं जहाज
न्यूज 18 ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि लाल सागर से गुजरने वाले 5 जहाज अपने संकेतों का उपयोग चीन से संबंध बताने में कर रहे हैं ताकि हूति विद्रोही उनपर हमले नहीं करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 5 में से दो इस समय लाल सागर में हैं, दो एशिया के रास्ते में संकटग्रस्त जलमार्ग से सफलतापूर्वक गुजर गए हैं और पांचवां अदन की खाड़ी की ओर जाता हुआ दिखाई दे रहा है।
कौन हैं विद्रोही जो इलाके में मचाते हैं आतंक
बता दें कि हूती यमन का विद्रोही गुट है जिसका वहां के एक बड़े इलाके पर कब्जा है और वे उस क्षेत्र में अपनी सरकार चलाते हैं। यमन की सरकार से इनका टकराव बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनके पास करीब 20 हजार लड़ाके हैं। हूतियों का ज्यादा प्रभाव यमन के पश्चिमी इलाके में है। हूतियों ने साल 2014 के युद्ध में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था।
यमन में लंबे समय से गृहयुद्ध की स्थिति है। हूति सउदी अरब विरोधी और ईरान समर्थित हैं। इसकी वजह ये है कि हूति शिया हैं और ईरान भी शिया बहुल देश है। सऊदी में सुन्नी ज्यादा हैं इस वजह से उनका उससे टकराव है। एक महीने पहले भी टर्की से चलकर भारत आ रहे एक शिप को हूतियों ने लाल सागर में अगवा कर लिया था। इसे 25 क्रू मेंबर्स को बंधक बना लिया गया था।
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‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।






















